CBSE के सामने अब साख बचाने की चुनौती, एक जून से होगी बोर्ड की अग्न‍ि-परीक्षा

चारों ओर आलोचनाओं और टूलकिट विवाद के बीच CBSE ने अपनी तकनीकी व्यवस्था में खामी स्वीकार की है. इसे लेकर बोर्ड की ओर से नया प्रेस नोट जारी कर साफ किया कि उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के लिए पोर्टल 1 जून  से दोबारा सक्रिय किया जाएगा.

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CBSE re-evaluation controversy (Photo : Pexels) CBSE re-evaluation controversy (Photo : Pexels)

मानसी मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 30 मई 2026,
  • अपडेटेड 3:15 PM IST

चौतरफा आलोचनाओं और ‘टूलकिट’ विवाद के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी तकनीकी व्यवस्था में खामी स्वीकार की है. बोर्ड ने एक नया प्रेस नोट जारी कर स्पष्ट किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) के लिए पोर्टल 1 जून  से दोबारा सक्रिय किया जाएगा. बोर्ड ने बताया कि यह पोर्टल पहले ही खुल जाना चाहिए था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें देरी हुई. अब तीन दिनों के भीतर सिस्टम को “ग्लिच-फ्री” यानी तकनीकी खामियों से मुक्त करने का काम किया जा रहा है.

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वहीं, आजतक टीम की पड़ताल और पिछले एक हफ्ते के छात्रों के कड़वे अनुभव और एग्जामिनर की विवशताएं कुछ और ही बयां करती है. अब सवाल सिर्फ विंडो खोलने का नहीं है. असल सवाल ये है कि क्या सीबीएसई ने उन बुनियादी कमियों को सुधारा है, जिन्होंने 18 लाख छात्रों की रातों की नींद उड़ा रखी है? 1 जून को जब यह पोर्टल खुलेगा, तो सीबीएसई की साख की असली परीक्षा किन 4 मोर्चों पर होनी बाकी है?

क्या 1 जून को संभल जाएगा 'ट्रैफिक का सुनामी'?

सीबीएसई ने तीन दिन का वक्त लेकर अपना सर्वर अपग्रेड करने की कोशिश तो की है, लेकिन आंकड़ों के लिहाज से यह चुनौती बहुत बड़ी है. बता दें कि इस साल 12वीं कक्षा के करीब 25% छात्रों (हर चार में से एक) ने कॉपियों की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया है. यह पिछले साल की तुलना में 208% की भारी बढ़ोतरी है. अब जब 1 जून को लाखों छात्र एक साथ, एक ही मिनट पर पोर्टल पर लॉग-इन करेंगे, तो सर्वर पर ट्रैफिक का 'सुनामी' आना तय है. अगर सीबीएसई ने क्लाउड-बेस्ड मल्टीपल सर्वर आर्किटेक्चर को मजबूत नहीं किया, तो 1 जून को भी छात्रों को '504 Gateway Timeout' और 'Page Not Found' के पुराने बोर्ड ही लटके मिलेंगे. हालांकि सीबीएसई पोर्टल को संभालने और मजबूत करने के ल‍िए कानपुर और मद्रास आईआईटी के इंजीन‍ियर दिन-रात एक करके जुटे हुए हैं.

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ब्लर स्कैनिंग और अधूरी कॉपियों का क्या होगा समाधान?

अभी तक छात्रों की शिकायतों में जो सबसे बड़ा पॉइंट सामने आया, वह था कॉपियों की जर्जर और गैर-जिम्मेदाराना स्कैनिंग. छात्रों का आरोप है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) के नाम पर जो डिजिटल शीट उन्हें मुहैया कराई गईं, उनमें कई पन्ने इतने धुंधले (Blurred) थे कि लिखे हुए शब्द पढ़े ही नहीं जा रहे थे. एक 25 साल के अनुभवी एग्जामिनर ने भी यही बात कही थी कि उन्होंने अंदाजे और अपने व‍िवेक से नंबर द‍िए हैं. वहीं कई मामलों में तो कॉपियों के आखिरी 2-3 पन्ने स्कैन होने से ही छूट गए, जिसके कारण उन प्रश्नों के नंबर ही गायब हो गए.

