कभी-कभी कर्मचारियों के भविष्य के बारे में सोचने के तरीके में बदलाव लाने के लिए कंपनी की घोषणा या टाउन हॉल मीटिंग की जरूरत नहीं होती है. लिफ्ट में हुई दो मिनट की बातचीत ही इसके लिए काफी होती है. एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ भी ठीक यही हुआ, जिसने रेडिट पर एक पोस्ट के साथ अपना अनुभव शेयर किया है. पोस्ट के अनुसार, अपने स्किप मैनेजर के साथ शुरू हुई सामान्य बातचीत जल्द ही एक ऐसी चर्चा में बदल गई, जिससे उसे यह सवाल उठने लगा कि कुछ लीडर वर्क प्लेस पर AI को किस तरह देखते हैं.
क्या है AI का नया दौर?
पोस्ट में कर्मचारी ने लिखा कि उसके मैनेजर ने कहा कि किसी ने नहीं सोचा था कि AI इतना सक्षम हो जाएगा कि वह हमारे लिए कोड लिख सके. इस पर इंजीनियर ने माना कि AI एक उपयोगी और बहुत मजबूत टूल बन गया है, लेकिन इसके इस्तेमाल की कुछ सीमाएं भी हैं. तब उन्होंने जवाब दिया कि अब एआई इसी तरह रहेगा. यह इससे आगे नहीं जा सकता है. इसका रिव्यू करने के लिए किसी इंजीनियर की जरूरत होगी और हमेशा इसके लिए इंजीनियर की जरूरत होगी. हालांकि, उन्होंने अपने मैनेजर से असहमति जताई है.
जल्द दी इंसानों की नहीं होगी जरूरत
इंजीनियर ने दावा किया कि उसके मैनेजर ने मुस्कुराते हुए कहा नहीं. जल्द ही ऐसे कई फीचर्स होंगे जो बिना किसी इंसानी हस्तक्षेप के केवल एआई की ओर से विकसित किए जाएंगे. कर्मचारी ने बताया कि लिफ्ट की वह छोटी-सी बातचीत खत्म होने के बाद भी उसकी बात उनके दिमाग में घूमती रही. उन्होंने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा गुस्सा इस बात पर आया कि लोग AI को लेकर बिना पूरी जानकारी के राय बना लेते हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि उनके मैनेजर ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट से MBA करने से पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी.
क्या सच में चली जाएगी नौकरी?
इंजीनियर के लिए यह बातचीत सिर्फ AI की क्षमता तक सीमित नहीं थी. उन्हें चिंता थी कि आने वाले समय में कंपनियों के लीडर कर्मचारियों की भूमिका को किस तरह देखे रहे हैं. उन्होंने लिखा कि उन्हें लगता है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल से कर्मचारियों की अहमियत कम हो सकती है.
हालांकि, यह एक व्यक्ति का अनुभव और राय है लेकिन इसने कई लोगों के बीच चर्चा शुरू कर दी है कि AI आने वाले समय में काम करने के तरीके और नौकरियों को कैसे बदलेगा. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI क्या कर सकता है, बल्कि यह भी है कि भविष्य में इंसानी अनुभव और विशेषज्ञता की जगह क्या होगी.
आजतक एजुकेशन डेस्क