एक- एक कर छोड़ी 7 नौकरियां, जमुई के सचिन अब बने SDM

नक्सल प्रभावित इलाके के एक किसान परिवार के बेटे ने संघर्ष, मेहनत और लगन के दम पर सफलता की नई इबारत लिख दी. रेलवे समेत सात सरकारी नौकरियां छोड़कर सचिन कुमार ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल की और एसडीएम बनने का सपना पूरा किया. अब उनका अगला लक्ष्य यूपीएससी पास कर आईएएस अधिकारी बनना है.

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जमुई के सचिन अब बना SDM (Photo: itg) जमुई के सचिन अब बना SDM (Photo: itg)

राकेश कुमार सिंह

  • जमुई,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:18 AM IST

करीब आधा दर्जन से अधिक सरकारी नौकरियों में सेवा देने के बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्र से आने वाले एक युवक ने अपनी कड़ी मेहनत, संघर्ष और दृढ़ इच्छा शक्ति के बदौलत 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल कर बन गया एसडीएम. अब यूपीएससी पास कर आईएएस बनने का है सपना.
 
रेलवे ग्रुप डी समेत सात नौकरियां छोड़ अपने संघर्ष, मेहनत और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश करते हुए जमुई जिले के गरही थाना क्षेत्र के मिलनीटाड़ गांव के रहने वाले 28 साल के सचिन कुमार ने बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम बनने का गौरव प्राप्त किया है.

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खेती के साथ मटन दुकान चलाते हैं पिता

साधारण परिवार से आने वाले सचिन की इस उपलब्धि से पूरे गांव और परिवार में खुशी का माहौल है. उनके पिता खेती-किसानी के साथ मटन की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं. वर्तमान में सचिन कुमार बेगूसराय जिले के बखरी अंचल में राजस्व पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. बीपीएससी 70वीं परीक्षा में उन्होंने 104वीं रैंक हासिल कर एसडीएम पद के लिए चयनित होने में सफलता पाई है. सचिन बताते हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने में उनके माता-पिता और बड़े भाई का सबसे बड़ा योगदान रहा है.

बिहार तक से खास बातचीत में सचिन ने बताया कि उनकी पहली नौकरी भारतीय नौसेना में लगी थी, लेकिन मेडिकल कारणों से वह नौकरी नहीं कर सके. इसके बाद रेलवे के अहमदाबाद डिवीजन में ग्रुप-डी की नौकरी मिली, जहां उन्होंने करीब तीन महीने तक काम किया. बाद में रेलवे में इलेक्ट्रीशियन के पद पर चयन हुआ और लगभग तीन वर्षों तक रेलवे में सेवा दी.

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104वीं रैंक हासिल कर SDM बना सचिन

इसके बाद उन्हें दिल्ली में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में नौकरी मिली. इसी दौरान साथियों से मिली प्रेरणा ने उन्हें सिविल सेवा की तैयारी के लिए प्रोत्साहित किया. लगातार मेहनत के बल पर बीपीएससी 69वीं परीक्षा में उनका चयन राजस्व पदाधिकारी पद के लिए हुआ. 69वीं परीक्षा में उनकी रैंक 378 थी.

राज्स्व अधिकारी के रूप में काम करते हुए भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी. परिणाम ये हुआ कि 70वीं परीक्षा में 104वीं रैंक हासिल कर एसडीएम बनने का सपना पूरा हो गया. सचिन ने 7 नौकरियां छोड़कर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना.

सचिन के लिए नौकरी के साथ पढ़ाई करना एक बड़ी चुनौती थी इसके बाबजूद उन्हें सफलता मिली. उन्होंने कहा कि यदि सभी सरकारी सेवाओं की समय-सीमा तय हो और उनका सख्ती से पालन कराया जाए तो पारदर्शिता बढ़ेगी. जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जैसी सेवाओं को निर्धारित समय में उपलब्ध कराना तथा लोक शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करना भ्रष्टाचार कम करने की दिशा में प्रभावी कदम हैं.

बतौर SDM क्या- क्या तैयारी

एसडीएम के रूप में अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताते हुए सचिन ने कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचाना उनकी पहली जिम्मेदारी होगी. राशन वितरण, पेयजल आपूर्ति, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और आवास योजना जैसी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

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उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी की समस्या गंभीर हो सकती है, इसलिए इस दिशा में भी प्रभावी कार्य करना आवश्यक है. तकनीक और डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को काफी हद तक रोका जा सकता है. पटना में रहकर तैयारी के दौरान भी परिवार ने हर संभव सहयोग किया. सचिन कहते हैं कि यदि वह निजी जीवन और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बना पाए तो अब उनका अगला लक्ष्य यूपीएससी की परीक्षा पास कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में जाना है.

सचिन के पिता सुरेश दबगर ने बताया कि बेटे के एसडीएम बनने से पूरा परिवार और गांव गौरवान्वित महसूस कर रहा है. उन्होंने कहा कि खेती-किसानी के साथ-साथ उन्होंने मटन की दुकान चलाकर बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाया. बेटे की हर सफलता ने उनका हौसला बढ़ाया. उन्होंने उम्मीद जताई कि सचिन आगे यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अधिकारी बनेंगे और परिवार के साथ-साथ जिले का नाम भी रोशन करेंगे. 
 

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