अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर साइट पर सबसे बड़ा-गैर परमाणु बम गिराया... सैटेलाइट Photo

अमेरिका ने ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में टालेगन-2 परमाणु स्थल पर GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बम गिराया. यह 13607 किलोग्राम का सबसे बड़ा गैर-परमाणु बम है, जो बी2 बॉम्बर से गिराया गया. सैटेलाइट तस्वीरों में तीन बड़े छेद दिखे. IAEA ने यहां परमाणु हथियार परीक्षण के सबूत पाए थे.

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ये सैटेलाइट इमेज दिखा रही है कि कैसे ईरान के न्यूक्लियर साइट पर तीन बड़े छेद हुए हैं. (Photo: Vantor) ये सैटेलाइट इमेज दिखा रही है कि कैसे ईरान के न्यूक्लियर साइट पर तीन बड़े छेद हुए हैं. (Photo: Vantor)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 12 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

अमेरिका ने हाल ही में ईरान के एक महत्वपूर्ण सैन्य स्थल पर अपना सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम गिराया है. यह बम ईरान के परमाणु हथियार बनाने की संभावित जगह पर गिराया गया. इस घटना ने युद्ध को नया मोड़ दे दिया है. ये युद्ध सिर्फ तेल या क्षेत्रीय ताकत का नहीं रहा, बल्कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का हो गया है. 

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क्या हुआ है?

9-10 मार्च को ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में टालेगन-2 नाम की जगह पर हमला हुआ. सैटेलाइट तस्वीरों में बड़ा नुकसान दिख रहा है. अमेरिकी थिंक टैंक जैसे मिडलबरी इंस्टीट्यूट और इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी (ISIS) के विशेषज्ञ डेविड अल्ब्राइट ने कहा कि तीन बड़े छेद दिख रहे हैं. 

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ये छेद GBU-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बम से मेल खाते हैं. जो 200 फीट तक कंक्रीट में घुसकर फटता है. यह बम सिर्फ बी2 बॉम्बर से गिराया जा सकता है. बी2 मिसौरी के व्हाइटमैन एयर फोर्स बेस से उड़ा, ईरान पहुंचा और वापस लौटा – कुल 25,000 किलोमीटर का सफर.

टालेगन-2 जगह क्या है?

पारचिन तेहरान के पास एक बड़ा सैन्य परिसर है. टालेगन-2 इसमें एक गुप्त जगह है. IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की रिपोर्ट में कहा गया कि यहां हाइड्रोडायनामिक प्रयोग हुए, जो परमाणु हथियार के लिए जरूरी हैं. ये प्रयोग हाई-एक्सप्लोसिव से प्लूटोनियम या यूरेनियम को दबाने के लिए होते हैं.

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2015 में IAEA ने यहां जांच की तो मानव-निर्मित यूरेनियम के कण मिले. ईरान ने बाद में जांच रोकी और जगह साफ की, जिससे IAEA ने कहा कि सत्यापन मुश्किल हो गया. 2018 में इजरायल ने ईरान के अमाद प्लान के 55,000 पेज जारी किए, जिसमें पारचिन का जिक्र है. ईरान हमेशा कहता है कि यह सैन्य जगह है, परमाणु नहीं. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यहां परमाणु हथियार विकास हुआ.

यह बम क्यों खास है?

GBU-57 को ओबामा सरकार में ईरान के गहरे भूमिगत परमाणु स्थलों के लिए बनाया गया था. यह बहुत भारी है, ज्यादातर फाइटर प्लेन इसे नहीं उठा सकते. सिर्फ बी2 ही इसे ले जा सकता है. अब इस बम का इस्तेमाल ईरान के टालेगन-2 पर हुआ, जो IAEA 15 साल से जांचना चाहती थी और ईरान छिपाता रहा.

युद्ध का नया मोड़

पहले युद्ध सुप्रीम लीडर पर हमले, तेल और क्षेत्रीय ताकत का था. अब परमाणु क्षेत्र में पहुंच गया. हमले से ईरान को लग सकता है कि उसका परमाणु विकल्प खत्म हो गया है. अगर ऐसा हुआ तो दो रास्ते: सरेंडर या गुप्त जगहों पर तेजी से परमाणु हथियार बनाना. खुफिया एजेंसियां कहती हैं कि ईरान का शासन अभी नहीं गिरा. उसके 31 कमांडो ग्रुप काम कर रहे हैं. लगातार हमले हो रहे हैं.

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अगर ईरान सोचे कि परमाणु सुरक्षा खत्म हो गई, तो वह गुप्त साइट्स पर काम तेज कर सकता है. यह दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है. इजरायल और दूसरे देश जो सोचते थे कि ईरान महीनों में परमाणु हथियार बना सकता है. हमला डिटरेंट खत्म कर सकता है, जिससे ईरान तेजी से हथियार बनाने की कोशिश करे.

हालात कितने गंभीर हैं?

छह दिनों में युद्ध पर 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से रोज 138 की जगह सिर्फ 8 टैंकर गुजर रहे हैं. ओमान का बंदरगाह जल रहा है. लेकिन खुफिया रिपोर्ट कहती है कि ईरान का शासन स्थिर है.

यह युद्ध अब तेल का नहीं रहा. अब यह परमाणु भौतिकी का है. और भौतिकी समझौता नहीं करती. यह घटना दिखाती है कि अमेरिका और इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म करने के लिए कितने गंभीर हैं.

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