सीट बंटवारे में सबसे मुश्किल हालात महाराष्ट्र में, NDA-INDIA दोनों गठबंधनों को क्यों करनी पड़ रही है मशक्कत?

लोकसभा चुनाव करीब आते ही एनडीए से लेकर इंडिया ब्लॉक तक, सीट बंटवारे का गणित सुलझाने की मुहिम तेज हो गई है. लेकिन महाराष्ट्र का सवाल सबसे मुश्किल साबित हो रहा है. महाराष्ट्र में दोनों गठबंधनों को सीट बंटवारे पर कड़ी मशक्कत क्यों करनी पड़ रही है?

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बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (फाइल फोटो) बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (फाइल फोटो)

बिकेश तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2024,
  • अपडेटेड 12:37 PM IST

लोकसभा चुनाव करीब आ गए हैं. केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी इंडिया ब्लॉक सीट शेयरिंग का गणित सुलझाने की कवायद में जुटे हैं. दोनों ही गठबंधनों में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की सीटों का सवाल सुलझ गया है लेकिन बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक यह अब भी मुश्किल सवाल बना हुआ है. सबसे मुश्किल हालात महाराष्ट्र में हैं जहां एनडीए हो या इंडिया, दोनों में से किसी भी गठबंधन में सीट शेयरिंग का ऐलान अब तक नहीं हो सका है.

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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों को अपने-अपने गठबंधन में 48 लोकसभा सीटों वाले सूबे में सीट शेयरिंग को लेकर कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि दोनों ही गठबंधनों में जितनी पार्टियां हैं, उतनी ही डिमांड है. एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर गृह मंत्री अमित शाह महाराष्ट्र के बीजेपी और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ बैठक पर बैठक कर रहे हैं लेकिन अब तक किसी फॉर्मूले पर सहमति नहीं बन सकी है. डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने यह दावा जरूर किया है कि करीब 80 फीसदी मामले सुलझा लिए गए हैं. लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि सहमति बनेगी कैसे?

एनडीए में सीट शेयरिंग फॉर्मूला क्या

महाराष्ट्र में कई दौर की बैठक के बाद एनडीए में सीट शेयरिंग के अलग-अलग फॉर्मूले सामने आए हैं. बीजेपी ने खुद 32, शिंदे की पार्टी को 12 और अजित पवार की पार्टी को चार सीटें देने का फॉर्मूला दिया है. एक फॉर्मूला यह भी सामने आया था कि बीजेपी 34 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है और बाकी 14 में 10 सीटें शिंदे और तीन से चार सीटें अजित पवार की पार्टी को ऑफर कर रही है.

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एनडीए में कहां फंस रहा पेच

दरअसल, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 13 सांसद हैं. रामटेक, यवतमाल-वाशिम और कोल्हापुर समेत छह से सात ऐसी सीटों पर बीजेपी अपने उम्मीदवार उतारना चाहती है जहां से फिलहाल शिंदे की पार्टी के सांसद हैं. अजित पवार की पार्टी भी मावल और परभणी सीट पर दावेदारी कर रही है. इन सीटों से भी शिंदे की पार्टी के सांसद हैं. सीएम शिंदे पर अपने साथ आए नेताओं का भी दबाव है कि अपनी सीटें न छोड़ें. एक खतरा यह भी है कि अगर शिंदे बीजेपी के 10 से 12 सीट के फॉर्मूले पर सहमत भी हो गए तो कहीं उनकी पार्टी के नेता साथ छोड़कर उद्धव के साथ न चले जाएं.

शायद यही वजह है कि सीएम शिंदे बीजेपी के सामने उन सीटों की डिमांड कर रहे हैं जहां से विपक्षी गठबंधन में शिवसेना यूबीटी के उम्मीदवार मैदान में होंगे. दूसरी तरफ, अजित की पार्टी की रणनीति भी शरद पवार की पार्टी से हेड टू हेड मुकाबले की है. अब मुश्किल यह है कि बीजेपी महाराष्ट्र में अधिक से अधिक सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है. ऐसे में अगर विपक्षी गठबंधन में उद्धव ठाकरे और शरद पवार अधिक सीटें लेने में सफल रहते हैं तो एनडीए में शिंदे और अजित की पार्टियों को कैसे एडजस्ट किया जाएगा?

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इंडिया ब्लॉक में क्यों फंसा है पेच

महाराष्ट्र में सीट बंटवारे का गणित सुलझाना विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए भी मुश्किल साबित हो रहा है. इंडिया गठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर इस फॉर्मूले की चर्चा थी कि शिवसेना यूबीटी 20, कांग्रेस 18 और शरद पवार की पार्टी 10 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी (वीबीए) की पांच सीटों वाली मांग के साथ ही अजब-गजब शर्तें हैं तो साथ ही शिवसेना यूबीटी भी 2019 के चुनाव में जीती सीटों से कम पर तैयार होगी, ऐसा लगता नहीं है.

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र में अजित पवार को मिल सकती है 4 सीट, एकनाथ शिंदे गुट 12 सीटों पर लड़ सकती है चुनाव, बैठक के बाद हुआ फैसला

कांग्रेस 2019 की तर्ज पर सबसे अधिक सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है तो शरद पवार की पार्टी भी दर्जन भर सीटों पर दावेदारी कर रही है. विपक्षी गठबंधन में करीब दर्जनभर बैठकों के बाद भी आठ से नौ सीटों पर सहमति नहीं बन सकी है. मुंबई की दक्षिण मध्य और उत्तर पश्चिम जैसी कुछ सीटों पर कांग्रेस भी दावा कर रही है जहां 2019 में उद्धव की पार्टी के उम्मीदवार जीते थे. सीटों का पेच सुलझाने के लिए जारी बातचीत के बीच उद्धव ने उत्तर पश्चिम सीट से उम्मीदवार का ऐलान कर रेड लाइन खींच दी है.

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यह भी पढ़ें: NDA और INDIA गठबंधन की असली परेशानी, महाराष्ट्र से बिहार तक सीटों के मुद्दे पर उलझे सहयोगी

उद्धव ने उत्तर पश्चिम मुंबई सीट से अमोल कीर्तिकर को उम्मीदवार घोषित किया और इसके तुरंत बाद कांग्रेस के संजय निरूपम ने उद्धव पर हमला बोल दिया. संजय निरूपम हुए उद्धव को बची-खुची शिवसेना का प्रमुख बता दिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि दर्जनभर बैठकों के बाद भी जिन 8-9 सीटों पर पेच फंसा है, उनमें यह सीट भी है. फिर यह गठबंधन धर्म का उल्लंघन नहीं है? या फिर कांग्रेस को नीचा दिखाने के लिए जानबूझकर ऐसी हरकत की जा रही है?

क्या उद्धव ने चल दी है रणनीतिक चाल?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहले ही यह ऐलान कर दिया था कि उनकी पार्टी सूबे की सभी 42 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी. ममता को छोड़ दें तो बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) ने सीट शेयरिंग को लेकर जारी बातचीत के बीच ही उम्मीदवारों का ऐलान शुरू कर दिया था. नीतीश कुमार विपक्षी गठबंधन को झटका देकर सत्ताधारी खेमे में जा चुके हैं. वहीं, यूपी में कांग्रेस को सपा की 17 सीटों वाली लाइन पर सहमति देनी पड़ी थी. ऐसे में अब उद्धव के कदम को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि एक सीट पर उम्मीदवार का ऐलान रणनीतिक चाल तो नहीं?

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