भीड़, करोड़ों का चढ़ावा और हाईटेक सिस्टम... इन्हें संभालने के लिए चाहिए टेंपल मैनेजर्स, जानें इस कोर्स के बारे में

देश के बड़े मंदिर अब सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं रहे. वे बड़े आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र बन चुके हैं. लाखों श्रद्धालु, करोड़ों का चढ़ावा, वीआईपी विजिट, डिजिटाइज्ड डोनेशन सिस्टम और विशाल प्रसाद व्यवस्थाएं, इन सबको संभालने के लिए अब परंपरागत मॉडल के साथ प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस हो रही है.

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भीड़, करोड़ों का चढ़ावा और हाईटेक सिस्टम... इन्हें संभालने के लिए चाहिए Temple Managers भीड़, करोड़ों का चढ़ावा और हाईटेक सिस्टम... इन्हें संभालने के लिए चाहिए Temple Managers

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 19 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:39 PM IST

जनवरी 2024 में अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद देश में धार्मिक पर्यटन का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. अयोध्या, काशी, उज्जैन और तिरुपति जैसे बड़े धार्मिक केंद्रों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. इस बढ़ते दबाव ने एक ऐसे करियर फील्ड को चर्चा में ला दिया है, जिसके बारे में अभी तक बहुत कम लोग जानते थे , वो है टेंपल मैनेजमेंट.

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यह सिर्फ एक कॉन्सेप्ट नहीं, बल्कि भारत में बाकायदा पढ़ाया जाने वाला एक आधिकारिक डिप्लोमा कोर्स है.

गुजरात की श्री सोमनाथ संस्कृत यून‍िवर्स‍िटी इस क्षेत्र में 'ड‍िप्लोमा इन टेंपल मैनेजमेंट' चला रही है. यूनिवर्सिटी और एजुकेशनल पोर्टल्स के मुताबिक यह एक साल का फुल-टाइम डिप्लोमा है, जिसमें 12वीं पास छात्र एडमिशन ले सकते हैं. सबसे चौंकाने वाली बात इसकी फीस है जो सिर्फ करीब ₹3000 है. .

आखिर टेंपल मैनेजमेंट में पढ़ाया क्या जाता है?

बहुत से लोगों को लगता है कि इसमें पूजा-पाठ या कर्मकांड सिखाए जाते होंगे, लेकिन आधिकारिक सिलेबस इससे अलग तस्वीर दिखाता है. यूनिवर्सिटी के उपलब्ध सिलेबस रिकॉर्ड के मुताबिक इसके मुख्य फोकस ए‍र‍िया यहां द‍िए गए हैं. 

बड़े मंदिर परिसरों की प्रशासनिक व्यवस्था
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधन
दान और वित्तीय प्रबंधन
आयोजन और लॉजिस्टिक्स
मंदिर परिसर की संरचना और संरक्षण
बेसिक कानून और ट्रस्ट एडमिनिस्ट्रेशन

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मतलब साफ है  कि ये गर्भगृह के भीतर नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के बाहर के पूरे सिस्टम को प्रोफेशनल तरीके से संभालने की ट्रेनिंग है.

क्यों बढ़ रही है इसकी जरूरत?

देश के बड़े मंदिर अब सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं रहे. वे बड़े आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र बन चुके हैं. लाखों श्रद्धालु, करोड़ों का चढ़ावा, वीआईपी विजिट, डिजिटाइज्ड डोनेशन सिस्टम और विशाल प्रसाद व्यवस्थाएं, इन सबको संभालने के लिए अब परंपरागत मॉडल के साथ प्रोफेशनल मैनेजमेंट की जरूरत महसूस हो रही है. यही वजह है कि मंदिर प्रशासन, ट्रस्ट गवर्नेंस और धार्मिक पर्यटन से जुड़े प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ रही है.

रोजगार कहां?

फिलहाल इस क्षेत्र में प्लेसमेंट का कोई मजबूत सार्वजनिक डेटा उपलब्ध नहीं है. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में बड़े मंदिर ट्रस्ट, धार्मिक बोर्ड, तीर्थ पर्यटन कंपनियां और हेरिटेज मैनेजमेंट सेक्टर इस तरह की ट्रेनिंग को महत्व दे सकते हैं. हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ₹10-15 लाख पैकेज वाले दावों की अभी तक कोई ठोस पुष्टि नहीं होती है.

साफ शब्दों में कहें तो टेंपल मैनेजमेंट कोई मिथक नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ अच्छा करियन फील्ड है लेकिन इसके नाम पर फैलाई जा रही कई बातें अभी भी हाइप ज्यादा और डेटा कम हैं. 

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