दिल्ली में एक डेंटल सर्जन ऐसी भी, डिक्शनरी में नहीं है छुट्टी शब्द

दिल्ली के बहुप्रतीष्ठित सफदरजंग अस्पताल की एक डेंटल सर्जन ऐसी भी है जो कभी छुट्टी नहीं लेतीं. पांच दिन अस्पताल में मरीजों को देखने के बाद वीकेंड पर वह गरीबों को देखती हैं.

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Dr Ankita Chandra Dr Ankita Chandra

विष्णु नारायण

  • नई दिल्ली,
  • 26 मई 2016,
  • अपडेटेड 6:56 PM IST

वैसे तो डॉक्टरी को हमारी दुनिया का सबसे पवित्र पेशा माना जाता रहा है लेकिन इस बीच स्थितियां एकदम उलट हो गई हैं. प्राथमिक चिकित्सा केंद्र से लेकर बड़े-बड़े अस्पतालों तक से ऐसी खबरें अक्सर आती हैं कि डॉक्टरों ने किस तरह कोताहियां बरतीं. किस तरह वे सरकार से मिलने वाली तमाम दवाइयों को गोल कर गए. किस तरह वे अपने जॉब के प्रति ईमानदार नहीं रहते. वहीं दिल्ली के बहुप्रतीष्ठित सफदरजंग अस्पताल में डेंटल सर्जन अंकिता चंद्रा की बात ही जुदा है.

वह पांच दिनों तक तो सफदरजंग अस्पताल, सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की कुछ डिस्पेंसरियों में भी मरीजों की देखभाल तो करती हैं. इसके अलावा शनिवार और रविवार की छुट्टी वाले दिनों में उन्हें दिल्ली के आसपास के गांवों में जाकर मुप्त में लोगों के दांतों का इलाज करते देखा जा सकता है.

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गांवों में दौरे से जानी वहां की हकीकत...
डॉक्टर अंकिता ने पश्चिम बंगाल से बीडीएस की पढ़ाई की है. वहां पढ़ाई के दौरान उन्हें हर साल डेंटल कैंप के लिए ग्रामीण इलाकों में ले जाया जाता था. वे बताती हैं कि शहरों में तो लोग दांतों के प्रति थोड़े-बहुत जागरुक भी हैं लेकिन गांवों में तो स्थितियां भयावह हैं. रही-सही कसर वहां आसानी से मिलने वाले और खैनी जैसे नशीले पदार्थ पूरी कर देते हैं. इसी दौरान उन्होंने लोगों को जागरुक करने की जिम्मेदारी उठाई.

यूपीएससी और शादी की वजह से मुहिम की रफ्तार हुई धीमी...
डॉक्टर बनने के बाद डॉक्टर अंकिता यूपीएससी की तैयारी करने लगीं. इसी दौरान उनकी शादी भी हो गई. शादी के बाद वो केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के लिये काम करने लगीं. वो बताती हैं कि तो अपने इलाज का खर्च उठा लिया करते थे लेकिन उन मरीजों का क्या जो आर्थिक रूप से संपन्न नहीं हैं.
आंकड़ों के आइने से जो तस्वीर वह दिखाती हैं वह तो और भी भयावह है. शहरों में डॉक्टरों की भरमार है. यहां 15 हजार लोगों में 1 डेंटल सर्जन मौजूद है, जबकि ग्रामीण इलाकों में 1 लाख से ज्यादा की आबादी पर 1 डेंटल सर्जन ही उपलब्ध है.

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गांव-गांव जाने के अलावा चलाती हैं मुफ्त क्लिनिक...
डॉक्टर अंकिता ना सिर्फ गांव गांव जाकर लोगों में डेंटल हेल्थ को लेकर जागरूकता फैला रही हैं बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए उन्होंने गुड़गांव में एक की स्थापना भी की है. यहां मुफ्त में बूढ़े और गरीब लोगों का इलाज और उनको दवाएं दी जाती हैं. फिलहाल डॉक्टर अंकिता और उनकी टीम दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, गुजरात, महाराष्ट्र सहित 11 राज्यों में काम कर रही है.
वह अब तक 25 हजार से ज्यादा लोगों के दांतों की जांच कर चुकी है. डॉक्टर अंकिता की अक्सर 6 लोगों की होती है. जिसमें 3 डॉक्टर और 3 वालंटियर होते हैं. डॉक्टर अंकिता की देखादेखी अब कई दूसरे डेंटल सर्जन भी अपने आसपास के ग्रामीण इलाके में कुछ इसी तरह का सकारात्मक प्रयास करना चाहते हैं. इसके लिए वे डॉक्टर अंकिता से सम्पर्क भी साधते हैं.

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