कोडुंगल्लूर विधानसभा क्षेत्र केवल एक राजनीतिक सीट नहीं है, बल्कि यह इतिहास और भूगोल की साझा स्मृतियों से बना हुआ क्षेत्र है. यह केरल के त्रिशूर जिले का हिस्सा है और चालाकुडी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. मुजिरिस की ऐतिहासिक विरासत, चेरामन जुमा मस्जिद, कोडुंगल्लूर भगवती मंदिर और सदियों पुराने समुद्री व्यापार के कारण यह इलाका केरल के सबसे
ऐतिहासिक राजनीतिक क्षेत्रों में गिना जाता है. यहां इतिहास केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि मछली पकड़ने के बंदरगाहों, औद्योगिक इलाकों, प्रवासी मजदूर बस्तियों, धान के खेतों और तेजी से फैलते कस्बों के साथ रोजमर्रा के जीवन में मौजूद है. इसलिए कोडुंगल्लूर की राजनीति भी कई परतों में बंटी हुई है, जहां रोजगार, जमीन, पर्यावरण, सांस्कृतिक सह-अस्तित्व और जागरूक मतदाताओं की अपेक्षाएँ एक साथ चुनावी व्यवहार को तय करती हैं.
कोडुंगल्लूर का भूगोल यहां की राजनीति को सीधे प्रभावित करता है. यह इलाका समुद्री तटीय गांवों, पेरियार और चालाकुडी नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों, ऐतिहासिक मंदिर नगरों, मछुआरा बस्तियों और कोच्चि के औद्योगिक विस्तार से जुड़े अर्ध-शहरी इलाकों तक फैला हुआ है. आसपास के ईलूर-एडयार औद्योगिक क्षेत्र के कारण प्रदूषण, नदियों की सफाई, तटीय कटाव, रेत खनन और मछुआरों की आजीविका की सुरक्षा जैसे मुद्दे हमेशा राजनीति के केंद्र में रहते हैं. साथ ही बेहतर सड़क संपर्क, विरासत पर्यटन और कोच्चि के नजदीक होने के कारण शहरीकरण और जमीन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनती है.
कोडुंगल्लूर में विकास को कभी भी केवल विकास नहीं माना जाता, बल्कि उसे पर्यावरणीय जोखिम, सांस्कृतिक निरंतरता और रोजगार पर पड़ने वाले असर के साथ तौला जाता है.
कोडुंगल्लूर का मतदाता समाज केरल की सबसे विविध सामाजिक संरचनाओं में से एक है. यहां हिंदू, मुस्लिम और ईसाई समुदाय पास-पास रहते हैं, कई बार एक ही वार्ड या मछुआरा गांव में. धार्मिक पहचान मौजूद है, लेकिन वह आम तौर पर विभाजनकारी नहीं बनती. सदियों से चले आ रहे सह-अस्तित्व और साझा आर्थिक जीवन ने यहां ऐसी राजनीतिक संस्कृति विकसित की है, जहां खुला ध्रुवीकरण ज्यादा असर नहीं डाल पाता.
मछुआरा समुदाय, किसान परिवार, कॉयर उद्योग से जुड़े श्रमिक, छोटे व्यापारी, औद्योगिक मजदूर, खाड़ी देशों से लौटे परिवार और बढ़ता सेवा क्षेत्र, ये सभी मिलकर चुनावी रुझान तय करते हैं. जाति संगठनात्मक स्तर पर भूमिका निभाती है, लेकिन अंतिम मतदान निर्णय अक्सर पेंशन, पर्यावरण सुरक्षा, महंगाई और रोजगार जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर आधारित होते हैं.
कोडुंगल्लूर लंबे समय से वामपंथ का गढ़ रहा है. ट्रेड यूनियनों, सहकारी संस्थाओं और मजदूरों, मछुआरों व छोटे किसानों के बीच लगातार संगठनात्मक काम ने वाम दलों, खासकर CPI(M), को मजबूत आधार दिया है. पार्टी की कैडर उपस्थिति स्थानीय निकायों और जमीनी समितियों तक फैली हुई है. कांग्रेस की भी यहां एक मजबूत लेकिन सीमित पकड़ रही है, विशेषकर मध्यवर्ग, अल्पसंख्यक समुदायों और कुछ ग्रामीण इलाकों में. यहां चुनाव आम तौर पर प्रतीकात्मक नहीं होते, बल्कि बूथ स्तर की मेहनत, कल्याण योजनाओं की विश्वसनीयता और उम्मीदवार की स्थानीय पहचान पर लड़े जाते हैं. कोडुंगलूर ऐसे नेताओं को पसंद नहीं करता जो दिखाई न दें. जनता चाहती है कि प्रतिनिधि जमीन, पर्यावरण, उद्योग और कल्याण से जुड़े मामलों में सक्रिय रहें.
कोडुंगल्लूर में पर्यावरण राजनीति केवल नारा नहीं है. तटीय कटाव, मानसून में बाढ़, नदी प्रदूषण और उद्योगों का सामूहिक प्रभाव चुनावी चर्चाओं में बार-बार उभरता है. विकास परियोजनाओं की कड़ी जांच होती है और मछुआरे व किसान आम तौर पर जोखिम से बचाव को प्राथमिकता देते हैं. यही कारण है कि यहां ऐसे दलों और नेताओं को फायदा मिलता रहा है जिन्हें प्रशासनिक अनुभव और संस्थागत मजबूती वाला माना जाता है.
