बढ़ापुर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का एक कस्बा है जहां अपनी नगर पंचायत है. यह इलाका खेती और छोटे उद्योगों के लिए जाना जाता है और पिछली बार हुई सीटों की नई सीमाबंदी (डिलिमिटेशन) के बाद बनी नई सीटों में से एक है.
बढ़ापुर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा सीट है और मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. यह सीट 2008
में सीमाबंदी की प्रक्रिया के बाद बनाई गई थी और यहां पहली बार 2012 में चुनाव हुए थे. इसमें बढ़ापुर नगर पंचायत का इलाका, साथ ही बढ़ापुर, पुरेनी, कद्रबाद, अफजलगढ़ के कानूनगो सर्कल और अफजलगढ़ म्युनिसिपल बोर्ड का इलाका शामिल है.
बढ़ापुर में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 2012 में पहला चुनाव जीता था, जबकि BJP ने अगले दो चुनाव जीते.
2012 में, BSP उम्मीदवार मोहम्मद गाजी ने BJP के इंद्र देव सिंह को 27,375 वोटों से हराया था. 2017 में, BJP के कुंवर सुशांत सिंह ने कांग्रेस पार्टी के हुसैन अहमद को 9,824 वोटों से हराकर यह सीट जीती. कुंवर सुशांत सिंह ने 2022 में भी यह सीट अपने नाम की और समाजवादी पार्टी के कपिल कुमार को 14,345 वोटों से हराया. सिंह को 100,100 (41.58 प्रतिशत) वोट मिले, जबकि कुमार को 85,755 (35.62 प्रतिशत) वोट मिले.
लोकसभा चुनावों के दौरान बढ़ापुर विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग के रुझानों में समय-समय पर बदलाव देखा गया है. 2009 में BJP, BSP से 11,417 वोटों से आगे थी और 2014 में 38,602 वोटों से आगे रही. 2019 में समाजवादी पार्टी ने BJP को पीछे छोड़ते हुए 10,692 वोटों की बढ़त बनाई, जो 2024 में घटकर 3,978 वोटों की मामूली बढ़त रह गई. इस चुनाव में समाजवादी पार्टी की रुचि वीरा को 103,426 वोट मिले, जबकि BJP के कुंवर सर्वेश कुमार सिंह को 99,450 वोट मिले.
बढ़ापुर में वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 304,956 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग 66.35 प्रतिशत हुई थी. यह संख्या 2017 में बढ़कर 338,100 वोटर (वोटिंग 65.71 प्रतिशत), 2019 में 350,704 (वोटिंग 67.11 प्रतिशत), 2022 में 359,056 (वोटिंग 67.05 प्रतिशत) और 2024 में 360,352 वोटर (वोटिंग 62.91 प्रतिशत) हो गई.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, बढ़ापुर विधानसभा सीट पर कुल वोटरों में से 22.26 प्रतिशत वोटर अनुसूचित जाति (SC) के हैं. यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण सीट है, जहां 89.59 प्रतिशत वोटर गांवों में रहते हैं, जबकि 10.41 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं. इस सीट पर हिंदू आबादी ज्यादा है और मुस्लिम आबादी भी अच्छी-खासी संख्या में है.
बढ़ापुर एक कृषि प्रधान क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ है, जहां गन्ना मुख्य फसल है. यहां की अर्थव्यवस्था खेती, खेती से जुड़ी गतिविधियों और छोटे-मोटे व्यापार पर निर्भर है. चुनावों के दौरान सिंचाई, बिजली सप्लाई, गन्ने की कीमतें और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दे अक्सर उठते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से, बढ़ापुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में स्थित है. पूरे क्षेत्र में खेती के लिए नहरों का नेटवर्क मौजूद है, जबकि सड़कों के जरिए गांवों को पास के बाजार वाले कस्बों से जोड़ा गया है. इस निर्वाचन क्षेत्र में जिला सड़कें और बड़े हाईवे नेटवर्क तक पहुंचने की सुविधाएं शामिल हैं. यहां शिक्षा और स्वास्थ्य की बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं, और पास के जिला केंद्रों में बेहतर सेवाएं उपलब्ध हैं.
आस-पास के शहरों में जिला मुख्यालय बिजनौर (लगभग 40-45 किमी दूर), मुरादाबाद (लगभग 50-60 किमी दूर), उत्तराखंड में हरिद्वार (लगभग 80-90 किमी दूर), मेरठ (लगभग 110-120 किमी दूर) और दिल्ली (लगभग 180-200 किमी दूर) शामिल हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 420 किमी दूर है.
राजनीतिक रूप से, बढ़ापुर में मुकाबला कड़ा रहता है और 2027 के विधानसभा चुनावों में भी यहां कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. अभी यह सीट बीजेपी के पास है और कुंवर सुशांत सिंह यहां से विधायक हैं, लेकिन समाजवादी पार्टी और बीएसपी भी उन्हें कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेंगी. अंतिम नतीजा गठबंधन की मजबूती, उम्मीदवार के चयन और इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टियां किसानों की चिंताओं और स्थानीय मुद्दों को कैसे संभालती हैं.
(अजय झा)