मेनका गांधी या वरुण, किसे मिलेगा मोदी मंत्रिमंडल में मौका?

मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मेनका गांधी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय मिला. इस बार सुल्तानपुर के सांसद रहे वरुण गांधी अपनी पुरानी सीट पीलीभीत से चुनाव लड़े तो मेनका गांधी सुल्तानपुर से लड़ीं.  दोनोें ही नेता इस बार भी चुनाव जीत गए हैं.

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मेनका गांधी और वरुण गांधी मेनका गांधी और वरुण गांधी

नवनीत मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 28 मई 2019,
  • अपडेटेड 9:16 AM IST

2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद मोदी मंत्रिमंडल कैसा होगा इसको लेकर सियासी बाजार गर्म है. मोदी मंत्रिमंडल में इस बार कौन चेहरे दिखेंगे इसको लेकर अटकले लगाई जा रही हैं?  नतीजों के बाद से ही अटकलों का दौर शुरू हो गया है. सुल्तानपुर से चुनाव जीतने वालीं मेनका गांधी क्या फिर से मंत्री बनेंगी या फिर वह पीछे हटकर बेटे वरुण गांधी के लिए जोर लगाएंगी, इसको लेकर सियासी गलियारे में खासा चर्चा है.

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मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मेनका गांधी को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय मिला. इस बार सुल्तानपुर के सांसद रहे वरुण गांधी अपनी पुरानी सीट पीलीभीत से चुनाव लड़े तो मेनका गांधी सुल्तानपुर से लड़ीं.  इस बार मेनका गांधी कम अंतर से चुनाव जीतीं. चूंकि मां और बेटे में से किसी एक को ही मंत्री बनने का मौका मिल सकता है, ऐसे में अटकलें लग रहीं हैं मेनका गांधी बेटे वरुण के लिए अपनी दावेदारी छोड़ सकती हैं. मेनका गांधी 62 साल की हैं, वहीं वरुण की उम्र अभी 39 साल है.

वरुण के नाम ये है रिकॉर्ड

वरुण गांधी 2009 से लगातार सांसद हैं. मां मेनका गांधी की सीट से 2009 में पहली बार वह सांसद बने. इसके बाद 2014 में सुल्तानपुर से जीते और अब फिर पीलीभीत से सांसद बने हैं. बीजेपी में सबसे कम उम्र का राष्ट्रीय महासचिव बनने का रिकॉर्ड वरुण गांधी के नाम है. राजनाथ सिंह के अध्यक्ष रहने के दौरान भी वरुण महासचिव रहे. वरुण गांधी में तेवर भी है. किताब भी लिख चुके हैं. बुद्धिजीवी के तौर पर भी पहचान बनाने में वरुण सफल रहे हैं. माना जा रहा है कि बीजेपी इन खूबियों के चलते उन्हें मोदी मंत्रिमंडल में मौका दे सकती है.

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मेनका गांधी का सफर

पति संजय गांधी की हवाई हादसे में मौत के बाद सियासत में उतरी मेनका गांधी का लंबा सफर रहा है.  उन्हें 1989-91 के दौर से ही मंत्री बनने का मौका मिल गया था. 1989 से 2008 तक लगातार वह पीलीभीत से सांसद रहीं. 2009 में बेटे के लिए सीट छोड़ दी. 2014 में मेनका सुल्तानपुर से सांसद रहीं. 2019 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी बीएसपी उम्मीदवार से 14,526 वोटों के अंतर से ही मुकाबला जीतने में सफल रहीं.

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