2021 के विधानसभा चुनाव में ये सभी कारक साफ तौर पर नतीजों में दिखाई दिए. वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के उम्मीदवार और CPI(M) नेता वी. आर. सुनील कुमार ने 72,597 वोट हासिल कर जीत दर्ज की. कांग्रेस उम्मीदवार के. ए. उन्नीकृष्णन को 53,403 वोट मिले. दोनों के बीच 19,194 वोटों का अंतर रहा, जो उस चुनाव में त्रिशूर जिले की स्पष्ट जीतों में से एक था. भाजपा उम्मीदवार के. के. अनिश कुमार लगभग 29,000 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे. मतदाताओं की भारी भागीदारी ने यह दिखाया कि कोडुंगलूर चुनाव को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नागरिक मूल्यांकन के रूप में देखता है.
वामपंथ की बड़ी जीत केवल विचारधारा की पुष्टि नहीं थी. यह संगठनात्मक मौजूदगी, कल्याण योजनाओं की डिलीवरी और उम्मीदवार की उपलब्धता पर जनता के भरोसे को दर्शाती थी. पर्यावरण और विकास से जुड़ी चिंताओं के बावजूद मतदाताओं को भरोसा था कि वाम सरकार इन संतुलनों को बिना रोजगार और जीवनशैली को नुकसान पहुँचाए संभाल सकती है.
कांग्रेस के लिए यह नतीजा यह संकेत था कि जहां ऐतिहासिक स्मृति, संगठन और कल्याण की विश्वसनीयता गहराई से जुड़ी हो, वहां सेंध लगाना आसान नहीं होता.
पर्यावरण संरक्षण कोडुंगल्लूर की राजनीति का केंद्र बना हुआ है. नदी प्रदूषण, तटीय कटाव और बाढ़ प्रबंधन सरकारों और प्रतिनिधियों की लगातार परीक्षा लेते हैं. मछुआरों की आजीविका, आवास सुरक्षा और आपदा राहत मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित करती है. इसके अलावा पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं, बुज़ुर्गों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सहायता, सड़कें, पेयजल और उद्योगों के नियमन जैसे मुद्दे रोजमर्रा की राजनीति का हिस्सा हैं. ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी विकास योजनाओं के मूल्यांकन में अहम भूमिका निभाता है.
मछुआरा गांव अक्सर सामूहिक रूप से मतदान करते हैं और तटीय नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हैं. कृषि क्षेत्रों में सिंचाई, जमीन संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण प्रमुख मुद्दे होते हैं. परिवहन मार्गों और औद्योगिक क्षेत्रों के पास के अर्ध-शहरी वार्ड रोजगार, प्रदूषण नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं पर ध्यान देते हैं.
इन अलग-अलग प्राथमिकताओं को जोड़ने में वाम दलों की संगठनात्मक क्षमता ने उन्हें लंबे समय तक चुनावी बढ़त दिलाई है.
हालांकि त्रिशूर जिले के कुछ हिस्सों में भाजपा ने संगठनात्मक विस्तार किया है, लेकिन कोडुंगलूर में ध्रुवीकरण आधारित राजनीति को सीमित समर्थन मिला है. सामाजिक विविधता और आजीविका-केंद्रित सोच पहचान आधारित राजनीति को प्रभावी नहीं होने देती. यहां मुकाबला मुख्य रूप से CPI(M) और कांग्रेस के बीच ही रहता है.
कोडुंगल्लूर निरंतरता, संगठनात्मक मजबूती और संकट के समय दिखाई देने वाले नेतृत्व को महत्व देता है. जो नेता पर्यावरण संघर्षों में साथ खड़े होते हैं, रोजगार की रक्षा करते हैं और प्रशासनिक रूप से सुलभ रहते हैं, उन्हें जनता का भरोसा मिलता है. 2021 का फैसला इसी भरोसे की पुष्टि था, लेकिन यहां निगरानी कभी खत्म नहीं होती.
कोडुंगल्लूर इतिहास की स्मृति और व्यावहारिक सावधानी के साथ मतदान करता है. यहां विचारधारा को जीवन के अनुभवों और विकास को जोखिम के साथ तौला जाता है. अतीत और भविष्य, दोनों एक साथ चुनावी फैसलों को दिशा देते हैं.
कोडुंगल्लूर विधानसभा क्षेत्र संख्या 73 है, जो त्रिशूर जिले में स्थित है और चालाकुडी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. यह एक तटीय-ऐतिहासिक सीट है, जहां वामपंथ की मजबूत पकड़ रही है. 2021 के विधानसभा चुनाव में CPI(M) उम्मीदवार वी. आर. सुनील कुमार ने 72,597 वोट पाकर कांग्रेस के के. ए. उन्नीकृष्णन (53,403 वोट) को 19,194 वोटों से हराया. भाजपा तीसरे स्थान पर रही.
(ए के शाजी)