'जिताऊ और टिकाऊ' पर ही अब अखिलेश खेलेंगे दांव! सपा में टिकट का नया फॉर्मूला

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाला विधानसभा चुनाव सपा के लिए काफी अहम माना जा रहा है. दस साल से सत्ता का वनवास झेल रहे सपा प्रमुख अखिलेश यादव 2027 में किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाह रहे हैं. इसीलिए टिकट वितरण के लिए नया फॉर्मूला तैयार किया है.

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कसौटी पर कितने खरे उतरेंगे (Photo-SP) सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कसौटी पर कितने खरे उतरेंगे (Photo-SP)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ,
  • 01 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:55 PM IST

उत्तर प्रदेश में अगले साले होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी ने अभी से अपनी जमीनी तैयारियां तेज कर दी हैं. लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से उत्साहित सपा अब फूंक-फूंककर कदम रख रही है और किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाही है. ऐसे में कैंडिडेट सेलेक्शन के लिए सपा पूरी तरह सतर्क है और अलग फॉर्मूला बनाया है. अखिलेश यादव का फोकस 'जिताऊ और टिकाऊ' उम्मीदवार के चयन करने का है. 

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2027 चुनाव के टिकट बंटवारे में अखिलेश यादव  किसी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहते हैं. इसके लिए सपा ने निजी एजेंसी से प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करा रही है.

अखिलेश यादव सर्वे की रिपोर्ट  कार्ड के साथ ही जिला स्तरीय नेताओं के फीडबैक के आधार पर टिकट फाइनल करेगा. टिकट के लिए नेता के जनाधार और क्षेत्र में अच्छी छवि को ही प्राथमिकता दी जाएगी. देखा जाना है कि अखिलेश यादव की सियासी कसौटी पर कितने नेता खरे उतरते हैं? 

सर्वे रिपोर्ट और फीडबैक पर सपा का टिकट
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों का जो रिपोर्ट कार्ड तैयार करा रहा है, उसके आधार पर फीडबैक लेने का काम शुरू कर दिया गया है. इसके लिए नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है.अखिलेश यादव इन दिनों जिले स्तर के नेताओं के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं. रिपोर्ट कार्ड के आधार पर स्थानीय नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है. 

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जिला अध्यक्ष से लेकर विधानसभा अध्यक्ष सहित तमाम नेताओं से विधानसभा सीट पर पार्टी की स्थिति, टिकट दिए जाने वाले उम्मीदवारों के बारे में जानकारी और पार्टी की कमजोरी और मजबूती के कारणों को पूछा जा रहा है. सर्वे रिपोर्ट और स्थानीय नेताओं के फीडबैक के आधार पर टिकट को अंतिम रूप दिया जाएगा. भले ही मजबूत दावेदारी हो, पर फीडबैक खराब हुआ तो टिकट नहीं मिलेगा.

अखिलेश का कोई गलती नहीं करना चाहते

2027 का विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव के लिए सियासी तौर पर काफी अहम है, इसीलिए वो गलती नहीं करना चाह रहे हैं. लोकसभा चुनाव में शानदार सफलता हासिल करने वाली सपा पिछले विधानसभा चुनाव में गलत टिकट वितरण के चलते सत्ता से दूर रह गई थी. इसीलिए  2027चुनाव के लिए फीडबैक और एजेंसी के सर्वे रिपोर्ट का आपस में मिलान कराया जा रहा है.
 
बताया जा रहा है कि इन दोनों के मिलान में जिसकी दावेदारी मतदाताओं की नजर में मजबूत मिलेगी, उसे ही टिकट दिया जाएगा. जितनी सीटों पर इस तरह का काम पूरा हो चुका है, उन सीटों पर उम्मीदवारों को धीरे-धीरे क्षेत्र में तैयारी के लिए हरी झंडी दी जा रही है. सपा के सूत्रों का कहना है कि जिन नेताओं को हरी झंडी दी जा रही है, उनको सख्त हिदायत दी जा रही है कि कोई भी ऐसा काम न करें, जिससे उनकी और पार्टी की स्थिति खराब हो.

