IIT गांधीनगर के छात्रों ने बनाई गरीब बच्‍चों के लिए लाइब्रेरी

कहते हैं इरादे पक्‍के हो तो मंजिल मिल ही जाती है. IIT के कुछ छात्रों ने इसे सच कर दिखाया है. पक्‍के इरादों के दम पर इन्‍होंने एक गांव में लाइब्रेरी खोल दी है, जिससे बच्‍चों के पढ़ने का सपना पूरा हो रहा है.

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IIT GANDHINAGAR IIT GANDHINAGAR

मेधा चावला

  • नई दिल्‍ली,
  • 23 अक्टूबर 2016,
  • अपडेटेड 2:32 PM IST

कुछ समय पहले तक गुजरात के पलाज गांव के बच्‍चों ज्‍यादा किताबें नहीं पढ़ पाते थे. इसका कारण बच्‍चों की पढ़ाई में कम दिलचस्‍पी नहीं बल्कि उनके पास किताबों की कमी थी.पर अब इस गांव के बच्‍चों की ऐसी हालत नहीं है. उनके पास एक लाइब्रेरी है जहां खूब किताबें हैं. इस लाइब्रेरी को बनाने का श्रेय IIT गांधीनगर के छात्रों को जाता है.

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कैसी है लाइब्रेरी
लाइब्रेरी में 100 से ज्‍यादा किताबें हैं. ये किताबें हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में हैं. फिक्‍शन, नॉन-फिक्‍शन और टेक्‍स्‍टबुक्‍स यहां पर हैं. यहां 7 से 14 साल तक के बच्‍चों के लिए किताबें हैं. यहां ज्‍यादातर ऐसी किताबें हैं जिन्‍हें लोगों ने डोनेट किया है. इस लाइब्रेरी के लिए बुक शेल्‍व्स यहां के बच्‍चों ने खुद बनाए हैं. इसका रखरखाव भी गांव के बच्‍चे ही करते हैं. भविष्‍य में इस लाइब्रेरी में और किताबें लाने का लक्ष्‍य इन छात्रों ने रखा है.


किसका है ये आइडिया
लाइब्रेरी बनाने का यह आइडिया गांधीनगर में बीटेक के दूसरे वर्ष के कुछ छात्रों का है. अक्षत पचौरी, रजत रंजन, यश पटेल, रजत गोयल, रोहित सिंह इस टीम में शामिल हैं. टीम की अगुवाई प्रतीक वर्मा ने की.

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