वाइपिन विधानसभा सीट (Vypin) एर्नाकुलम जिले की सबसे अलग पहचान वाली सीटों में गिनी जाती है, क्योंकि यहां की राजनीति जमीन से ज्यादा पानी से तय होती है. यह क्षेत्र कोच्चि तट के साथ फैले द्वीपों की एक श्रृंखला में बसा है और एर्नाकुलम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. वाइपिन का चुनावी स्वभाव मछुआरा गांवों, ज्वार-भाटे वाली नहरों, पुलों, फेरी सेवाओं और
समुद्र के साथ रोज होने वाले संघर्ष से बनता है. यहां मतदाता बड़े भाषणों से ज्यादा इस बात को महत्व देते हैं कि नेता मुश्किल समय में मौजूद है या नहीं, और काम “कागज पर” नहीं बल्कि “जमीन पर” दिख रहा है या नहीं.
2008 के परिसीमन के बाद बनी यह सीट पुराने नजारक्कल (Njarackal) क्षेत्र की जगह अस्तित्व में आई. गठन के बाद से ही वाइपिन ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बना ली. पिछले एक दशक में यह सीट आमतौर पर वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के लिए भरोसेमंद रही है, लेकिन यहां मुकाबला कभी पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा. जीत का अंतर अक्सर सीमित रहा है और विपक्षी दल लगातार चुनौती देते रहे हैं. यही कारण है कि वाइपिन को “सेफ सीट” कहने से पहले राजनीतिक दल सावधानी बरतते हैं.
वाइपिन की भौगोलिक संरचना ही इसकी राजनीति की सबसे बड़ी कुंजी है. यह क्षेत्र कई द्वीपों में फैला हुआ है, जिन्हें पुल और फेरी जोड़ते हैं. इसलिए सड़क, पुलों की मरम्मत, फेरी सेवाओं की गुणवत्ता, जेट्टी, तटीय सड़कें और आपदा प्रबंधन यहां सामान्य विकास मुद्दे नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतें हैं. समुद्र यहां हजारों परिवारों के लिए रोजगार है, लेकिन वही समुद्र कटाव, तूफानी लहरें और मानसून के दौरान बाढ़ भी लाता है. पीने के पानी में खारेपन का घुसना, घरों को नुकसान और तटीय सुरक्षा की मांग वाइपिन में लगातार राजनीतिक मुद्दे बने रहते हैं. इन परिस्थितियों में प्रशासन की विफलता तुरंत महसूस होती है और लंबे समय तक मतदाताओं की स्मृति में बनी रहती है.
वाइपिन का सामाजिक ढांचा भी मिश्रित है. हिंदू, ईसाई और मुस्लिम समुदाय कई इलाकों में साथ रहते हैं. पारंपरिक जातीय ढांचे मौजूद हैं, लेकिन यहां पहचान की राजनीति अक्सर आजीविका और कल्याण योजनाओं की जरूरत के साथ मिलकर काम करती है. मछुआरा समुदाय इस सीट की राजनीतिक चेतना की रीढ़ है. इसके अलावा दैनिक मजदूर, छोटे व्यापारी, कोयर कामगार, निर्माण श्रमिक और कोच्चि से जुड़े सेवा क्षेत्र के कर्मचारी भी बड़ी संख्या में हैं. खाड़ी देशों में प्रवास ने भी इस क्षेत्र को प्रभावित किया है, जिससे रेमिटेंस पर आधारित परिवार बने हैं, जिनकी अपेक्षाएं इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर अधिक स्पष्ट हैं. वाइपिन का मतदान व्यवहार आमतौर पर व्यावहारिक माना जाता है, जहां नेता की उपलब्धता, राहत कार्यों की गति और सरकारी योजनाओं की पहुंच निर्णायक बनती है.