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सर्वे के आधार पर सपा का टिकट क्यों? 

सपा इस बार ऐसे उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करना चाहती है जिनकी स्थानीय स्तर पर छवि साफ हो और जिनके खिलाफ जनता में कोई बड़ा आक्रोश न हो.  पार्टी के भीतर कई सीटों पर कई मजबूत दावेदार हैं. ऐसे में सर्वे का हवाला देकर टिकट देने से आपसी कलह और बगावत की गुंजाइश काफी कम हो जाती है, क्योंकि फैसला 'डेटा और फीडबैक' के आधार पर होता है.

अखिलेश यादव का PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला पिछले चुनाव में काफी सफल रहा था. सर्वे के जरिए अखिलेश यादव जमीनी स्थिति को समझ रहे हैं है कि किस सीट पर किस जातिगत और सामाजिक समीकरण का उम्मीदवार सबसे फिट बैठेगा. इसका भी आकलन कर रहे हैं. 

सपा के वोट शेयर बढ़ाने का प्लान

सपा सिर्फ टिकट बांटना ही नहीं, बल्कि बूथ स्तर पर 'बूथ कमेटियों' को पुनर्गठित किया जा रहा है ताकि मतदान के दिन वोटिंग फीसदी को बढ़ाया जा सके. अखिलेश यादव का मानना है कि 2022 का विधानसभा चुनाव पार्टी अच्छा लड़ी थी, लेकिन जरा सी चूक से सत्ता बनाने से रह गई.  2024 के लोकसभा चुनाव नतीजे से सपा के नेता और कार्यकर्ता उत्साहित है. कार्यकर्ताओं को अंदरखाने में संदेश दिया जा रहा है कि वे बस मत प्रतिशत बढ़ाने में जुटें.

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सपा को 2022 के विधानसभा चुनाव में 111 सीटें और 32.06 फीसदी वोट मिले थे और लोकसभा चुनाव 2024 में सपा 37 सीटें जीती और 33.59 फीसदी मत मिले थे. भाजपा को वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में 41.29 फीसदी मत पाकर 255 सीटें जीती थी. ऐसे में कार्यकर्ताओं को सिर्फ और सिर्फ वोट बचाने और मत प्रतिशत बढ़ाने में जुटने का संदेश दिया जा रहा है. अखलेश यादव ने हर बूथ पर 5 वोट बढ़ाने का टारगेट रखा है. 

जिताऊ और टिकाऊ कैंडिडेट की तलाश

सूत्रों के मुताबिक, सर्वे में अगर किसी पुराने या कद्दावर नेता की रिपोर्ट कमजोर आती है, तो पार्टी उस सीट पर नए, ऊर्जावान और युवा चेहरों को दांव लगाने से नहीं हिचकिचाएगी. इसके अलावा चुनाव से ठीक पहले टिकट घोषित करने पर उम्मीदवारों को जनसंपर्क का पूरा समय नहीं मिल पाता. जल्दी उम्मीदवार तय होने से उन्हें अपने क्षेत्र में पकड़ मजबूत करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

सपा नेतृत्व इस बात को समझता है कि 2027 की लड़ाई बेहद कड़ी होने वाली है. बीजेपी की सांगठनिक ताकत का मुकाबला करने के लिए केवल सत्ता विरोधी लहर पर निर्भर नहीं रहा जा सकता, बल्कि जिताऊ उम्मीदवार ही सबसे बड़ा फैक्टर होगा. ऐसे में सपा की रणनीति जिताऊ के साथ टिकाऊ उम्मीदवार की तलाश है. ऐसे में सर्वे की यह प्रक्रिया टिकट के आकांक्षी नेताओं को भी क्षेत्र में एक्टिव रहने के लिए मजबूर करेगी.
 

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