इरिंजालक्कुडा विधानसभा क्षेत्र केरल के त्रिशूर जिले में स्थित है और केरल विधान सभा की 140 सीटों में से सीट नंबर 70 के रूप में जाना जाता है. यह राष्ट्रीय संसदीय चुनावों के लिए चालाकुडी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इरिंजालक्कुडा अपनी शिक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक विरासत और संतुलित सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल के लिए प्रसिद्ध है और यह क्षेत्र मध्य
केरल की राजनीति का एक अहम उदाहरण माना जाता है.
इरिंजालक्कुडा नगर त्रिशूर जिले का एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र है, और यही इस विधानसभा क्षेत्र का मुख्य केंद्र भी है. यह क्षेत्र शहरी और ग्रामीण, दोनों हिस्सों को मिलाकर बना है. इरिंजालक्कुडा शहर अपने धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों, जीवंत त्योहारों और शिक्षा संस्थानों के लिए प्रसिद्ध है, जहां केरल भर से विद्यार्थी पढ़ने आते हैं. प्रशासनिक रूप से इस विधानसभा क्षेत्र में इरिंजालक्कुडा नगरपालिका के साथ-साथ मुकुंदपुरम तालुक के अंतर्गत आने वाली अलूर, करालम, कट्टूर, मुरियाड, पाडियूर, पूमंगलम, पोरथिस्सेरी और वेलूक्करा पंचायतें शामिल हैं.
भारत निर्वाचन आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में इरिंजालक्कुडा में लगभग 2,01,978 पंजीकृत मतदाता थे. 2021 के चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 76.83% रहा, जो यह दर्शाता है कि यहां हर उम्र और वर्ग के लोग सक्रिय रूप से मतदान करते हैं.
इरिंजालक्कुडा का चुनावी इतिहास काफी प्रतिस्पर्धी और बदलता हुआ रहा है. यहां लंबे समय से यूडीएफ (UDF) और एलडीएफ (LDF) के बीच मुख्य मुकाबला होता रहा है. यूडीएफ का नेतृत्व मुख्य रूप से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) करती है, जबकि एलडीएफ का प्रमुख चेहरा सीपीआई(एम) [CPI(M)] रही है. वर्ष 2011 में केरल कांग्रेस (एम) के एडवोकेट थॉमस उन्नीयादान ने यहां से जीत हासिल की थी. इसके बाद 2016 और 2021 में यह सीट एडवोकेट आर. बिंदु (CPI(M), LDF) ने जीती.
2021 के विधानसभा चुनाव में इरिंजालक्कुडा से सीपीआई(एम) की और एलडीएफ उम्मीदवार एडवोकेट आर. बिंदु ने शानदार जीत दर्ज की. उन्हें 62,493 वोट मिले, जो लगभग 40.27% वोट शेयर था. दूसरे स्थान पर केरल कांग्रेस (जैकब) के एडवोकेट थॉमस उन्नीयादान रहे, जिन्हें 56,544 वोट मिले और उनका वोट शेयर 36.44% रहा. वहीं भाजपा (एनडीए) के डॉ. जैकब थॉमस को 34,329 वोट मिले, जो लगभग 22.12% वोट शेयर था.
एडवोकेट आर. बिंदु ने लगभग 21,000 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की. यह जीत एलडीएफ के मजबूत जनादेश को दिखाती है, हालांकि इस चुनाव में यूडीएफ और एनडीए (भाजपा के जरिए) को भी अच्छी संख्या में वोट मिले, जिससे यह साफ होता है कि यहां मुकाबला बहुदलीय और प्रभावशाली रहा.
इरिंजालक्कुडा एक तेजी से विकसित होता शहर है, जहां व्यापार और रोजगार के कई क्षेत्र मौजूद हैं. यहां थोक व्यापार, खुदरा व्यापार और सेवा क्षेत्र से जुड़े काम बड़े पैमाने पर होते हैं. इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में शिक्षा संस्थानों की भी बड़ी भूमिका है, क्योंकि ये आसपास के क्षेत्रों से छात्रों को आकर्षित करते हैं और शिक्षा से जुड़े रोजगार भी उपलब्ध कराते हैं. ग्रामीण पंचायतों में आज भी पारंपरिक खेती होती है, जिसमें सब्जियां, धान, नारियल और केले जैसी फसलें प्रमुख हैं. केरल के कई अन्य इलाकों की तरह, यहां भी परिवार के कई सदस्य राज्य से बाहर, खासकर खाड़ी देशों में काम करते हैं, और उनके द्वारा भेजा गया पैसा (रेमिटेंस) घरेलू आय और स्थानीय खर्च को काफी प्रभावित करता है.
इस क्षेत्र में एलडीएफ ने अपनी मजबूत स्थिति जमीनी संगठन, कल्याणकारी योजनाओं और समुदायों से लगातार जुड़ाव के जरिए बनाई है, खासकर सीपीआई(एम) और उससे जुड़े संगठनों के माध्यम से. दूसरी तरफ यूडीएफ, जिसकी अगुवाई कांग्रेस करती है, आज भी पेशेवर वर्ग, मध्यम वर्ग और पारंपरिक कांग्रेस समर्थक समूहों के बीच मजबूत पकड़ रखती है और एलडीएफ की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है. वहीं एनडीए, विशेषकर भाजपा, ने यहां अपना वोट शेयर काफी बढ़ाया है, जो कुछ मतदाता समूहों में एकल मुद्दों पर आधारित समर्थन और राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते रुझानों को दर्शाता है.
इस क्षेत्र में मतदाताओं के लिए कुछ मुख्य मुद्दे लगातार अहम रहे हैं, जिनमें शहरों में बेहतर सेवाएं और मजबूत बुनियादी ढांचा, रोजगार और शिक्षा के बेहतर अवसर, स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच, और कृषि के लिए अधिक सहायता व समर्थन शामिल है.
इरिंजालक्कुडा धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां के प्रमुख पर्यटन स्थलों में कूडलमानिक्यम मंदिर, थचुदया कैमुख्कू मंदिर, उन्नायी वारियर स्मारक कलानिलयम, और इरिंजालक्कुडा कट्टुंगल एवं हेरिटेज स्ट्रीट्स शामिल हैं.
(श्रेया प्रसाद)