5 दिन पहले ही राज्यों की राजधानी में पहुंचने लगा है Re-NEET पेपर, जानें कैसा है सिक्योरिटी का नया सिस्टम?

परीक्षा से ठीक 5 दिन पहले ही सील बंद प्रश्नपत्रों को राज्यों की राजधानियों तक पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है. लेकिन इस बार ये पेपर किसी आम कूरियर, निजी वेंडर या साधारण डाक नेटवर्क के भरोसे नहीं भेजे जा रहे हैं जहां से हमेशा लीक होने का सबसे बड़ा खतरा रहता था. आइए आपको बताते हैं कि इस बार आपके पेपर की सुरक्षा में कौन-कौन तैनात है और राज्यों में पहुंचने के बाद ये कहां रखे जा रहे हैं.

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अभेद्य सुरक्षा में रखे जा रहे NEET री-एग्जाम के प्रश्नपत्र अभेद्य सुरक्षा में रखे जा रहे NEET री-एग्जाम के प्रश्नपत्र

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 16 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:50 AM IST

मई के महीने में नीट परीक्षा के दौरान पेपर लीक से एनटीए और सरकार की देश भर में किरकिरी हुई. उससे सबक लेते हुए इस बार केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) फूंक-फूंक कर कदम रख रही है. आगामी 21 जून 2026 को होने जा रही नीट री-एग्जामिनेशन के लिए सुरक्षा का कड़ा पहरा तैयार किया गया है, जैसा भारत के प्रतियोगी परीक्षाओं के इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया.  

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ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, परीक्षा से ठीक 5 दिन पहले ही सील बंद प्रश्नपत्रों (Question Papers) को राज्यों की राजधानियों और रणनीतिक केंद्रों पर पहुंचाने का काम युद्धस्तर पर शुरू हो चुका है. लेकिन इस बार ये पेपर किसी आम कूरियर, निजी वेंडर या साधारण डाक नेटवर्क के भरोसे नहीं भेजे जा रहे हैं जहां से हमेशा लीक होने का सबसे बड़ा खतरा रहता था. आइए आपको बताते हैं कि इस बार आपके पेपर की सुरक्षा में कौन-कौन तैनात है और राज्यों में पहुंचने के बाद ये कहां रखे जा रहे हैं.

वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर और Mi-17 हेलीकॉप्टर मैदान में
इस बार सुरक्षा की पहली और सबसे मजबूत परत आसमान में तैयार की गई है. रक्षा और शिक्षा मंत्रालय के बीच हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद, पहली बार परीक्षा सामग्री के ट्रांसपोर्टेशन के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) को मैदान में उतारा गया है. वायुसेना के विशालकाय C-17 ग्लोबमास्टर विमानों और Mi-17 हेलीकॉप्टरों के जरिए गोपनीय प्रश्नपत्रों के पैकेट्स को देश के 18 बेहद रणनीतिक और मुख्य हब (जैसे पटना, जयपुर आदि) तक सीधे एयरलिफ्ट किया जा रहा है.  

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कैसी है चेन ऑफ कस्टडी 
वायुसेना को इस मिशन में शामिल करने का इकलौता मकसद यह है कि प्रिंटिंग प्रेस से निकलने के बाद राज्यों के मुख्य सेंटर्स तक पहुंचने के बीच में जितने भी 'हैंडलिंग पॉइंट्स' या बिचौलिए आते थे, उन्हें पूरी तरह खत्म कर दिया जाए. रास्ते में किसी भी बाहरी इंसान की इस वीआईपी कार्गो तक पहुंच असंभव है.  

'कमांडो और अर्धसैनिक बलों' का पहरा
जैसे ही वायुसेना के विमान इन सील बंद बक्सों को लेकर राज्यों की राजधानी या तय एयरबेस पर लैंड कर रहे हैं, वहां से ग्राउंड सिक्योरिटी का जिम्मा देश की सबसे भरोसेमंद सिक्योरिटी फोर्सेज संभाल रही हैं. यहां मल्टी-लेयर सुरक्षा घेरा तैयार क‍िया गया है. इसमें एयरपोर्ट्स और एयरबेस से लेकर मुख्य स्टोरेज फैसिलिटी तक इन पेपर्स को CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) और CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के जवान अपनी कस्टडी में ले रहे हैं.  

इन प्रश्नपत्रों को किसी साधारण सरकारी दफ्तर के कमरों में रखने के बजाय, अत्याधुनिक मिलिट्री या अर्धसैनिक बलों की निगरानी वाले स्ट्रॉन्ग-रूम और अभेद्य तिजोरियों में 24 घंटे के कड़े पहरे के बीच लॉक किया जा रहा है.  यह नया सिक्योरिटी सिस्टम सिर्फ पेपर को सेंटर्स तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है. 21 जून को जब छात्र परीक्षा हॉल में बैठेंगे, तब भी सुरक्षा का स्तर किसी छावनी जैसा होगा.   

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इसके ल‍िए देश भर के परीक्षा केंद्रों, ट्रांसपोर्टेशन हब्स और स्टोरेज यूनिट्स पर करीब 5 लाख सुरक्षाकर्मियों को मुस्तैद किया जा रहा है.  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्विलांस की मदद से हर केंद्र पर 1 लाख से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों को रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए केंद्रीय खुफिया एजेंसियों (IB और CBI) के कंट्रोल रूम से जोड़ा जा रहा है, जो एआई-इनेबल्ड फेशियल रिकग्निशन (चेहरे की पहचान) तकनीक पर काम करेंगे.  

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