ओल्लूर विधानसभा क्षेत्र केरल विधानसभा की 140 सीटों में से सीट नंबर 66 है और यह त्रिशूर जिले का एक प्रमुख विधानसभा क्षेत्र माना जाता है. यह त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जो केरल का एकमात्र लोकसभा क्षेत्र है जहां से बीजेपी का सांसद चुना गया है.
भौगोलिक और प्रशासनिक रूप से ओल्लूर विधानसभा क्षेत्र में ओल्लूर नगरपालिका और इसके
आसपास की कई पंचायतें शामिल हैं. इसमें मदक्काथरा, नदाथरा, पनंचेरी और पुथुर पंचायतें आती हैं, साथ ही त्रिशूर (म्युनिसिपल कॉरपोरेशन) के वार्ड नंबर 12, 13, 23 से 31 और 40 से 42 भी इस विधानसभा क्षेत्र में शामिल हैं. ओल्लूर कस्बा अपने समृद्ध सांस्कृतिक इतिहास के लिए जाना जाता है, जहां पारंपरिक उत्सव, पुराने मंदिर और सांस्कृतिक परंपराएं बहुत प्रसिद्ध हैं. इसके अलावा यह क्षेत्र त्रिशूर शहर के काफी पास है, इसलिए शहर की नजदीकी का असर यहां के लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन पर भी साफ दिखाई देता है.
मतदाता भागीदारी के मामले में ओल्लूर का रिकॉर्ड हमेशा मजबूत रहा है. यहां आमतौर पर 75% से अधिक मतदान होता है, जो केरल की उच्च मतदान संस्कृति के अनुरूप है. शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों के मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय रूप से हिस्सा लेते हैं, इसलिए यहां चुनाव अक्सर कड़े मुकाबले वाले होते हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव में ओल्लूर में 2,08,075 पंजीकृत मतदाता थे और मतदान प्रतिशत लगभग 75.06% रहा था.
राजनीतिक इतिहास की बात करें तो ओल्लूर में मुख्य मुकाबला हमेशा लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच रहा है. LDF में प्रमुख भूमिका आमतौर पर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) की रहती है, जबकि UDF का नेतृत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) करती है. इस क्षेत्र में दशकों के दौरान मतदाताओं की पसंद में बदलाव होता रहा है. गठन के शुरुआती वर्षों में ओल्लूर में कांग्रेस समर्थित नेताओं का प्रभाव ज्यादा था, लेकिन समय के साथ LDF ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत की और विधानसभा स्तर पर राजनीतिक वर्चस्व में बदलाव आया. हाल के वर्षों में CPI के के. राजन ने 2016 और 2021 में लगातार जीत दर्ज की है.
2021 विधानसभा चुनाव परिणाम में CPI के के. राजन ने शानदार जीत हासिल की. उन्हें 76,657 वोट मिले, जो कुल वैध मतों का 49.09% था. दूसरे स्थान पर कांग्रेस (INC) के जोसे वल्लूर रहे, जिन्हें 55,151 वोट मिले, यानी 35.31% रहा. तीसरे स्थान पर बीजेपी के एडवोकेट बी. गोपालकृष्णन रहे, जिन्हें 22,295 वोट मिले, यानी 14.28%. ये आंकड़े साफ बताते हैं कि ओल्लूर में CPI की मजबूत बढ़त रही, कांग्रेस मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनी रही और बीजेपी एक उल्लेखनीय लेकिन अभी भी दूर तीसरे स्थान पर रही.
सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से ओल्लूर एक ऐसा क्षेत्र है जहां व्यापार, वाणिज्य, सेवाएं, रिटेल और छोटे व्यवसाय अच्छी तरह फलते-फूलते हैं. त्रिशूर शहर के पास होने और अच्छी कनेक्टिविटी के कारण यहाँ कई परिवार प्रोफेशनल सेवाओं, दुकानदारी, होटल-हॉस्पिटैलिटी और परिवहन जैसे कामों से जुड़े हैं. वहीं आसपास की पंचायतों में खेती का भी बड़ा योगदान है, जहाँ धान, नारियल, केला और सब्जियों की खेती प्रमुख रूप से होती है. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कृषि मजदूर और छोटे किसान काम करते हैं. केरल की तरह ओल्लूर में भी परिवारों की आय और क्षेत्रीय खर्च करने की क्षमता पर प्रवास (remittances) का गहरा असर है, क्योंकि कई लोग राज्य से बाहर, खासकर खाड़ी देशों में काम करते हैं.
मतदाता व्यवहार और चुनावी गतिशीलता में CPI और LDF की स्थिति मजबूत मानी जाती है, क्योंकि उनका संगठनात्मक नेटवर्क श्रम आंदोलनों, ट्रेड यूनियनों और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में गहराई से जुड़ा हुआ है. वहीं कांग्रेस-नेतृत्व वाला UDF भी खासकर शहरी और मध्यम वर्गीय आबादी में अच्छी पकड़ बनाए रखता है. दूसरी ओर बीजेपी/NDA ने अभी तक सीट नहीं जीती है, लेकिन हाल के चुनावों में उसका वोट शेयर लगातार बढ़ा है, जो शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बढ़ती राजनीतिक भागीदारी की एक व्यापक प्रवृत्ति को दिखाता है.
ओल्लूर क्षेत्र में लोगों के सामने कुछ अहम मुद्दे और स्थानीय समस्याएं लगातार चर्चा में रहती हैं, जिनमें कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर, नागरिक सुविधाएं और सार्वजनिक सेवाएं, ग्रामीण कल्याण और कृषि सहायता, तथा शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रमुख हैं.
पर्यटन और घूमने लायक स्थानों की बात करें तो ओल्लूर में सेंट एंटनीज फोरेन चर्च, ओल्लूर, विलंगन हिल्स व्यू पॉइंट, और मदक्काथरा श्री भगवती मंदिर जैसे प्रसिद्ध स्थान हैं, जो धार्मिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से लोगों को आकर्षित करते हैं.
(श्रेया प्रसाद)