चीन ने अपने पूर्वी तट के पास येलो सी और ईस्ट चाइना सी में बहुत बड़ा हवाई क्षेत्र 40 दिनों के लिए रिजर्व कर लिया है. यह क्षेत्र 25900 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा बड़ा है, जो ताइवान के मुख्य द्वीप से भी बड़ा है. यह नोटिस 27 मार्च से 6 मई 2026 तक के लिए जारी किया गया है.
आमतौर पर चीन सैन्य अभ्यास के लिए कुछ दिनों का ही नोटिस जारी करता है, लेकिन इस बार 40 दिन का समय बहुत लंबा और असामान्य है. चीन ने इसकी कोई वजह नहीं बताई है. इससे जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में चिंता बढ़ गई है. एक्सपर्ट का कहना है कि यह लंबा समय सैन्य तैयारियों या लंबे अभ्यास के लिए हो सकता है.
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ताइवान में बढ़ रही है चिंता और तैयारी
चीन की बढ़ती मिलिटरी एक्टिविटी से ताइवान अब परेशान हो रहा है. ताइवान ने अपनी रक्षा पर खर्च बढ़ा दिया है, अनिवार्य सैन्य सेवा को एक साल तक बढ़ा दिया है. अपनी लड़ाई की तैयारियों को नया रूप दिया है. राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने 40 बिलियन डॉलर का विशेष रक्षा बजट प्रस्ताव रखा है ताकि अमेरिका से हथियार खरीदे जा सकें.
लेकिन संसद में विपक्षी दलों के विरोध के कारण यह बजट अभी अटका हुआ है. अमेरिकी सीनेटर ताइवान आए और ताइवान की संसद से अपील की कि वे जल्दी इस बजट को पास करें. ताइवान जानता है कि अगर चीन हमला करता है तो उसे खुद लड़ना होगा.
कुछ ताइवानी लोग प्लान बी बना रहे हैं
ताइवान के कई लोग अब जंग की आशंका में दूसरा प्लान बना रहे हैं. 51 साल के नेल्सन येह फाइनेंस में काम करते हैं. उन्होंने तीन साल पहले सिंगापुर में बैंक अकाउंट खोला और अपनी संपत्ति का एक पांचवां हिस्सा विदेश भेज दिया. फिर उन्होंने तुर्की की नागरिकता के लिए आवेदन किया. नौ महीने बाद खुद और पत्नी के लिए सेकेंडरी पासपोर्ट ले लिया.
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उनका कहना है कि युद्ध की संभावना कम है, लेकिन अगर हो गया तो नुकसान बहुत बड़ा होगा इसलिए प्लान बी जरूरी है. अब मध्य पूर्व में अमेरिका की जंग से दुनिया की स्थिति और अनिश्चित हो गई है. येह कहते हैं कि एकतरफा दुनिया टूट रही है और कोई एक महाशक्ति सब नियंत्रित नहीं कर सकती.
नेल्सन येह को यह आइडिया हांगकांग के दोस्तों से मिला. हांगकांग में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के बाद लाखों लोग वहां से चले गए. 2019 के प्रो-डेमोक्रेसी प्रदर्शनों में नारा था - आज हांगकांग, कल ताइवान. 2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद नया नारा आया - आज यूक्रेन, कल ताइवान.
कुछ ताइवानी लोग अब फर्स्ट एड, मार्क्समैनशिप और सिविल डिफेंस की ट्रेनिंग ले रहे हैं. इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स कहते हैं कि राजनीतिक अनिश्चितता के कारण विदेश जाने की पूछताछ बढ़ गई है.
संपत्ति और पासपोर्ट खरीदने का ट्रेंड
थाईलैंड में ताइवानी रियल एस्टेट एजेंट एडवर्ड लाई कहते हैं कि अब उनके क्लाइंट्स में 70% ताइवानी हैं जो भू-राजनीति से चिंतित हैं. कंबोडिया में संपत्ति खरीदने वाले 67 साल के कुओ कहते हैं कि उन्होंने दस साल पहले निवेश के लिए शुरू किया लेकिन अब सुरक्षा के लिए भी है. वे शी जिनपिंग के कार्यकाल में ताइवान का मुद्दा सुलझने की उम्मीद करते हैं लेकिन आक्रामक तरीके से. कई लोग मलेशिया, पुर्तगाल, माल्टा जैसे देशों को बैकअप के रूप में देख रहे हैं क्योंकि युद्ध में एयरपोर्ट सबसे पहले निशाना बन सकता है.
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लड़ना या भागना – ताइवान का सवाल
रूस-यूक्रेन जंग से ताइवान ने सीखा कि सिविल रेसिस्टेंस बहुत महत्वपूर्ण है. अगर ताइवानी लोग लड़ने की इच्छा छोड़ दें तो चीन को हमला करने की जरूरत नहीं पड़ सकती. सर्वे दिखाते हैं कि ताइवान की रक्षा के लिए लड़ने की इच्छा 15% से 80% तक रहती है. 2025 के सर्वे में 37% ने कहा कि जो होगा देखेंगे. 11% भागना चाहते हैं. 20% लड़ना या सेना जॉइन करना चाहते हैं. ताइवान सरकार ने सिविल डिफेंस कमिटी बनाई है. इमरजेंसी के लिए गाइड लाइन जारी किए हैं.
अमेरिका ताइवान की सुरक्षा में बहुत रुचि रखता है क्योंकि ताइवान चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने में रणनीतिक महत्व रखता है. अमेरिका ताइवान को आत्मरक्षा के हथियार बेचने के लिए बाध्य है लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ नहीं किया कि वो चीन के हमले पर सैन्य मदद भेजेंगे या नहीं. डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग मई में मुलाकात करेंगे जहां ताइवान पर चर्चा हो सकती है.
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ताइवान में अभी बड़े पैमाने पर लोग बाहर नहीं जा रहे हैं लेकिन लोग सुरक्षा की भावना चाहते हैं. इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स कहते हैं कि पहले लोग अमेरिका या कनाडा जाना चाहते थे लेकिन अब लक्ष्य है जोखिम बांटना और संपत्ति है. लोग कहते हैं कि अगर युद्ध हुआ तो पासपोर्ट और पैसे से बाहर निकलना आसान होगा, बाकी सब नियंत्रण से बाहर है. चीन की 40 दिन की हवाई क्षेत्र बंदी और बढ़ती तनाव से ताइवान के लोग सतर्क हो गए हैं.
ऋचीक मिश्रा