पणजी, जिसे पहले पंजीम के नाम से जाना जाता था, भारत के सबसे छोटे राज्य गोवा की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है. मांडवी नदी के किनारे बसा और दो खाड़ियों- ऑरेम क्रीक और सांता इनेज क्रीक से घिरा पणजी, भारत की 'कैसीनो राजधानी' के रूप में भी जाना जाता है.
विस्तृत पणजी शहर में चार विधानसभा क्षेत्र हैं. पणजी इनमें से एक है और यह तिसवाड़ी तालुका
में 'कॉर्पोरेशन ऑफ द सिटी ऑफ पणजी' (CCP) के अधिकार क्षेत्र के तहत आने वाले मुख्य शहरी क्षेत्र को कवर करता है. इसमें अल्टिन्हो, कैंपाल, मिरामार, फोंटेनहास, माला, सांता इनेज, पोर्टास, साथ ही नए राजधानी परिसर के पास पट्टो और रिबांदर के कुछ हिस्से, और करांजलेम के कुछ चुनिंदा इलाके शामिल हैं. पणजी, जो एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है, उत्तरी गोवा लोकसभा सीट के 20 खंडों में से एक है.
1963 में स्थापित पणजी में अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इनमें तीन उपचुनाव भी शामिल हैं, जो मनोहर पर्रिकर के राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के बीच आवागमन के कारण हुए थे. और अंततः, 2019 में उनके निधन के बाद, वे पद पर रहते हुए जान गंवाने वाले गोवा के पहले सेवारत मुख्यमंत्री बन गए.
हालांकि पर्रिकर का जन्म मापुसा में हुआ था, लेकिन उन्होंने पणजी को BJP का गढ़ बना दिया, क्योंकि उन्होंने यह सीट छह बार जीती थी - जिसमें 1994 से 2012 तक लगातार पांच जीत की एक श्रृंखला भी शामिल है. कुल मिलाकर, BJP ने पणजी सीट नौ बार, कांग्रेस पार्टी ने तीन बार, और यूनाइटेड गोअन्स पार्टी ने दो बार जीती है. जबकि महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी (MGP), जनता पार्टी और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट एक-एक बार जीती है.
पर्रिकर ने 2012 में अपना लगातार पांचवां चुनाव जीता, जिसमें उन्होंने कांग्रेस के यतिन पारेख को 6,068 वोटों से हराया था. हालांकि, 2014 में भारत के प्रधानमंत्री का पदभार संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने केंद्र में उनकी सेवाओं की आवश्यकता महसूस की, और पर्रिकर को भारत का रक्षा मंत्री नियुक्त किया. इसके परिणामस्वरूप 2015 में उपचुनाव हुआ, जिसमें पर्रिकर के करीबी सहयोगी सिद्धार्थ कुनकालियेंकर ने पणजी सीट जीत ली. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सुरेंद्र फर्टाडो को 5,368 वोटों से हराया था. कुंकालियेंकर ने 2017 के चुनावों में यह सीट बरकरार रखी, और यूनाइटेड गोअन्स पार्टी के अतानासियो मोंसेरेट को 1,069 वोटों से हराया.
हालांकि गोवा विधानसभा में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला (हंग असेंबली), लेकिन BJP, जिसके नेता पर्रिकर थे, ने क्षेत्रीय पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों की मदद से सरकार बनाई और पर्रिकर फिर से गोवा के मुख्यमंत्री बने. कुंकालियेंकर ने पर्रिकर के लिए पणजी सीट खाली कर दी. पर्रिकर ने इसके बाद हुए 2017 के उपचुनाव में कांग्रेस के गिरीश चोडनकर को 4,803 वोटों से हराकर जीत हासिल की.
हालांकि, पर्रिकर के निधन के कारण 2019 में उपचुनाव हुआ. इस चुनाव को अतानासियो मोंसेरेट ने जीता. वे यूनाइटेड गोअन्स पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए थे और उन्होंने BJP के सिद्धार्थ कुंकालियेंकर को 1,758 वोटों से हराया. बाद में मोंसेरेट BJP में शामिल हो गए, जिससे 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान BJP मुश्किल में पड़ गई.
