ईरान के परमाणु बम का कच्चा माल किसके हवाले होगा? रूस रखने को तैयार, ईरान 5 साल सस्पेंड करने को तैयार, US छीनने को तैयार

ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम पर तनाव चरम पर है. रूस इसे अपने पास सुरक्षित रखने को तैयार है. ईरान 5 साल तक अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम सस्पेंड करने को तैयार है. लेकिन अमेरिका इसे छीनने या पूरी तरह हटाने पर अड़ा है. होर्मुज ब्लॉकेड इसी मुद्दे से जुड़ा है. अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ.

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ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम रूस रखने को तैयार है. लेकिन अमेरिका छीनने को तैयार है. (Photo: Getty) ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम रूस रखने को तैयार है. लेकिन अमेरिका छीनने को तैयार है. (Photo: Getty)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर है. होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसैनिक ब्लॉकेड शुरू हो चुका है. इसी बीच दुनिया का ध्यान ईरान के परमाणु बम बनाने वाले कच्चे माल यानी एनरिच्ड यूरेनियम पर टिका हुआ है. ईरान के पास करीब 450 किलो 60 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम है जो हफ्तों में हथियार ग्रेड बन सकता है. 10 से ज्यादा परमाणु बम बनाने लायक मैटेरियल ईरान के पास पड़ा है.  

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अब सवाल यह है कि यह यूरेनियम किसके हवाले होगी? रूस इसे रखने को तैयार है, ईरान 5 साल के लिए अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम सस्पेंड करने को तैयार है, लेकिन अमेरिका इसे छीनने या पूरी तरह हटाने पर अड़ा हुआ है. यह मुद्दा पाकिस्तान में हुई हालिया शांति बातचीत के टूटने और होर्मुज ब्लॉकेड का मुख्य कारण भी है. 

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ईरान का एनरिच्ड यूरेनियम क्या है?

ईरान लंबे समय से कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ बिजली और मेडिकल के लिए है, लेकिन अमेरिका और इजरायल इसे परमाणु हथियार बनाने की तैयारी मानते हैं. ईरान के पास 60 प्रतिशत तक एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक है. सामान्य बिजली प्लांट के लिए 3-5 प्रतिशत एनरिचमेंट काफी होता है, लेकिन 90 प्रतिशत से ऊपर पहुंचते ही यह बम बनाने लायक हो जाता है.

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ईरान का यह स्टॉक हथियार ग्रेड तक पहुंचने में सिर्फ कुछ हफ्ते लगाएगा. यही वजह है कि अमेरिका इसे परमाणु धूल कहकर पूरी तरह हटाना चाहता है. बिना इस स्टॉक के ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई साल पीछे चला जाएगा. इसी स्टॉक को लेकर अब रूस, ईरान और अमेरिका के बीच डिप्लोमेसी का बड़ा खेल चल रहा है.

रूस क्यों तैयार है ईरान का यूरेनियम रखने को?

रूस ने सोमवार 13 अप्रैल 2026 को फिर से अपना ऑफर दोहराया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही अमेरिका और क्षेत्रीय देशों से बात कर चुके हैं. रूस ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को अपने यहां सुरक्षित रखने को तैयार है. 

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रूस का कहना है कि यह शांति समझौते का हिस्सा हो सकता है. रूस दुनिया में सबसे ज्यादा परमाणु हथियार रखने वाला देश है और ईरान का पुराना दोस्त भी. रूस को लगता है कि अगर वह यह सामग्री रख ले तो ईरान-अमेरिका युद्ध रुक सकता है. रूस की मध्यस्थ की भूमिका मजबूत हो जाएगी. रूस ने स्पष्ट किया कि ऑफर अब भी टेबल पर है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. 

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ईरान 5 साल सस्पेंड करने को क्यों तैयार?

ईरान ने पाकिस्तान में हुई बातचीत के बाद सोमवार को औपचारिक जवाब दिया। उसने कहा कि वह अपना यूरेनियम एनरिचमेंट प्रोग्राम 5 साल के लिए रोकने को तैयार है. साथ ही अपने मौजूदा स्टॉक को काफी हद तक डायलूट करने को भी तैयार है. 

ईरान जानता है कि अमेरिका 20 साल या उससे ज्यादा समय तक सस्पेंड करने की मांग कर रहा है. इसलिए ईरान ने 5 साल का ऑफर रखकर समझौते की गुंजाइश छोड़ी है. ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता, लेकिन अपना सिविलियन प्रोग्राम छोड़ने को भी तैयार नहीं. 5 साल का सस्पेंड ईरान को समय देगा और ब्लॉकेड हटवाने में मदद कर सकता है. 

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अमेरिका क्यों छीनने या हटाने को तैयार?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी टीम ने ईरान के 5 साल के ऑफर को ठुकरा दिया. अमेरिका 20 साल या उससे ज्यादा समय तक कोई एनरिचमेंट नहीं चाहता. वह ईरान के सारे एनरिच्ड यूरेनियम को बाहर निकलवाना चाहता है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि बिना स्टॉक हटाए और बिना स्थायी रोक के कोई समझौता नहीं होगा. 

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अमेरिका को डर है कि अगर यूरेनियम ईरान के पास रहा तो कुछ हफ्तों में ही बम बन सकता है. इसलिए अमेरिका ने होर्मुज ब्लॉकेड लगाकर दबाव बनाया है. अमेरिका का मानना है कि सिर्फ रूस के पास भेजकर या 5 साल रोककर खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होगा.

न्यूक्लियर बातचीत का सीधा कनेक्शन

पाकिस्तान में हुई लंबी बातचीत रविवार को टूट गई. मुख्य अड़चन यही यूरेनियम और एनरिचमेंट की समय सीमा थी. ट्रंप ने तुरंत होर्मुज स्ट्रेट पर ब्लॉकेड लगाने का ऐलान कर दिया. अब अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों आने-जाने वाले जहाजों को रोक रही है. ईरान ने भी जवाबी धमकी दी है. इस ब्लॉकेड का सीधा मकसद ईरान को न्यूक्लियर स्टॉक सौंपने और लंबे सस्पेंड के लिए मजबूर करना है. रूस इस बीच मध्यस्थ बनकर दोनों पक्षों को समझौते की तरफ ले जाना चाहता है.

फिलहाल कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा. रूस का ऑफर अभी खुला है, लेकिन अमेरिका ने इसे पहले भी ठुकराया था. ईरान 5 साल से ज्यादा देने को तैयार नहीं, जबकि अमेरिका 20 साल या स्थायी समाधान चाहता है. अगर रूस के पास सामग्री चली गई तो ईरान को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अमेरिका इसे स्वीकार नहीं करेगा. होर्मुज ब्लॉकेड जारी रहा तो तेल की कीमतें और बढ़ेंगी. पूरी दुनिया प्रभावित होगी.

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