अमेरिका के पास बचा है क्लस्टर बम का 'बाप', ईरान पर अब तक ये वेपन नहीं हुए इस्तेमाल

ईरान युद्ध में अमेरिका ने अब तक टोमाहॉक, JASSM-ER और GBU-57 जैसे हथियार इस्तेमाल किए, लेकिन AGM-183 ARRW, Dark Eagle, Rapid Dragon, GBU-72 और MOAB अभी पूरी तरह नहीं तैनात नहीं किए है. ये हाइपरसोनिक मिसाइलें और भारी बंकर बस्टर हैं जो ईरान के गहरे अंडरग्राउंड बंकरों को कुछ ही मिनटों में तबाह कर सकते हैं. क्या ट्रंप अब इन घातक हथियारों को निकालेंगे?

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ये है अमेरिका रैपिड ड्रैगन मिसाइल सिस्टम. इसे अब तक अमेरिका ने इस्तेमाल नहीं किया है. (Photo: Wikipedia) ये है अमेरिका रैपिड ड्रैगन मिसाइल सिस्टम. इसे अब तक अमेरिका ने इस्तेमाल नहीं किया है. (Photo: Wikipedia)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

अप्रैल 2026 में अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान का युद्ध तेजी से चल रहा है. अमेरिका ने अब तक टोमाहॉक मिसाइल, JASSM-ER क्रूज मिसाइल, GBU-57 MOP बंकर बस्टर और GBU-72 जैसे हथियारों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है. MOAB (GBU-43) यानी मदर ऑफ ऑल बॉम्ब का भी कुछ हमलों में इस्तेमाल हुआ है. इनसे ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल फैक्टरियां और अंडरग्राउंड बंकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. 

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लेकिन अब भी अमेरिका के पास कुछ ऐसे अत्याधुनिक हथियार हैं जो ईरान के खिलाफ बिल्कुल नहीं इस्तेमाल किए गए हैं. ये हथियार हाइपरसोनिक स्पीड, खास बंकर भेदने की क्षमता और बड़े पैमाने पर हमला करने की ताकत रखते हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार कहा है कि अगर ईरान नहीं माना तो और ज्यादा शक्तिशाली हमले होंगे. सवाल ये है कि क्या ट्रंप अब इन रिजर्व हथियारों को निकालेंगे?

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AGM-183 ARRW – हाइपरसोनिक एयर-लॉन्च्ड रैपिड रिस्पॉन्स वेपन

AGM-183 ARRW अमेरिका की एयर फोर्स की सबसे तेज हाइपरसोनिक मिसाइल है. यह 6000 किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से उड़ सकती है. इसका वजन करीब 3000 किलो है. यह 1000 से 1500 किलोमीटर तक मार कर सकती है. यह B-52H, B-1B या F-15E जैसे प्लेन से लॉन्च होती है.  

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रॉकेट बूस्टर इसे ऊंचाई पर ले जाता है, फिर ग्लाइड बॉडी अलग होकर दुश्मन की एयर डिफेंस को चकमा देते हुए अनप्रेडिक्टेबल तरीके से टारगेट पर गिरती है. ईरान युद्ध में इसका एक भी इस्तेमाल नहीं हुआ क्योंकि यह अभी पूरी तरह ऑपरेशनल नहीं है. टेस्टिंग चल रही है. कुछ पुरानी समस्याओं के बाद इसे फिर से तैयार किया जा रहा है. 

अगर ट्रंप इसे इस्तेमाल करते हैं तो ईरान के गहरे न्यूक्लियर बंकर या मिसाइल कमांड सेंटर्स को कुछ ही मिनटों में तबाह कर सकते हैं. यह हथियार बहुत महंगा यानी 15-20 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल है, इसलिए इसे सिर्फ सबसे महत्वपूर्ण और समय-संवेदनशील टारगेट्स के लिए बचाकर रखा गया है.

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Dark Eagle (LRHW) – लॉन्ग रेंज हाइपरसोनिक वेपन

Dark Eagle, जिसे Long-Range Hypersonic Weapon (LRHW) भी कहते हैं, अमेरिकी आर्मी का ग्राउंड-लॉन्च्ड हाइपरसोनिक सिस्टम है. यह ट्रक-माउंटेड लॉन्चर से छूटती है. इसकी रेंज 1700 से 3500 किलोमीटर तक है, यानी ईरान के किसी भी हिस्से को आसानी से निशाना बना सकती है. 

