यूपीः कांग्रेस की तरफ से गठबंधन का खुला ऑफर, कौन से छोटे दल मिलाएंगे 'हाथ' से हाथ?

बीजेपी और सपा के तर्ज पर कांग्रेस ने भी गठबंधन के लिए छोटे दलों को ऑफर दिया है. कांग्रेस के चुनाव ऑब्जर्वर और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा यूपी में अभी हमारा किसी से गठबंधन नहीं, लेकिन छोटे दलों को साथ लेकर चलेंगे. गठबंधन के लिए कांग्रेस दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस के हाथ से कौन दल हाथ मिलाएंगे? 

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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली ,
  • 28 अक्टूबर 2021,
  • अपडेटेड 4:05 PM IST
  • कांग्रेस छोटे दलों से गठबंधन का दिया ऑफर
  • कांग्रेस से सपा और बसपा का गठबंधन नहीं
  • कांग्रेस के सामने कौन-कौन विकल्प बचे हैं

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 का भले ही औपचारिक ऐलान न हुआ हो, पर राजनीतिक दलों ने अपने-अपने अभियान तेज कर दिए हैं. बीजेपी और सपा के तर्ज पर कांग्रेस ने भी गठबंधन के लिए छोटे दलों को ऑफर दिया है. कांग्रेस के चुनाव ऑब्जर्वर और छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने कहा यूपी में अभी हमारा किसी से गठबंधन नहीं, लेकिन छोटे दलों को साथ लेकर चलेंगे. गठबंधन के लिए कांग्रेस दरवाजे सभी के लिए खुले हुए हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस के हाथ से कौन दल हाथ मिलाएंगे? 

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कांग्रेस से गठबंधन को सपा तैयार नहीं

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बार साफ कह चुके हैं कि सूबे में किसी भी बड़ी पार्टियों से गठबंधन नहीं करेंगे. उन्होंने बसपा और कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के लिए मना कर चुके हैं. ऐसे में सपा ने छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है, जिसके तहत अखिलेश ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर, महान दल के प्रमुख केशव देव मौर्य, राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत चौधरी और जनवादी पार्टी के संजय चौहान से गठबंधन किया है. 

बसपा अकेले लड़ेगी चुनाव

बसपा प्रमुख मायावती साफ कह चुकी हैं कि 2022 के चुनाव में किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं करेंगी. बसपा अकेले सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. वहीं, बीजेपी ने अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) और संजय निषाद की निषाद पार्टी के साथ गठबंधन कर रखा है. बसपा के साथ कांग्रेस के गठबंधन की भी उम्मीदें नहीं रह जाती है और बीजेपी के साथ जाने का सवाल ही नहीं बनता. 

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कांग्रेस की नजर छोटे दलों पर

उत्‍तर प्रदेश में कांग्रेस भी इस बार नए प्रयोग की तैयारी में है और वह भी इस बार चुनाव में छोटे दलों से समझौता कर चुनाव लड़ने की रणनीति पर काम कर रही है. 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यूपी में कृष्णा पटेल की अपना दल और बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी और इस बार भी उनकी नजर छोटे दलों पर है. ऐसे में कांग्रेस के सामने किन दलों के साथ गठबंधन का विकल्प है. 

पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के उभरते दलित नेता चंद्रशेखर आजाद ने अपनी भीम आर्मी के राजनीतिक फ्रंट आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के बैनर तले सियासी एंट्री की है. चंद्रशेखर 2022 के चुनाव में गठबंधन के तैयार है, लेकिन सपा के साथ उनकी बात नहीं बन पाई है. ऐसे में चंद्रशेखर की प्रियंका गांधी के साथ अच्छी बॉन्डिंग है. ऐसे में कांग्रेस यूपी में चंद्रेशेखर के साथ गठबंधन का विकल्प हो सकता है. 

कांग्रेस के सामने विकल्प क्या हैं

कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया) भी इस बार यूपी के चुनाव में लड़ने का दम भर रहे हैं. उन्होंने भी सूबे की 100 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. राजा भैया के अखिलेश यादव के छत्तीस के आंकड़े हैं, जिसके चलते सपा के साथ गठबंधन की संभावना अभी तक नहीं बन पा रही है. जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में राजा भैया कांग्रेस के समर्थन से अपना कैंडिडेट जिताने में सफल रहे थे. ऐसे में कांग्रेस और राजा भैया के साथ में मिलाकर चुनावी किस्मत आजमा सकते हैं.  

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शिवपाल-ओवैसी क्या कदम उठाएंगे

सपा से नाता तोड़कर समाजवादी प्रगतिशील लोहिया पार्टी बनाने वाले शिवपाल यादव ने भी अभी तक किसी के साथ हाथ नहीं मिलाया है. हालांकि, शिवपाल की पहली प्राथमिकता सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की है. ऐसे में अखिलेश के साथ उनकी बात नहीं बनती है तो कांग्रेस के साथ गठबंधन का विकल्प बन सकता है. इसके अलावा अय्यूब अंसारी की पीस पार्टी अपने सियासी वजूद को बचाए रखने की कवायद में है, जिसके लिए उनकी नजर किसी बड़े दल के साथ है. 

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी यूपी में सक्रिय हैं, लेकिन ओमप्रकाश राजभर के सपा के साथ जाने के बाद अभी तक किसी भी दल के साथ उनकी बात नहीं बन पाई है. कांग्रेस के साथ ओवैसी के गठबंधन की संभावना बहुत ही कम है. इसके अलावा  अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी यूपी में चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं और पार्टी नेता संजय सिंह सूबे में डेरा जमाए हुए हैं. लेकिन, कांग्रेस के साथ उनकी बात बनना मुश्किल है, क्योंकि कई राज्यों में केजरीवाल की सीधी लड़ाई कांग्रेस से है. 

 

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