नीट (NEET), जेईई मेन (JEE Main) और सीयूईटी (CUET) जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षाएं आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में काम करने वालों को कितनी सैलरी मिलती है. एनटीए अपने स्टाफ की सैलरी पर कितना पैसा खर्च करती है और उसके सबसे बड़े अधिकारियों को कितनी सैलरी मिलती है. इंडिया टुडे द्वारा दाखिल की गई एक आरटीआई (RTI) के जवाब में, एजेंसी ने सैलरी खर्च और अपने टॉप 10 अधिकारियों की कमाई का ब्योरा देने से मना कर दिया. एनटीए का कहना है कि यह डेटा उस फॉर्मेट में मौजूद नहीं है, जिस फॉर्मेट में इसे मांगा गया है.
आरटीआई में क्या पूछा गया था?
इस आरटीआई के जरिए एनटीए से शुरुआत से लेकर अब तक (सालाना आधार पर) सैलरी, भत्तों (allowances) और स्टाफ पर हुए कुल खर्च की जानकारी मांगी गई थी. इसके साथ ही एनटीए के 10 सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले अधिकारियों के पद (designation), उनकी सालाना सैलरी, भत्ते और कुल सालाना कमाई का ब्योरा भी मांगा गया था. इस पर 13 जून 2026 को दिए अपने जवाब में एजेंसी ने कहा कि आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी वांछित फॉर्मेट (desired format) में उपलब्ध नहीं है.
एनटीए ने कानून का कौन-सा पेंच फंसाया?
एनटीए ने आरटीआई एक्ट की धारा 2(f) का हवाला देते हुए तर्क दिया कि सरकारी विभागों या संस्थाओं को केवल वही जानकारी देनी होती है जो उनके रिकॉर्ड में पहले से मौजूद हो. जवाब में कहा गया कि नया डेटा तैयार करना, अलग-अलग सोर्स से जानकारी इकट्ठा करना या विवरणों को संकलित (compile) करना नई जानकारी बनाने जैसा है, जो आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(f) के दायरे से बाहर है.
एनटीए के इस जवाब से उस संस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठने लाजिमी हैं, जो भारत की शिक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी और संवेदनशील भूमिका निभाती है. गौर करने वाली बात यह है कि एनटीए ने यह नहीं कहा कि यह जानकारी उसके पास है ही नहीं. बल्कि उसने यह स्टैंड लिया कि डेटा तय फॉर्मेट में नहीं है और इसे इकट्ठा करके देना नई जानकारी बनाने जैसा होगा.
क्यों अहम है यह मामला?
यह आरटीआई जवाब इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि एनटीए के स्टाफ का ढांचा पहले से ही सार्वजनिक है. दिसंबर 2024 में शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया था कि एनटीए में कुल 198 कर्मचारी हैं. इनमें से 22 कर्मचारी प्रतिनियुक्ति (deputation) पर हैं, 38 कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) पर हैं और 138 कर्मचारी आउटसोर्स (बाहरी एजेंसियों के जरिए) किए गए हैं.
इसके अलावा, साल 2024 में राष्ट्रीय परीक्षाओं से जुड़े विवादों के बाद बनी के. राधाकृष्णन कमेटी ने भी एक बड़ी सिफारिश की थी. कमेटी ने जोर दिया था कि परीक्षाओं के काम में आउटसोर्सिंग (अस्थाई स्टाफ और सेंटर्स) को कम से कम किया जाना चाहिए, क्योंकि इतने बड़े स्तर की परीक्षाओं को अस्थाई या कम निगरानी वाले स्टाफ के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. इसी पृष्ठभूमि में, एनटीए के स्टाफ पर होने वाले खर्च और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी का ढांचा जानना आम जनता और छात्रों के हित के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.
अशोक उपाध्याय