यह बूस्ट-ग्लाइड टेक्नोलॉजी पर काम करती है – रॉकेट ऊपर ले जाता है. फिर हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल तेजी से और घुमावदार रास्ते से टारगेट की तरफ बढ़ता है. दुश्मन के रडार और इंटरसेप्टर इसे पकड़ नहीं पाते. अभी तक ईरान युद्ध में इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है. इसे मुख्य रूप से चीन या रूस जैसे बड़े दुश्मनों के खिलाफ रिजर्व रखा गया है. 

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मार्च 2026 में इसे ऑस्ट्रेलिया में एक्सरसाइज के लिए भेजा गया था, लेकिन ईरान में नहीं. अगर ट्रंप इसे अब इस्तेमाल करते हैं तो ईरान की पूरी मिसाइल प्रोडक्शन फैक्टरियां या लीडरशिप बंकर एक साथ नष्ट हो सकते हैं. यह हथियार बहुत जटिल है. अभी सीमित संख्या में उपलब्ध है.

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Rapid Dragon – पैलेटाइज्ड क्रूज मिसाइल सिस्टम

Rapid Dragon अमेरिकी एयर फोर्स का एक अनोखा और स्मार्ट सिस्टम है जो किसी भी सामान्य कार्गो प्लेन (C-130 या C-17) को अस्थायी मिसाइल लॉन्चर बना देता है. इसमें JASSM-ER या दूसरे क्रूज मिसाइलों को पैलेट पर लोड किया जाता है. प्लेन से पैलेट गिराया जाता है. हवा में पैलेट खुलता है और मिसाइलें अपने टारगेट की ओर उड़ जाती हैं. 

यह सिस्टम बिना किसी खास मॉडिफिकेशन के सैकड़ों मिसाइलें एक साथ लॉन्च करने की ताकत देता है. ईरान युद्ध में इसका कोई इस्तेमाल रिपोर्ट नहीं हुआ है क्योंकि अमेरिका ने JASSM-ER को सीधे बॉम्बर्स (B-52, B-1B) से लॉन्च किया. Rapid Dragon को बड़े पैमाने पर और कम खर्च में हमला करने के लिए रखा गया है.

अगर ट्रंप इसे अब निकालते हैं तो अमेरिका बिना पायलट रिस्क के सैकड़ों स्टेल्थ क्रूज मिसाइलें ईरान पर एक साथ दाग सकता है. यह सिस्टम बहुत फ्लेक्सिबल है और दुश्मन को चौंकाने वाला है.

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न्यूक्लियर ऑप्शन्स – परमाणु हथियार

अमेरिका के पास B61, B83 और W87 जैसे परमाणु हथियार हैं जो बहुत ज्यादा घातक हैं. लेकिन ईरान युद्ध में इनका इस्तेमाल बिल्कुल नहीं हुआ है और न ही ट्रंप ने इसका कोई संकेत दिया है. न्यूक्लियर हथियार इस्तेमाल करने का मतलब पूरा क्षेत्रीय युद्ध विश्व युद्ध में बदल सकता है. 

अमेरिका अभी कन्वेंशनल (नॉन-न्यूक्लियर) हथियारों से ही काम चला रहा है. ट्रंप ने कहा है कि ईरान को न्यूक्लियर वेपन नहीं बनाने देंगे, लेकिन न्यूक्लियर ऑप्शन सिर्फ आखिरी और सबसे खतरनाक कदम होगा.

क्या ट्रंप अब इन हथियारों को निकालेंगे?

ट्रंप प्रशासन ईरान की मिसाइल और न्यूक्लियर क्षमता को पूरी तरह खत्म करने पर जोर दे रहा है. JASSM-ER और GBU-72 जैसे हथियारों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है. इसलिए अब ARRW, Dark Eagle और Rapid Dragon जैसे रिजर्व हथियारों की बारी आ सकती है. ये हथियार न सिर्फ ज्यादा घातक हैं बल्कि दुश्मन को यह मैसेज भी देते हैं कि अमेरिका के पास और भी शक्तिशाली विकल्प हैं. 

अगर ईरान जवाबी हमले जारी रखता है या ट्रंप का 48 घंटे का अल्टीमेटम मानने से इनकार करता है तो इन हथियारों का इस्तेमाल हो सकता है. ये हथियार युद्ध को और बढ़ा सकते हैं लेकिन अमेरिका को तेज और निर्णायक जीत दिला सकते हैं. 

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