अखिलेश के नए 'ब्राह्मण चेहरे' बने पवन-सनातन पांडेय, UP में सपा की नैया पार लगा पाएंगे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सियासी तानाबाना बुना जाने लगा है. सपा ने अपने पीडीए सियासी समीकरण में ब्राह्मणों को जोड़ने की कवायद शुरू की है, जिसके लिए अखिलेश यादव ने अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय और बलिया के सांसद सनातन पांडेय को फ्रंटफुट पर उतार रखा है.

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अखिलेश यादव के ब्राह्मण चेहरा बने सनातन और पवन पांडेय (Photo-ITG) अखिलेश यादव के ब्राह्मण चेहरा बने सनातन और पवन पांडेय (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:10 PM IST

उत्तर प्रदेश की सियासत में सपा मुस्लिम और पिछड़ों की पार्टी माना जाती रही है. 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा अखिलेश यादव ने अपने सियासी आधार में 'दलित' समुदाय को जोड़कर 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का एक सफल फॉर्मूला तैयार किया. सपा का यह फार्मूला हिट रहा है,  अब लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए अखिलेश जानते हैं कि केवल पीडीए के त्रिकोण से काम नहीं चलेगा. इसीलिए बीजेपी के परंपरागत वोटर ब्राह्मण समाज को साधने की कवायद शुरू की है. 

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यूपी में ब्राह्मण वोटों को जोड़ने के मिशन पर सपा के पूर्व विधायक पवन पांडेय और सांसद सनातन पांडेय को लगा रखा है. सपा के ये दोनों ही नेता फ्रंटफुट पर उतरकर ब्राह्मण समाज को साधने में जुटे हैं. सनातन पांडेय यूपी के अलग-अलग शहरों और इलाकों में इन दिनों ब्राह्मण सम्मेलन कर रहे हैं तो पवन पांडेय ने राम मंदिर के चंदा चोरी पर आक्रामक तेवर अपना रखा है. 

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी के विवाद को जिस आक्रामक तरीके से उठाया गया, उसने लखनऊ से दिल्ली तक की सियासत गर्मा दिया है. इस पूरे अभियान की कमान सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने अपने सबसे भरोसेमंद और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय को सौंपी है. पवन पांडेय और सनातन पांडेय सपा के सबसे प्रखर 'ब्राह्मण चेहरे'के रूप में उभरकर सामने आए हैं.

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अयोध्या से बलिया तक की घेराबंदी का प्लान
अखिलेश यादव ने बड़ी चतुराई से उत्तर प्रदेश के दो अलग-अलग इलाके और अलग-अलग मिजाज के ब्राह्मण नेताओं को आगे बढ़ाया है. अयोध्या के पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री तेज नारायण उर्फ पवन पांडेय को अखिलेश यादव ने अयोध्या में बीजेपी को घेरने की जिम्मेदारी दी है. राम मंदिर में कथित चंदा और चढ़ावा चोरी के मुद्दे को उठाकर पवन पांडेय ने सीधे तौर पर बीजेपी को सियासी कठघरे में खड़े करने की कवायद की है.

पवन पांडेय ने राजनीतिक सफर की शुरुआत लखनऊ विश्वविद्यालय से किया था और साल 2012 अयोध्या जैसी प्रतिष्ठित सीट पर भाजपा को हराकर सनसनी फैला दी थी, जिसके बाद अखिलेश यादव ने उन्हें अपनी कैबिनेट में मंत्री भी बनाया. राम मंदिर में चंदा चोरी के मुद्दे पर पवन पांडेय ने सीधे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया, उसने उन्हें अचानक यूपी की राजनीति के केंद्र में ला दिया है.

बलिया से समाजवादी पार्टी के सांसद सनातन पांडेय अपने कड़क, बेबाक और ठेठ पूर्वांचली अंदाज के लिए जाने जाते हैं. बलिया और आस-पास के जिलों में सनातन पांडेय की छवि एक ऐसे नेता की है जो प्रशासन के सामने झुकता नहीं है. बलिया सीट के ब्राह्मण चेहरे के पर पर पहली बार सनातन पांडेय सांसद बने है, जिससे पूर्वी यूपी में उनके सियासी कद में बुलंदी मिली.

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पूर्वांचल की राजनीति में ब्राह्मण बनाम ठाकुर का एक पुराना नैरेटिव रहा है और सनातन पांडेय के जरिए सपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह क्षेत्र के इर्द-गिर्द ब्राह्मणों की नाराजगी को भुनाने की ताक में है. इसीलिए वाराणसी से लेकर कानपुर तक लगातार ब्राह्मण सम्मेलन कर सनातन पांडेय सपा के साथ जोड़ने में लगे हैं. ब्राह्मण सम्मेलन के जरिए सीधे बीजेपी को चोट देने का प्लान है. 

'सॉफ्ट हिंदुत्व' से छवि बदलने का प्लान
बीजेपी अक्सर समाजवादी पार्टी पर 'हिंदू विरोधी' होने का टैग लगाने की कोशिश करती है, लेकिन जब पवन पांडेय और सनातन पांडेय जैसा एक जनेऊधारी ब्राह्मण चेहरा फ्रंटफुट पर उतरकर सियासी ढाल बन रहे हैं. अयोध्या की जमीन पर खड़े होकर पवन पांडेय बीजेपी पर वार करते हैं और श्रद्धालुओं के 'चढ़ावे और आस्था' की रक्षा की बात करता है.

इस तरह बीजेपी के सपा को हिंदू विरोधी वाले नैरेटिव को तोड़ने की है पवन पांडेय इस पूरे मुद्दे को धार्मिक राजनीति से अलग 'भ्रष्टाचार और जनभावना' की लड़ाई के रूप में पेश कर रहे हैं, जो सनातनी और ब्राह्मण वोटों को जोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति है.


उत्तर प्रदेश का ब्राह्मण समाज राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक और निर्णायक माना जाता है. पवन पांडेय और सनातन पांडेय ने अब योगी सरकार पर 'ब्राह्मणों की उपेक्षा' का आरोप लगाकर बीजेपी से दूर करने और सपा के साथ लाने की कवायद है. यूपी का ब्राह्मण समाज वैचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भाजपा के राष्ट्रवाद हिंदुत्व से जुड़ा हुआ है. बीजेपी के साथ ब्राह्मणों की केमिस्ट्री को तोड़ने के लिए ही सपा ने पवन पांडेय और सनातन पांडेय को उतार रखा है. 

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'PDA' के साथ 'A' (अगड़ा) का संतुलन
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा ने गैर-यादव ओबीसी और दलितों को जोड़कर बड़ी सफलता पाई थी. अब 2027 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के लिए अखिलेश जानते हैं कि उन्हें सवर्णों के एक हिस्से का साथ चाहिए, पवन पांडेय और सनातन पांडेय के जरिए अखिलेश यादव अपने 'पीडीए' फॉर्मूले को और अधिक समावेशी बनाने की कवायद है. 

सपा केवल जातियों के नैरेटिव में नहीं उलझना चाहती. राम मंदिर के चंदा चोरी से लेकर युवाओं के बीच पेपर लीक, बेरोजगारी और संविदा भर्तियों का मुद्दा उठाकर दोनों नेता सवर्ण युवाओं को भी पार्टी से जोड़ रहे हैं. यह रणनीति सपा के मूल कैडर के बाहर एक 'सर्वसमाज' की छवि बनाने में मदद कर रही है.

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