तुर्की ले आया समंदर का 'दैत्य', चीन के टक्कर का है जहाजों को नष्ट करने वाला TAYFUN Block-3

तुर्की ने TAYFUN Block-3 मिसाइल का सफल टेस्ट किया. यह हाइपरसोनिक स्पीड से चलकर मूविंग जहाज को नष्ट कर सकती है. इससे तुर्की चीन के DF-21D जैसी मिसाइल रखने वाले देशों के एलीट ग्रुप में शामिल हो गया.

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तुर्की की टायफुन ब्लॉक-3 मिसाइल का सफल परीक्षण काला सागर में किया. (Screengrab: X/@mintelworld) तुर्की की टायफुन ब्लॉक-3 मिसाइल का सफल परीक्षण काला सागर में किया. (Screengrab: X/@mintelworld)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

तुर्की की प्रमुख डिफेंस कंपनी Roketsan ने ब्लैक सी में TAYFUN Block-3 मिसाइल का लाइव फायर टेस्ट किया. इस मिसाइल ने हाइपरसोनिक टर्मिनल स्पीड हासिल की और एक अनमैन्ड सरफेस वेसल (USV) को पूरी तरह नष्ट कर दिया. तुर्की के अधिकारियों ने इसे सर्जिकल प्रिसीजन बताया. 

इस सफल परीक्षण के साथ तुर्की अब उन चुनिंदा देशों की एलीट क्लब में शामिल हो गया है, जो लैंड-बेस्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से चलते-फिरते युद्धपोतों को निशाना बना सकते हैं. इस क्लब में सबसे आगे चीन है, जिसके DF-21D मिसाइल को कैरियर किलर कहा जाता है.

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TAYFUN सीरीज तुर्की की स्वदेशी बैलिस्टिक मिसाइल है. Block-3 इसका एडवांस्ड वर्जन है, जिसे खास तौर पर एंटी-शिप रोल के लिए विकसित किया गया है. मिसाइल लॉन्च होने के बाद हाइपरसोनिक स्पीड तक पहुंच जाती है, खासकर टारगेट के पास. 

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इतनी तेज स्पीड की वजह से दुश्मन के पास इसे रोकने का समय बहुत कम रह जाता है. टेस्ट में इसने मूविंग टारगेट को सटीक रूप से नष्ट किया, जो ASBM टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी चुनौती होती है. इससे साबित होता है कि तुर्की अब लंबी दूरी से समुद्री लक्ष्यों को मारने में सक्षम हो गया है.

दुनिया में ASBM टेक्नोलॉजी का महत्व

एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल बहुत खास हथियार है. सामान्य क्रूज मिसाइलों की तुलना में ये ज्यादा तेज, लंबी रेंज वाली और रोकना मुश्किल होती हैं. ये जमीन से लॉन्च होती हैं और समुद्र में चल रहे एयरक्राफ्ट कैरियर या युद्धपोतों को निशाना बनाती हैं. चीन का DF-21D इस क्षेत्र में अग्रणी है, जिसने अमेरिकी नौसेना को इंडो-पैसिफिक में चिंता में डाला हुआ है. अब तुर्की भी इस क्लब में शामिल हो गया है. 

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रूस, ईरान और कुछ अन्य देश भी इस दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन सफल टेस्ट के साथ तुर्की ने बड़ा कदम आगे बढ़ा लिया है. पहले तुर्की दूसरे देशों से हथियार खरीदता था, लेकिन अब वो खुद विकसित कर रहा है. TAYFUN Block-3 का सफल टेस्ट तुर्की की मिसाइल टेक्नोलॉजी में उल्लेखनीय छलांग है. इससे तुर्की की नौसेना की ताकत बढ़ेगी और ब्लैक सी, भूमध्य सागर तथा अन्य क्षेत्रों में उसकी रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी.

रणनीतिक प्रभाव: ब्लैक सी और उससे आगे

ब्लैक सी में यह टेस्ट बहुत महत्वपूर्ण है. यहां रूस, यूक्रेन और NATO देशों के बीच तनाव बना हुआ है. TAYFUN Block-3 जैसी मिसाइल तुर्की को समुद्री खतरे से निपटने में मदद करेगी. यह मिसाइल दुश्मन के एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप को दूर से ही खतरे में डाल सकती है. इससे क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित होगा और तुर्की अपनी समुद्री सीमाओं की बेहतर सुरक्षा कर सकेगा.

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हालांकि TAYFUN Block-3 का टेस्ट सफल रहा, लेकिन ASBM टेक्नोलॉजी को पक्का बनाने में कई चुनौतियां हैं. मूविंग टारगेट को सटीक ढंग से ट्रैक करना, री-एंट्री के दौरान गर्मी से बचाना और इंटरसेप्शन से बचना आसान नहीं है. तुर्की को अब बड़े पैमाने पर उत्पादन, इंटीग्रेशन और निर्यात पर काम करना होगा. अगर तुर्की इसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाता है तो वो वैश्विक हथियार बाजार में मजबूत खिलाड़ी बन सकता है.

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तुर्की का यह कदम दिखाता है कि एशिया और यूरोप के कई देश अब एडवांस मिसाइल टेक्नोलॉजी में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. चीन के बाद तुर्की का शामिल होना ASBM टेक्नोलॉजी को और व्यापक बनाएगा. इससे समुद्री युद्ध की रणनीतियां बदल सकती हैं. बड़े देशों की नौसेनाओं को लंबी दूरी के खतरे का सामना करना पड़ेगा. तुर्की के इस उपलब्धि ने वैश्विक डिफेंस परिदृश्य को और रोचक बना दिया है.

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