अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब बहुत बढ़ गया है. ईरान पिछले कई दिनों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर हमले कर रहा है. ईरान की फास्ट बोट्स और मिसाइलों की वजह से यहां से गुजरने वाले जहाजों की संख्या पिछले साल एक हजार से ज्यादा थी लेकिन अब सिर्फ 70-80 रह गई है.
अमेरिका ने पहले ही खार्ग आइलैंड पर हवाई हमले कर दिए थे लेकिन अब जमीन पर सैनिक उतारने की तैयारी दिख रही है. ट्रंप सरकार ने अभी तक ईरान में सैनिक भेजने के ऑप्शन को खारिज नहीं किया है.
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ऐसे में सिंगापुर के पास ट्रैक हुए अमेरिकी युद्धपोत यूएसएस ट्रिपोली की खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है, क्योंकि इसमें 2500 मरीन्स सवार हैं. यह जहाज तेजी से मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ रहा है.
यूएसएस ट्रिपोली युद्धपोत और उसकी खासियत
यूएसएस ट्रिपोली एक अमेरिका क्लास एम्फीबियस असॉल्ट शिप है जो सैनिकों को समुद्र से जमीन पर उतारने का काम करता है. यह जापान के ओकिनावा से निकला था. अब सिंगापुर के पास से ट्रैक किया गया है.
इसमें 31st मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के करीब दो हजार पांच सौ मरीन्स हैं जिन्हें फोर्स 911 भी कहा जाता है. यह यूनिट कोई साधारण सैनिक नहीं बल्कि पूरी तरह से खुद के साथ हथियार, तोपखाना, एम्फीबियस वाहन, F-35 फाइटर जेट्स और अटैक हेलीकॉप्टर ले कर चलती है.
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जहाज को मिनी एयरक्राफ्ट कैरियर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है. यह इकाई रात में भी तेजी से हमला कर सकती है. खुद को सपोर्ट कर सकती है. ऐसे में यह जहाज होर्मुज की खाड़ी पहुंचने पर ईरान के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गया है क्योंकि यह सैनिकों को सीधे द्वीपों पर उतार सकता है.
मिशन क्या हो सकता है और खार्ग आइलैंड का महत्व
अमेरिका का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कंट्रोल हासिल करना है ताकि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की मिसाइलें और ड्रोन से दुनिया का सबसे जरूरी तेल रास्ता सुरक्षित हो सके. खार्ग आइलैंड ईरान की आर्थिक जान है जहां से उसका नब्बे प्रतिशत तेल निर्यात होता है.
अगर अमेरिका यहां सैनिक उतारता है तो ईरान का पूरा तेल व्यापार ठप हो सकता है. इसके अलावा मरीन्स यूरेनियम के स्टॉक को सुरक्षित करने या अंदरूनी विरोधी गुटों के साथ मिलकर ईरान की सरकार को गिराने का काम भी कर सकते हैं. CIA और मोसाद के साथ मिलकर यह फोर्स अंदरूनी विद्रोह भी भड़का सकती है.
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अभी तक यह सिर्फ डिटरेंस है लेकिन ट्रंप का कहना है कि सभी ऑप्शन टेबल पर हैं. खार्ग आइलैंड पर कब्जा करने से ईरान की कमर टूट सकती है. पूरा क्षेत्र अमेरिका के नियंत्रण में आ सकता है.
अगर मरीन्स खार्ग आइलैंड पर हमला करें तो युद्ध का सीनैरियो क्या होगा
अगर ये मरीन्स खार्ग आइलैंड पर हमला करते हैं तो युद्ध का नया और बहुत खतरनाक चरण शुरू हो जाएगा. यूएसएस ट्रिपोली से MV-22 हेलीकॉप्टर और लैंडिंग क्राफ्ट रात के अंधेरे में दो हजार से ज्यादा मरीन्स को उतारेंगे. F-35 जेट्स और अटैक हेलीकॉप्टर पूरे समय कवर फायर देंगे जिससे कुछ ही घंटों में द्वीप पर कब्जा हो सकता है.
तेल पोर्ट और टैंकर पूरी तरह सुरक्षित हो जाएंगे. लेकिन ईरान की जवाबी कार्रवाई भी बहुत तेज होगी. रिवोल्यूशनरी गार्ड भारी मिसाइलें, ड्रोन का स्वार्म अटैक और फास्ट बोट्स से हमला करेगा. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छू लेंगी.
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ईरान सऊदी अरब और UAE पर भी रॉकेट दाग सकता है. सबसे बड़ा खतरा डर्टी बॉम या साइबर अटैक का होगा. चीन और रूस ईरान को हथियार और सपोर्ट दे सकते हैं जिससे युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट में फैल जाएगा.
अमेरिका की एयर पावर और टेक्नोलॉजी की वजह से जल्दी कंट्रोल मिल सकता है लेकिन लाखों मौतें, महंगाई का तूफान और तेल संकट का खतरा बहुत बड़ा रहेगा. पूरा युद्ध तेल की जंग बन जाएगा. ईरान की सरकार का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है.
आगे क्या होगा
अभी यूएसएस ट्रिपोली होर्मुज की तरफ बढ़ रहा है. यह सिर्फ ईरान को डराने का तरीका भी हो सकता है या असली बूट्स ऑन ग्राउंड ऑपरेशन. दुनिया के नेता और संयुक्त राष्ट्र इस स्थिति से बहुत चिंतित हैं क्योंकि एक छोटा सा कदम पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है.
सच्चाई आने वाले कुछ दिनों में सामने आएगी जब जहाज अपनी मंजिल पर पहुंचेगा. फिलहाल दोनों तरफ से बयानबाजी जारी है लेकिन अगर खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ तो ईरान की पूरी ताकत और वैश्विक अर्थव्यवस्था दोनों पर बहुत बड़ा असर पड़ेगा.
ऋचीक मिश्रा