BJP पणजी सीट खोना नहीं चाहती थी, और पर्रिकर के बेटे, उत्पल मनोहर पर्रिकर, अपने पिता की सीट से चुनाव लड़ने पर अड़े हुए थे. BJP ने उन्हें दूसरी सीटें देने की पेशकश की, लेकिन उत्पल टस से मस नहीं हुए. उन्होंने एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 2022 में BJP के आधिकारिक उम्मीदवार, अतानासियो मोंसेरेट से 716 वोटों के मामूली अंतर से हार गए.
पणजी विधानसभा क्षेत्र में BJP का दबदबा लोकसभा चुनावों के दौरान देखे गए वोटिंग रुझानों में भी झलकता है. 2009 में, BJP ने कांग्रेस की सहयोगी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) पर 3,784 वोटों की बढ़त बनाई थी. तब से, कांग्रेस उत्तरी गोवा लोकसभा सीट पर बिना कोई खास असर डाले चुनाव लड़ रही है. पणजी क्षेत्र में BJP ने 2014 में कांग्रेस पर 5,256 वोटों की, 2019 में 2,284 वोटों की और 2024 में 2,051 वोटों की बढ़त हासिल की.
विशेष गहन संशोधन के बाद, 2026 में पणजी निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में 30 मतदान केंद्रों पर फैले 18,071 मतदाता दर्ज थे. यह संख्या 2024 के लोकसभा चुनावों में दर्ज 22,469 मतदाताओं की तुलना में 4,398 मतदाताओं की कमी दर्शाती है. इससे पहले, 2022 के विधानसभा चुनावों में यह संख्या 22,408, 2019 के लोकसभा चुनावों में 22,482, 2017 के विधानसभा चुनावों में 22,203, 2014 के लोकसभा चुनावों में 21,928 और 2012 के विधानसभा चुनावों में 21,355 थी.
पणजी एक हिंदू बहुल विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र है, जहां 19.80 प्रतिशत ईसाई मतदाता और लगभग 8 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं. अनुसूचित जातियों के मतदाताओं की हिस्सेदारी 2.97 प्रतिशत है, और अनुसूचित जनजातियों की लगभग 1 प्रतिशत. पणजी पूरी तरह से एक शहरी निर्वाचन क्षेत्र है, जिसकी मतदाता सूची में कोई भी ग्रामीण मतदाता शामिल नहीं है. यहां मतदाताओं की भागीदारी (वोटर टर्नआउट) मध्यम स्तर की रही है. यह 2012 के विधानसभा चुनावों में 78.85 प्रतिशत, 2014 के लोकसभा चुनावों में 73.26 प्रतिशत, 2017 के विधानसभा चुनावों में 78.38 प्रतिशत, 2019 के लोकसभा चुनावों में 71.60 प्रतिशत, 2022 के विधानसभा चुनावों में 77.90 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनावों में 68.25 प्रतिशत रही.
17वीं सदी में पणजी पुर्तगाली गोवा की प्रशासनिक राजधानी बन गया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बार-बार प्लेग फैलने के कारण शासकों को पुराने गोवा से अपनी राजधानी बदलनी पड़ी थी. पुर्तगालियों ने इसे 'नोवा' (नया) गोवा के रूप में विकसित किया, जिसमें सुनियोजित सड़कें और यूरोपीय शैली की इमारतें थीं. फोंटेनहास का प्रसिद्ध 'लैटिन क्वार्टर', अपने रंग-बिरंगे घरों के साथ, इसी औपनिवेशिक विरासत को दर्शाता है. यह शहर दशकों से जीवंत 'गोवा कार्निवल' की मेजबानी करता आ रहा है, जिसमें रंग-बिरंगी परेड, संगीत, नृत्य और सड़कों पर होने वाले उत्सव शामिल होते हैं, जो देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में मिरामार बीच, डोना पाउला व्यूप्वाइंट, ऐतिहासिक 'चर्च ऑफ आवर लेडी ऑफ द इमैकुलेट कॉन्सेप्शन', सचिवालय भवन और म्युनिसिपल मार्केट तथा कैंपाल के हलचल भरे बाजार शामिल हैं. मांडवी नदी के किनारे बना रिवरसाइड प्रोमेनेड शाम की सैर और कसीनो क्रूज़ के लिए एक पसंदीदा जगह है.
