मनालूर विधानसभा क्षेत्र केरल के त्रिशूर जिले में स्थित है. यह केरल विधानसभा की 140 सीटों में 64वीं सीट है और यह एक सामान्य (अनारक्षित) निर्वाचन क्षेत्र है. राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा चुनावों के लिए यह त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बनता है.
प्रशासनिक और भौगोलिक प्रोफाइल की बात करें तो मनालूर त्रिशूर जिले के मध्य भाग में आता है और यहां
ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ कुछ अर्ध-शहरी (सेमी-अर्बन) क्षेत्र भी शामिल हैं. यह क्षेत्र खेती-किसानी वाले प्राकृतिक परिदृश्य और धीरे-धीरे विकसित हो रहे बाजार कस्बों का मिश्रण है. इस विधानसभा क्षेत्र में अलग-अलग तालुकों की कई पंचायतें शामिल हैं, त्रिशूर तालुक की अरिम्पुर और मनालूर पंचायतें; थालप्पिल्ली तालुक की चूंडल और कंदनास्सेरी पंचायतें और चावक्काड तालुक की एलावली, मुल्लास्सेरी, वडनप्पल्ली, पावारट्टी, थैक्काड और वेंकिटंगु पंचायतें हैं.
मतदाता भागीदारी और वोटर प्रोफाइल के अनुसार, 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में यहां ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के मतदाताओं ने सक्रिय रूप से मतदान किया. इस चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 75-76% के बीच रहा, जो काफी अच्छा माना जाता है. चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2021 विधानसभा चुनाव में यहां कुल 2,22,706 पंजीकृत मतदाता थे.
राजनीतिक प्रतिनिधित्व और चुनावी इतिहास में मनालूर का सफर काफी प्रतिस्पर्धी रहा है. यहां लंबे समय से एलडीएफ (LDF), यूडीएफ (UDF) और कभी-कभी एनडीए (NDA) के बीच मुकाबला होता रहा है. 20वीं सदी के आखिरी वर्षों और 2000 के शुरुआती दौर में यह क्षेत्र अक्सर कांग्रेस के प्रभाव में रहा और उस समय पी. ए. माधवन और वी. एम. सुधीरन जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेताओं ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया, जो उस समय त्रिशूर जिले में यूडीएफ की मजबूत पकड़ को दिखाता है. लेकिन बाद के वर्षों में मुरली पेरुनेल्ली के नेतृत्व में, जो लगातार चुनाव जीतकर उभरे, सीपीआई(एम) [CPI(M)] ने इस क्षेत्र में अपनी स्थिति को मजबूत किया और हाल के दशकों में वह यहां और ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन गई.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों में मुरली पेरुनेल्ली (CPI(M), LDF) ने जीत दर्ज की. उन्हें 78,337 वोट मिले, जो वैध मतों का लगभग 46.77% था. दूसरे स्थान पर विजय हरि (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, UDF) रहे, जिन्हें 48,461 वोट मिले और उनका वोट शेयर लगभग 28.93% रहा. वहीं ए. एन. राधाकृष्णन (BJP, NDA) को 36,566 वोट मिले, जो लगभग 21.83% वोट शेयर था. यह मुकाबला तीन-तरफा था, लेकिन मुरली पेरुनेल्ली ने 29,876 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की. यह परिणाम एलडीएफ के लिए स्पष्ट जनादेश माना गया और यह भी दिखाता है कि जिस सीट पर पहले कांग्रेस और वामपंथ के बीच मुकाबला अधिक रहता था, वहां सीपीआई(एम) ने 2021 में मजबूत वापसी की.
सामाजिक-आर्थिक विशेषताओं की बात करें तो मनालूर में आज भी कृषि सबसे प्रमुख आजीविका है. यहां कई परिवार धान की खेती, नारियल की खेती, सब्जी उत्पादन और अन्य कृषि आधारित कामों पर निर्भर हैं. इस क्षेत्र की तटीय बाजारों के नजदीक होने के कारण कृषि उत्पादों की आवाजाही और बिक्री आसान होती है. इसके अलावा आसपास के कस्बों और शहरों में छोटे व्यापार, सेवाक्षेत्र और अन्य व्यवसाय भी रोजगार के अवसर देते हैं. यहां की अर्थव्यवस्था में खाड़ी देशों से आने वाला रेमिटेंस (विदेश से भेजा गया पैसा) भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
मतदाता व्यवहार और चुनावी समीकरण के अनुसार, मनालूर के मतदाता काफी गतिशील हैं और उनका फैसला स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ बड़े राजनीतिक विचारों से भी प्रभावित होता है. हाल के चुनावों में एलडीएफ को ग्रामीण और कामकाजी वर्ग के लोगों का समर्थन बढ़ता हुआ मिला है. वहीं यूडीएफ, खासकर कांग्रेस के जरिए, अब भी मुकाबले में बना रहता है और उसे शहरीकरण से जुड़े वर्ग तथा पुराने कांग्रेस समर्थकों का समर्थन मिलता है. भाजपा (एनडीए) ने भले ही इस सीट पर जीत नहीं पाई, लेकिन 2021 में उसने अच्छा वोट शेयर हासिल किया, जिससे यह साफ होता है कि क्षेत्र में उसकी मौजूदगी बढ़ रही है और भविष्य में वह और मजबूत हो सकती है.
मुख्य स्थानीय मुद्दों और चिंताओं में सबसे बड़ा मुद्दा कृषि को टिकाऊ बनाना (Agricultural Sustainability) है, यानी खेती को लंबे समय तक लाभदायक और सुरक्षित बनाए रखना. इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास (सड़कें, परिवहन, बुनियादी सुविधाएं) और युवाओं के लिए बेहतर नौकरी के अवसर भी यहां की प्रमुख मांगों में शामिल हैं.
पर्यटन स्थलों की बात करें तो मनालूर और इसके आसपास कई सुंदर प्राकृतिक जगहें हैं. यहां वडनप्पल्ली बीच, एडास्सेरी बीच, चिलंका बीच, थंबनकडावु बीच और एनामावु बैकवॉटर्स जैसे आकर्षक पर्यटन स्थल मौजूद हैं, जो स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करते हैं.
(श्रेया प्रसाद)