ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत की तरफ से पाकिस्तान के खिलाफ एक ऐतिहासिक सैन्य कार्रवाई थी. पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकियों के ठिकानों पर मिसाइल और एयर स्ट्राइक्स किए. इस ऑपरेशन में ब्रह्मोस, स्कैल्प, हैमर जैसी मिसाइलें और स्वदेशी ड्रोन-एयर डिफेंस सिस्टम ने कमाल दिखाया.
ऑपरेशन खत्म होने के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ी रणनीति अपनाई - अगले एक साल में हथियारों की खरीद, अपग्रेड और नए सिस्टम को तेजी से शामिल करना. इस एक साल (मई 2025 से अप्रैल 2026 तक) में भारत ने अपने वेपन सिस्टम को पहले से ज्यादा ताकतवर बनाने के लिए बड़े-बड़े कदम उठाए.
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सरकार ने इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट पावर का इस्तेमाल किया. डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने कई प्रस्तावों को मंजूरी दी. कुल मिलाकर सैकड़ों करोड़ रुपये के हथियार खरीदे गए. मौजूदा सिस्टम को अपडेट किया गया. आइए समझते हैं कि भारत ने कितने नए हथियार जोड़े. कितने मॉडिफाई किए.
ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा खरीद में तेजी क्यों आई?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के चाइनीज एयर डिफेंस सिस्टम को भारतीय हथियारों ने नेस्तनाबूद कर दिया. लेकिन इस लड़ाई से एक बात साफ हो गई कि भविष्य के युद्ध में ड्रोन, लॉन्ग रेंज मिसाइल, एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की जरूरत और बढ़ जाएगी. इसलिए जुलाई 2025 में ही DAC ने करीब 1.05 लाख करोड़ रुपये के 10 बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी.
इसमें आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सरफेस-टू-एयर मिसाइल और ट्राई-सर्विस इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम शामिल थे. इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के हथियार सीधे खरीदे गए. दिसंबर 2025 तक और 8.78 बिलियन डॉलर (73,000 करोड़ रुपये) के और प्रस्ताव पास हो चुके थे. ये सब कदम इसलिए उठाए ताकि सेना की तैयारी किसी भी समय किसी भी दुश्मन से निपटने लायक हो.
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एक साल में कितने नए हथियार जोड़े गए?
इस एक साल में भारत ने कई नए हथियार सिस्टम अपनी सेना, नौसेना और वायुसेना में शामिल किए. सटीक संख्या तो गोपनीय होती है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्य रूप से ये बड़े सिस्टम जोड़े गए...
कुल मिलाकर इस एक साल में 15-20 बड़े नए वेपन सिस्टम या उनके बैच सेना में शामिल हो चुके हैं. ये सब स्वदेशी या जॉइंट वेंचर प्रोजेक्ट से लिए गए, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ी.
मौजूदा हथियारों में कितने मॉडिफिकेशन किए गए?
नए हथियार जोड़ने के साथ-साथ पुराने सिस्टम को अपडेट करना भी बहुत जरूरी था. इस एक साल में भारत ने करीब 10-12 प्रमुख सिस्टम को मॉडिफाई किया ताकि वे और ज्यादा पावरफुल और आधुनिक हो जाएं...
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ये मॉडिफिकेशन इसलिए किए गए ताकि पुराने हथियार भी ऑपरेशन सिंदूर जैसी लड़ाई में और बेहतर परफॉर्म कर सकें. कुल मिलाकर इस एक साल में 8-10 प्रमुख प्लेटफॉर्म को अपग्रेड किया गया.
स्वदेशी हथियारों पर सबसे ज्यादा जोर
इस पूरे साल में सबसे बड़ी बात ये रही कि ज्यादातर खरीद और मॉडिफिकेशन मेड इन इंडिया या इंडियन-डिजाइन कैटेगरी में हुए. ब्रह्मोस, पिनाका, आकाश, तेजस, नागास्त्र ड्रोन जैसी चीजें अब दुनिया भर में मांग में हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय हथियारों की वैश्विक डिमांड बढ़ गई, जिससे निर्यात भी बढ़ा.
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ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भारत का वेपन सिस्टम पहले से कहीं ज्यादा तैयार है. नए हथियार जोड़ने और पुराने को अपडेट करने से तीनों सेनाओं की फायरपावर, एयर डिफेंस, ड्रोन वारफेयर और नेवल स्ट्राइक क्षमता में भारी इजाफा हुआ है. ये बदलाव सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि रियल टेस्ट और ट्रेनिंग में भी दिख रहे हैं. देश की सुरक्षा के लिए ये एक साल यादगार रहा, क्योंकि अब कोई भी दुश्मन सोच-समझकर ही कदम बढ़ाएगा.
ऋचीक मिश्रा