कॉरपोरेट लॉ में ऐसे बनाएं करियर, कमाई के हैं जोरदार मौके

कॉरपोरेट लॉयर को किसी भी सरकारी संस्था या विभागों की ओर से समय-समय पर बनाए या संशोधित किए जाने वाले कानूनों की पूरी जानकारी होनी चाहिए.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

मोहित पारीक

  • नई दिल्ली,
  • 01 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 4:59 PM IST

लीगल सेक्टर में रूचि रखने वाले स्टूडेंट्स अब कॉरपोरेट लॉ में अपना करियर बना रहे हैं. नौकरी और कमाई के अच्छे अवसर होने की वजह से आप भी इस क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं. हाल ही के कुछ सालों में कॉरपोरेट लॉ के मामले में वकालत में भी खास बदलाव आया है. आइए जानते हैं कॉरपोरेट लॉ के बारे में...

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क्‍या होता है इनका काम:

कॉरपोरेट्स लॉयर, कॉरपोरेशंस को उनके कानूनी अधिकारों और सीमाओं के बारे में सलाह देते हैं. करोड़ों के मामलों के चलते पूरा गेम ही बदल गया है और कॉरपोरेट लॉ एक व्यापक व आकर्षक करियर बन गया है. कॉरपोरेट लॉयर अपने क्लाइंट्स को कानूनी तरीके से कारोबार करने में मदद करता है. उसकी जिम्मेदारी नई फर्म के लिए शुरुआती दस्तावेज तैयार करने से लेकर कॉरपोरेट रीऑर्गनाइजेशन करने तक की रहती है.

स्‍कोप:

चूंकि कंपनियां लीगल को अपने कारोबार के कोर स्ट्रेटेजिक फैक्टर के रूप में हैं, इसलिए स्वतंत्र वकीलों और इन-हाउस लीगल टीम की मांग लगातार बढ़ी है. रोजगार के बाजार में वकीलों की मांग अचानक बहुत तेजी से बढ़ी है. एक अनुमान के मुताबिक भारतीय फर्म पिछले साल से दोगुनी संख्या में वकीलों को नौकरी पर रखेंगी. मांग न केवल सीनियर पोजीशन पर बढ़ी है, बल्कि एंट्री लेवल पर भी बढ़ी है.

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सैलरी :

विदेशी कानूनी फर्मों के भारत में आने से सैलरी का ग्राफ भी काफी ऊपर चला गया है. कैंपस रिक्रूटमेंट में ऑफर की जाने वाली सैलरी भी 10 से 15 फीसदी बढ़ी है. जिनके पास 3 से 8 साल का अनुभव है, उनके मामलों में तो यह बढ़ोत्तरी 35 से 100 फीसदी के बीच हुई है. लीगल सेल के प्रमुखों की औसत सालाना सैलरी इस साल 1.8-2.3 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है जो पिछले साल 90 लाख से 1.3 करोड़ हुआ करती थी.

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