पणजी की भौगोलिक बनावट मुख्य रूप से तटीय और शहरी है. यहां मांडवी नदी के किनारे समतल, निचले इलाके हैं, जबकि अल्टिन्हो जैसे कुछ हिस्सों में हल्की ऊंचाई वाले क्षेत्र भी हैं. यहां की जमीन में लेटेराइट मिट्टी पाई जाती है, और यह नदी तथा आस-पास की उन छोटी नदियों (क्रीक्स) से प्रभावित है जो शहर की जल निकासी व्यवस्था और भू-दृश्य को आकार देती हैं.
यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से सरकारी प्रशासन, पर्यटन, व्यापार, खुदरा बिक्री और कसीनो उद्योग पर निर्भर है. आगंतुकों के लगातार आने-जाने और सरकारी कार्यालयों की मौजूदगी के कारण छोटे व्यवसाय, होटल, रेस्तरां और विभिन्न सेवाएं यहां खूब फल-फूल रही हैं. यह शहर उत्तरी गोवा के लिए एक वाणिज्यिक केंद्र के रूप में भी कार्य करता है.
यहां का बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी काफी विकसित है. सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन थिविम है, जो लगभग 20 से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वहीं मडगांव रेलवे स्टेशन यहां से लगभग 40 से 45 किलोमीटर दूर है. डाबोलिम हवाई अड्डा यहां से लगभग 30 से 35 किलोमीटर की दूरी पर है, जबकि मोपा (MOPA) स्थित मनोहर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूर है. सड़कों का बेहतरीन नेटवर्क और मांडवी नदी का व्यस्त किनारा यहां रोजमर्रा की आवाजाही को सुगम बनाते हैं. नियमित बस और फेरी सेवाएं पणजी को राज्य के अन्य हिस्सों से जोड़ती हैं.
जैसे-जैसे 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, भाजपा को एक बार फिर उसी दुविधा का सामना करना पड़ रहा है, जिसका मुख्य कारण भावनात्मक पहलू हैं. मार्च 2026 में हुए CCP चुनावों में उत्पल पर्रिकर के उम्मीदवारों का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा. वे 30 में से केवल 3 वार्डों में ही जीत हासिल कर पाए, जबकि दूसरी ओर अतानासियो मोंसेरेट के नेतृत्व में भाजपा ने 27 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की.
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का दिल तो उत्पल पर्रिकर के साथ ही है, जिसका एकमात्र कारण यह है कि वे मनोहर पर्रिकर के सुपुत्र हैं. लेकिन साथ ही, पार्टी इस बात से भी भली-भांति अवगत है कि अतानासियो मोंसेरेट के बिना पणजी सीट पर जीत हासिल करना अब लगभग असंभव सा हो गया है.
उत्पल पर्रिकर ने पहले ही यह घोषणा कर दी है कि वे किसी अन्य सीट से चुनाव नहीं लड़ेंगे, बल्कि पणजी विधानसभा क्षेत्र से एक 'निर्दलीय उम्मीदवार' के तौर पर ही चुनाव मैदान में उतरेंगे. यह अंदरूनी फूट एक बार फिर BJP के वोटरों को बांटने वाली है, और 2027 के विधानसभा चुनावों में BJP के लिए यही एकमात्र चिंता का विषय हो सकता है. क्योंकि इससे विपक्ष के किसी मजबूत और एकजुट उम्मीदवार के लिए दरवाजा खुला रह जाता है. बशर्ते कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष पणजी सीट पर मिलकर चुनाव लड़ने पर सहमत हो जाए.
(अजय झा)