राजनीतिक रूप से वाइपिन पर लंबे समय से LDF का प्रभाव रहा है. CPI(M) ने पंचायत स्तर पर मजबूत संगठन, स्थानीय नेटवर्क और मछुआरा यूनियनों के साथ निरंतर संपर्क के जरिए अपनी पकड़ बनाई. वाइपिन में वामपंथ की ताकत विचारधारा के नारों से ज्यादा कल्याणकारी योजनाओं और संकट के समय सक्रियता से जुड़ी रही है. बाढ़ राहत, आवास सहायता, पेंशन, राशन वितरण और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच जैसे मुद्दों ने LDF को लगातार समर्थन दिलाया. हालांकि, विपक्ष भी कमजोर नहीं रहा. UDF यहां नियमित रूप से मजबूत वोट शेयर हासिल करता रहा है और कई बार मुकाबला करीबी रहा है. हाल के वर्षों में BJP और Twenty 20 पार्टी जैसे विकल्पों ने भी वोटिंग पैटर्न में एक नया कोण जोड़ा है.
2021 का विधानसभा चुनाव वाइपिन में नेतृत्व परिवर्तन का चुनाव था. लगातार दो कार्यकाल तक प्रतिनिधित्व करने वाले एस शर्मा के बाद CPI(M) ने केएन उन्नीकृष्णनन को मैदान में उतारा. वे स्थानीय स्तर पर सुलभ नेता माने जाते हैं और संगठन में उनकी पकड़ मजबूत है. UDF ने कांग्रेस के दीपक जॉय (Deepak Joy) को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने युवा नेतृत्व, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और तटीय मुद्दों पर तेज हस्तक्षेप की जरूरत को लेकर प्रचार किया. BJP और Twenty 20 पार्टी की मौजूदगी ने मुकाबले को बहुकोणीय बना दिया.
चुनाव के दौरान तटीय सुरक्षा, मछुआरों की आजीविका, फिशिंग बैन के दौरान मुआवजा, पीने के पानी की गुणवत्ता, सड़क और पुलों की स्थिति जैसे मुद्दे प्रमुख रहे. साथ ही, कोविड-19 और बाढ़ के बाद कल्याण योजनाओं की भूमिका भी बहस के केंद्र में रही. वाइपिन में एक और अहम पहलू नेतृत्व की उपलब्धता है. यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भूगोल ही राजनीति बन जाता है, इसलिए संकट के समय नेता का मौके पर पहुंचना और नियमित संवाद बनाए रखना मतदाताओं के लिए निर्णायक साबित होता है.
2021 के नतीजों में वाइपिन ने LDF को फिर समर्थन दिया, लेकिन साथ ही यह संकेत भी दिया कि मुकाबला बना रहेगा. CPI(M) के केएन उन्नीकृष्णनन ने 53,858 वोट हासिल कर लगभग 41.24% वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की. कांग्रेस के दीपक जॉय को 45,657 वोट मिले, यानी करीब 34.96% वोट शेयर. Twenty 20 पार्टी के उम्मीदवार को 16,707 वोट और BJP को 13,540 वोट मिले. केएन उन्नीकृष्णनन की जीत का अंतर 8,201 वोट रहा. यह नतीजा LDF की मजबूती दिखाता है, लेकिन साथ ही बताता है कि विपक्ष की चुनौती और मतदाताओं की अपेक्षाएं लगातार बनी हुई हैं.
वाइपिन के चुनावी हॉटस्पॉट मुख्य रूप से तटीय मछुआरा गांव हैं, जहां सामूहिक मुद्दे तेजी से वोटिंग निर्णय को प्रभावित करते हैं. वहीं कोच्चि से जुड़े अर्ध-शहरी इलाके स्विंग जोन माने जाते हैं, जहां सड़क, परिवहन, रोजगार और शहरी सुविधाएं चुनावी रुख बदल सकती हैं. बाजार क्षेत्रों और मिश्रित आवासीय इलाकों में नए राजनीतिक विकल्पों के लिए खुलापन भी बढ़ा है.
वाइपिन एक ऐसी सीट है जहां मतदाता कल्याण सुरक्षा, संकट में त्वरित राहत और लगातार मौजूद रहने वाले नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं. यह क्षेत्र वामपंथी राजनीति की सामाजिक लोकतांत्रिक जड़ों का उदाहरण है, लेकिन साथ ही यह भी दिखाता है कि केरल में मतदाता अब “परफॉर्मेंस” के आधार पर समर्थन देते हैं. वाइपिन में चुनावी समर्थन स्थायी नहीं है. यह हर बार फिर से कमाना पड़ता है, ठीक वैसे ही जैसे समुद्र की लहरें बार-बार लौटती हैं.
(ए के शाजी)