ऐसे मामलों में सीबीएसई को सिर्फ लिंक नहीं सुधारना है, बल्कि बैकएंड पर उन सभी वेंडर्स को सख्त हिदायत देनी होगी कि कॉपियों की हाई-डेफिनिशन (HD) स्कैनिंग दोबारा की जाए. क्या बोर्ड ने इन 3 दिनों में लाखों कॉपियों को दोबारा ठीक से री-स्कैन किया है? या उन कॉपीज की मैनुअल चेकिंग की तैयारी है, इसका भी जवाब मिलना बाकी है.

टोटल काउंटिंग और जोड़-घटाव की इंसानी गलतियां

सीबीएसई ने बड़े जोर-शोर से दावा किया था कि ओएसएम (OSM) सिस्टम आने के बाद शिक्षकों को सिर्फ कंटेंट पर ध्यान देना होगा और नंबरों को जोड़ने (Arithmetic Calculation) का काम कंप्यूटर खुद कर लेगा. लेकिन जमीन पर यह दावा हवा हो गया.  कई छात्रों की डिजिटल शीट में पाया गया कि अंदर के पन्नों पर एग्जामिनर ने 4 नंबर दिए हैं, लेकिन मुख्य पृष्ठ (समीक्षा शीट) पर कंप्यूटर ने उसे '0' या '1' काउंट किया है. अब सीबीएसई को अपने ओएसएम सॉफ्टवेयर के एल्गोरिदम और कोडिंग को री-चेक करना होगा ताकि जोड़ने में होने वाली ये तकनीकी त्रुटियां पूरी तरह खत्म हो सकें.

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फीस रिडक्शन पर क्या रिफंड पॉलिसी पारदर्शी होगी?

17 मई को सीबीएसई ने अपनी फीस में जो भारी कटौती की घोषणा की थी, उसी के बाद से आवेदनों की बाढ़ आई है. कम फीस के चक्कर में अब हर वह छात्र भी आवेदन कर रहा है जिसे अपने 2 नंबर बढ़ने की भी उम्मीद है. लेकिन अगर पोर्टल बार-बार हैंग होता रहा, तो छात्रों के पैसे बैंक अकाउंट से तो कट जाएंगे, लेकिन सीबीएसई के पास रसीद जेनरेट नहीं होगी. सीबीएसई को पेमेंट गेटवे को इतना स्मूथ बनाना होगा कि छात्रों के पैसे बीच में न अटकें और अगर तकनीकी खराबी से ट्रांजैक्शन फेल हो, तो तुरंत 'ऑटो-रिफंड' की पारदर्शी व्यवस्था हो.

सच कहें तो सीबीएसई का यह नया नोटिस इस बात का जीता-जागता सबूत है कि बोर्ड का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बच्चों के गुस्से के सामने घुटने टेक चुका था. 1 जून की तारीख तय करके सीबीएसई ने खुद के लिए 'कूलिंग पीरियड' तो खरीद लिया है, लेकिन छात्रों का सब्र अब जवाब दे रहा है. अगर 1 जून को सुबह पोर्टल खुलने के बाद दोबारा वही पुराना ड्रामा शुरू हुआ, तो सीबीएसई के पास मुंह छिपाने की जगह नहीं बचेगी. साख सिर्फ सुंदर दिखने वाले ग्राफिक्स या प्रेस नोट जारी करने से नहीं बचेगी; साख तब बचेगी जब 1 जून को हर बच्चे का फॉर्म बिना किसी एरर के सबमिट होगा. ऑल द बेस्ट, सीबीएसई! इस बार छात्र आपको ग्रेस मार्क्स नहीं देने वाले.

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