BJP में कांग्रेस नेताओं की एंट्री पर शिवसेना का तंज, किसी के लिए पालनाघर ना बनें

शिवसेना ने सामना में लिखा है कि छोटे पाटिल किसी भी तरह सांसद बनना चाहता हैं, बीजेपी में वह इसलिए आए हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिल जाएगा.

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उद्धव ठाकरे उद्धव ठाकरे

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 14 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 9:11 AM IST

लोकसभा चुनाव से पहले राजनेताओं को दल बदलने का सिलसिला शुरू हो गया है. बीते दिनों महाराष्ट्र में कांग्रेस के कई नेता सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए हैं. अब इस मुद्दे पर भाजपा की ही साथी शिवसेना ने तंज कसा है. शिवसेना के अखबार सामना में गुरुवार को लेख लिखा गया है कि भारतीय जनता पार्टी या फिर शिवसेना को कांग्रेस वालों के लिए पालनाघर नहीं बनना चाहिए, हम ऐसा सोचते हैं.

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सामना में लिखा गया है कि अगर कांग्रेस-राष्ट्रवादी के नाराज लोगों को साथ में लेकर हिंदुत्ववादी दलों को आगे जाना होगा तो जिन्होंने कई वर्षों तक विचारों का भगवा झंडा हाथ में लिया है, वे क्या करें?

लेख में लिखा गया है कि कांग्रेस और भ्रष्टाचार ये दोनों एक-दूसरे के वैकल्पिक शब्द हैं, ऐसा मोदी का कहना है. दूसरी बात ऐसी है कि कांग्रेस-राष्ट्रवादी का ‘इनकमिंग’ आज अपने घर में लाभदायक लग रहा होगा मगर बाद में वो तकलीफदेह साबित हो सकता है.

बता दें कि शिवसेना का ये लेख तब आया है जब विरोधी दल के नेता राधाकृष्ण विखे-पाटिल के सुपुत्र सुजय ने भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश किया है. बीजेपी ज्वाइन करते वक्त सुजय पाटिल ने कहा था कि पिता और परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर मैंने यह निर्णय लिया है.

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शिवसेना ने लिखा है कि छोटे पाटिल किसी भी तरह सांसद बनना चाहता हैं, बीजेपी में वह इसलिए आए हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट मिल जाएगा. शिवसेना ने कहा कि अभी कई ऐसे और भी नेता हैं जो भाजपा में आने की कतार में खड़े हैं और बीजेपी वाले ऐसा होता देख काफी खुश दिख रहे हैं.

लेख में कहा गया है कि कल को शिवसेना का मुख्यमंत्री होगा तो उस समय भूकंप का रिमोट शिवसेना के पास होगा और ये घराने शिवसेना भवन की कतार में खड़े होंगे. इसलिए अपने लोग और मूल विचार ही सच हैं. हालांकि, अंत में तंज कसते हुए शिवसेना ने बीजेपी में शामिल हुए लोगों का स्वागत भी किया.

गौरतलब है कि बीते चार साल में शिवसेना लगातार मोदी सरकार के खिलाफ बयानबाजी करती रही है. इसके बावजूद भी अब लोकसभा चुनावों के लिए दोनों पार्टियां साथ आई हैं. महाराष्ट्र में भाजपा 25 और शिवसेना 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

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