उत्तर प्रदेश में बीजेपी सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए पूरी तरह से चुनावी मोड में उतर गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ सियासी माहौल बनाने में जुट गए हैं तो बीजेपी के लिए बंजर पड़ी जमीन को सियासी तौर पर उपजाऊ बनाने के मिशन पर आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी लग गए हैं. सपा के मजबूत दुर्ग माने जाने वाले मुरादाबाद से जयंत चौधरी आरएलडी के चुनावी अभियान का आगाज करेंगे.
केंद्रीय मंत्री और आरएलडी के मुखिया जयंत चौधरी गुरुवार को मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में रैली कर 2027 के लिए सियासी हुंकार भरेंगे. मुरादाबाद को सपा का गढ़ माना जाता है, जहां बीजेपी के सहयोगी आरएलडी की नजर है. जयंत चौधरी अब सपा के मजबूत इलाके में आरएलडी के लिए सियासी जमीन तैयार करने उतरे रहे हैं.
यूपी की सियासत में जयंत चौधरी भले ही छोटे चौधरी हों, लेकिन पश्चिमी यूपी की राजनीति के बड़े चौधरी माने जाते हैं. बागवत, बिजनौर और मुजफ्फरनगर ही नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट राजनीति के सबसे बड़े चेहरे हैं. जयंत अपने सियासी आधार के दम पर बीजेपी के लिए कमजोर माने जाने वाली विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करने का प्लान बनाया है.
मुरादाबाद से जयंत भरेंगे चुनावी हुंकार
आरएलडी के प्रमुख जयंत चौधरी गुरुवार को मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा में एक बड़ी जनसभा को संबोधित करेंगे, जिसे सफल बनाने के लिए आरएलडी नेताओं ने पूरी ताकत झोंक रखी है. गांव-गांव संपर्क करके बड़ी संख्या में भीड जुटाने का टारगेट रखा है. योगी कैबिनेट में आरएलडी कोटे से मंत्री मंत्री अनिल कुमार के कंधों पर रैली को सफल बनाने का जिम्मा है. उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों और युवाओं की आवाज को नई ताकत देने के लिए जयंत चौधरी मुरादाबाद आ रहे हैं.
आरएलडी के राष्ट्रीय सचिव कुलदीप उज्जवल ने कहते हैं कि मुरादाबाद की रैली से मिशन-2027 का आगाज जयंत चौधरी करेंगे. मुरादाबाद से किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह के साथ गहरा नाता रहा है. इसीलिए जयंत चौधरी मुरादाबाद की रैली में किसान, मजदूर, युवा, व्यापारी एवं समाज के हर वर्ग की आकांक्षाओं की आवाज को बुलंद करेंगे. इसके अलावा सूबे में विकास, सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और समृद्धि के संकल्प को लेकर आरएलडी चल रही है.
सपा के गढ़ पर जयंत चौधरी की नजर
उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद जिला समाजवादी पार्टी का एक बेहद मजबूत और पारंपरिक गढ़ माना जाता है. मुस्लिम वोटों का समीकरण यहां पर सपा के पक्ष में बहुत मजबूती से काम करता रही है. मुरादाबाद जिले में कुल 6 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से 2022 में पांच सीटों पर सपा हैं तो एक सीट पर बीजेपी जीती थी. यही नहीं मुरादाबाद लोकसभा सीट पर भी सपा का कब्जा है. हालांकि, बाद में मुरादाबाद की कुंदरकी सीट बीजेपी उपचुनाव में जरूर जीतने में सफल हो गई थी.
पश्चिमी यूपी की राजनीति में आरएलडी के मुखिया जयंत चौधरी द्वारा सपा के सबसे मजबूत गढ़ मुरादाबाद इलाके में राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिशें सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. जाट और किसान राजनीति के केंद्र बिंदु माने जाने वाले जयंत चौधरी अमूमन बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ और बिजनौर जैसे 'जाटलैंड'वाले इलाकों तक ही सीमित माने जाते थे. लेकिन अब वे अपनी पार्टी का दायरा बढ़ाकर मुरादाबाद क्षेत्र में पैठ जमाने की है, जिसके लिए ही केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी रैली करने उतर रहे हैं.
बीजेपी की बंजर जमीन 'सींचने' का प्लान
मुरादाबाद का इलाका मुस्लिम बहुल होने के चलते बीजेपी के लिए सियासी तौर पर बंजर बनी हुई है, जिसके चलते ही 2022 में कमल नहीं खिल सका. जयंत चौधरी ने अपनी सियासी गुंजाइश उस क्षेत्र में तलाश रहे हैं, जहां बीजेपी को किसी तरह का ऐतराज न हो. इसीलिए जयंत चौधरी ने मुरादाबाद को चुना है, जहां पर सपा का पूरी तरह के कब्जा है. इतना ही नहीं आरएलडी की उन सीटों पर निगाहें हैं जहां पर बीजेपी अर्से से जीत के लिए तरस रही है.
जयंत चौधरी की मुरादाबाद रैली के सियासी मायने साफ हैं. सपा के गढ़ में उतरकर जयंत चौधरी आरएलडी के मूल मतदाताओं को बताना चाहते हैं कि बागवत और मुजफ्फरनगर ही नहीं बल्कि उनके एजेंडे में मुरादाबाद भी है. जयंत चौधरी की जनसभा को सफल बनाने के लिए योगी सरकार में रालोद कोटे से मंत्री अनिल कुमार के साथ-साथ बल्कि बसपा से आरएलडी में आए पूर्व विधायक विजय यादव ने पूरी ताकत झोंक रखी है.
मुरादाबाद फतह करने का आरएलडी दांव
जयंत चौधरी की नजर मुरादाबाद जिले की छह में से तीन सीटों पर है, जहां फिलहाल सपा के विधायक हैं. इसी मद्देजर 2007 में बसपा के टिकट पर ठाकुरद्वारा से विधायक बनने वाले विजय यादव को अपने साथ मिला रखा है इसे दूरगामी सियासत से जोड़ कर देखा जा रहा है और भाजपा की जीत में कठिन मानी जाने वाली एक सीट पर गठबंधन के समीकरण बिठाने की कोशिश है.
आरएलडी की नजर मुरादाबाद जिले क ठाकुरद्वारा के अलावा कांठ और मुरादाबाद ग्रामीण सीट पर भी है. इन तीनों सीटों को आरएलडी अपना परंपरागत सियासी आधार वाली मानती है. भले ही आरएलडी यहां जीत न सकी हो, लेकिन उन्हें लगता है कि बीजेपी के पथरीली बनी सीट पर दांव सफल हो सकता है.
सपा के गढ़ में बीजेपी के लिए बने बंजर भूमि पर आरएलडी अपने हैंडपैंप के जरिए सियासी उपजाऊ बना सकती है. इस तरह से बीजेपी के साथ आरएलडी मिलकर मुरादाबाद को फतह करने का प्लान.
कुबूल अहमद