मांग कर खाते थे रोटी, अब डीयू में प्रोफेसर बने दिव्यांग दीपक

अलवर के मंदा माजरी गांव के रहने वाले विनोद शर्मा ने गरीबी में अपने बचपन गुजारा था और आज वो दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज में भूगोल के सहायक प्रोफेसर हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 06 दिसंबर 2017,
  • अपडेटेड 12:00 PM IST

राजस्थान के अलवर जिले के एक शख्स ने कुछ ऐसा कर दिखाया, जो आज सभी के लिए प्रेरणादायक कहानी है. अलवर के मंदा माजरी गांव के रहने वाले विनोद शर्मा ने गरीबी में अपने बचपन गुजारा था और आज वो दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ भीमराव अंबेडकर कॉलेज में भूगोल के सहायक प्रोफेसर हैं.

अखबार दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार विनोद के परिवार में पांच भाई बहन हैं. उनके पिता ऊंटगाड़ी पर सब्जी बेचते थे और बचपन में उनके पांव में पोलियो हो गया था. वहीं जब वो 11 साल के थे तो उनके पिता का निध्न हो गया था, लेकिन उन्होंने गरीबी से लड़ाई लड़ी.

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उन्हें गरीबी की वजह से अपनी पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी, लेकिन बाद में काम के साथ साथ पढ़ाई करते हुए वो इस मुकाम पर पहुंचे.

उन्होंने 4 किताबें लिखी हैं और कई देश-विदेश में कई मुद्दों पर लेक्चर भी दिया है. उन्हें सराहनीय कार्य के लिए कई पुरस्कारों से भी सम्मानित भी किया गया है.

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