NEET परीक्षा केंद्र बने 'नो-धागा' जोन, दावों की खुली पोल! फिर आहत हुई आस्था 

मेडिकल प्रवेश परीक्षा री-NEET शुरू हो चुकी है. इस बार सुरक्षा के नाम पर कुछ ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने परीक्षा केंद्रों पर भारी विवाद खड़ा कर दिया है. परीक्षा से पहले बड़े-बड़े दावे किए गए थे कि छात्रों की धार्मिक भावनाओं को बिल्कुल भी ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी और कलाइयों से मन्नत के धागे नहीं हटाए जाएंगे. लेकिन जब परीक्षा की घड़ी आई, तो जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर नजर आई. 

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नीरज वशिष्ठ / अतुल तिवारी

  • नई दिल्ली,
  • 21 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:58 PM IST

मेडिकल प्रवेश परीक्षा री-NEET 2026 शुरू होते ही परीक्षा केंद्रों से तरह-तरह की खबरें सामने आने लगी हैं. सुरक्षा जांच के नाम पर कई जगह ऐसी सख्ती देखने को मिली, जिसने छात्रों और अभिभावकों के बीच बहस छेड़ दी है. परीक्षा से पहले किए गए दावों और जमीनी हकीकत के बीच फर्क को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं जिससे कुछ परीक्षा केंद्रों पर विवाद की स्थिति बन गई है. 

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दावे धरे के धरे रहे, सुरक्षाकर्मियों ने चलाई कैंची

​गुरुग्राम के कादीपुर सीनियर सेकेंडरी स्कूल और सेक्टर-9 के गवर्नमेंट कॉलेज से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. परीक्षा केंद्रों पर तैनात सुरक्षाकर्मी नियमों के आगे इतने लकीर के फकीर बन गए कि उन्होंने छात्रों की आस्था की भी परवाह नहीं की. 

​गले से उतरवाए रुद्राक्ष: परीक्षार्थियों के गले में सजे पवित्र रुद्राक्ष को जबरन उतरवाकर टेबल पर रख दिया गया. 

​काटे गए मन्नत के धागे: छात्रों की कलाइयों पर बंधे लाल, काले और मन्नत के धागों को सुरक्षाकर्मियों ने कैंची से काट डाला. 

मेज पर बिखरी आस्था: ​परीक्षा केंद्र के प्रांगण में रखी एक मेज इस पूरे घटनाक्रम की गवाह बनी हुई है. इस मेज पर चारों तरफ लाल-काले मन्नत के धागे और रुद्राक्ष कटे हुए रखे हैं.  ये वो धागे हैं जिन्हें माता-पिता ने अपने बच्चों की कामयाबी और सुरक्षा के लिए दुआएं मांगकर बांधा था, लेकिन परीक्षा हॉल के मुख्य दरवाजे पर इन्हें सुरक्षा कारणों के लिए काट दिया गया. 

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​चेकिंग के नाम पर मनमानी!

परीक्षा देने आए छात्रों और उनके अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी रोष है. उनका कहना है कि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना सही है, लेकिन चेकिंग के नाम पर इस तरह आस्था को ठेस पहुंचाना कहां तक जायज है? इसके बाद से कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं.  

सख्त नियम या अंधा कानून?

नीट परीक्षा में नकल रोकने के लिए ड्रेस कोड और चेकिंग के बेहद सख्त नियम लागू होते हैं, यह सब जानते हैं. लेकिन मेटल डिटेक्टर और आधुनिक तकनीक के इस दौर में, क्या एक धागे या रुद्राक्ष से भी नकल का खतरा था? जब प्रशासन ने पहले ही धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने का भरोसा दिया था, तो ऐन वक्त पर सुरक्षाकर्मी इतने संवेदनहीन क्यों हो गए?

​फिलहाल, इस घटना के बाद सोशल मीडिया और अभिभावकों के बीच बहस छिड़ गई है कि "परीक्षा की शुचिता जरूरी है या छात्र की आस्था का सम्मान?

 

अहमदाबाद से भी सामने आई तस्वीरें 

अहमदाबाद के वस्त्रापुर में स्थित NEET परीक्षा केंद्र आरजे टिबरेवाल पर हिंदू छात्रों के हाथ में कलावा और मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने को लेकर हुआ विवाद खड़ा हो गया. परीक्षा सेंटर के गेट पर सिक्योरिटी कर्मियों के द्वारा कलावा काटकर छात्रों को प्रवेश दिया गया, उसी समय मुस्लिम छात्राओं का हिजाब उतरवाया गया था. हालांकि,  अभिभावकों के विरोध के बाद में परीक्षा सेंटर को अपनी गलती का एहसास होने पर मुस्लिम छात्राओं को हिजाब के साथ प्रवेश मिला लेकिन जिन छात्र और छात्राओं का कलावा काटा गया था वो वापिस नहीं बांधा जा सका. परीक्षा के केंद्र के प्रिंसिपल ने मुस्लिम अभिभावकों से माफी मांगी लेकिन कलावा काटने को लेकर अभिभावकों में आक्रोश है. 

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