India Today Conclave 2026: 'PAK-चीन को दूर रखना है तो...', भारत की बॉर्डर सुरक्षा पर बोले पूर्व लेफ्टि. जनरल

अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमलों में AI की मदद से टारगेट चुने, जिससे सुप्रीम लीडर और 40 कमांडर मारे गए. लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने कहा कि क्वांटम, ड्रोन और AI मॉडर्न वॉरफेयर बदल रहे हैं. भारत भी अनमैन्ड सिस्टम और सी ड्रोन पर काम कर रहा है. स्टार्टअप्स को स्केल, प्रोक्योरमेंट सुधार और ऑर्डर की जरूरत है ताकि दोनों सीमाओं पर मजबूती आए.

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डिफेंस में एआई, ड्रोन और नई तकनीक पर बोलते लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला. (Photo: Hardik Chhabra/India Today) डिफेंस में एआई, ड्रोन और नई तकनीक पर बोलते लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला. (Photo: Hardik Chhabra/India Today)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:53 PM IST

आज का युद्ध अब पुराने तरीकों से नहीं लड़ा जाता. अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले में AI की मदद से टारगेट चुने और सटीक हमले किए. सुप्रीम लीडर और 40 कमांडरों को निशाना बनाया गया. ऐसे में भारत की सेनाएं और स्टार्टअप्स भी AI, ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम पर तेजी से काम कर रहे हैं.

इंडिया टुडे कॉनक्लेव के War’s New Rule Book: Drones, AI and the Tech-Driven Battlefield सेशन में आर्मी ट्रेनिंग कमांड के पूर्व जीओसी-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला, सागर डिफेंस के फाउंडर निकुंज पराशर और ड्रोन फेडरेशन इंडिया के प्रेसिडेंट स्मित शाह ने फ्यूचर वॉरफेयर, प्रोक्योरमेंट और स्केल की चुनौतियों पर खुलकर बात की.

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ईरान पर AI आधारित हमले: युद्ध का नया दौर

अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर ऑपरेशन में AI टूल का इस्तेमाल किया. AI को कमांड देकर टारगेट लोकेशन, प्लानिंग और सटीक हमले तय किए गए. इससे सुप्रीम लीडर और 40 कमांडर मारे गए. मोजतबा खामेनेई पर अस्पताल में दूसरा हमला हुआ. यूक्रेन युद्ध में भी ड्रोन हमले इसी तरह से हो रहे हैं. 

चार रूसी सैनिक चार ड्रोन लेकर बड़े नुकसान पहुंचा देते हैं. आर्टिलरी को अब पीछे भेज दिया गया है. लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला कहते हैं कि क्वांटम, ड्रोन और AI मॉडर्न वॉरफेयर में आ चुके हैं. ऑपरेशन एपिक फ्यूरी में ये सब इस्तेमाल हो रहा है. सटीक और तेज हमले हो रहे हैं.

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भारत में ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम की शुरुआत

भारत की दोनों सीमाओं पर ऐसी तकनीक लगाई जा सकती है. हम शुरू भी कर चुके हैं. सागर डिफेंस इंजीनियरिंग लिमिटेड के फाउंडर निकुंज पराशर ने बताया कि वो प्लास्टिक शीट खरीदकर ड्रोन बोट्स बना रहे थे. 

खेती से आईटी की ओर आए, फिर इंडस्ट्री छोड़कर नौसेना में मौका देखा. iDEX स्कीम से उन्हें मदद मिली. उनके अनमैन्ड नेवल वेसल ISR (इंटेलिजेंस, सर्विलांस, रिकॉनिसेंस) के लिए 400 नॉटिकल मील तक जा सकते हैं. निकुंज कहते हैं कि अगर मिलकर काम नहीं करेंगे तो चुनौती बढ़ जाएगी.

स्किल और स्केल की जरूरत: ड्रोन इंडस्ट्री की चुनौतियां

ड्रोन फेडरेशन इंडिया के प्रेसिडेंट स्मित शाह ने कहा कि हमारे पास स्किल और स्केल दोनों हैं, लेकिन स्केल में थोड़ा पीछे हैं. इंडस्ट्री में सर्च कैपेसिटी है, लेकिन ऑर्डर आते हैं तो काम कम हो जाता है. स्केल को इंस्टीट्यूशनल बनाना होगा. अगर 1 लाख लॉयटरिंग म्यूनिशन चाहिए तो कौन सी कंपनियां हैं? 

स्मित कहते हैं कि काउंटर ड्रोन और मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक साथ आ गए हैं. सुदर्शन चक्र पर पीएम मोदी ने बात की. निजी कंपनियां आई हैं और लगातार बदलाव हो रहा है.

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प्रोक्योरमेंट और HR में बदलाव की जरूरत

लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने प्रोक्योरमेंट पर कहा कि मिलिट्री की HR प्रैक्टिस बदलनी होगी. अनमैन्ड प्लेटफॉर्म बढ़ रहे हैं. और स्टार्टअप्स से आएंगे. यूक्रेन में जनरल टेक जायंट हैं. कटिंग-एज टेक्नोलॉजी चाहिए. सर्जिकल डिरेगुलेशन और एल1 बीमारी खत्म करनी होगी. प्रोक्योरमेंट ब्यूरोक्रेसी हटानी होगी. AMCA फाइटर जेट के डिजाइन में समय लगा. स्टार्टअप्स को ऑर्डर मिलना जरूरी है.

समुद्री ड्रोन और भविष्य का युद्ध

निकुंज पराशर ने सी ड्रोन पर कहा कि भारत की बहुत बड़ी समुद्री सीमा है. एयरक्राफ्ट कैरियर और युद्धपोत रहेंगे, लेकिन वहीं से समुद्री ड्रोन बोट लॉन्च होंगे. सुदर्शन चक्र भी इसी तरह का है. लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने फ्यूचर वॉरफेयर पर कहा कि पूरी तरह ऑटोनॉमस जंग नहीं होगी. प्लेटफॉर्म हमेशा रहेंगे. जंग में खून बहेगा ही. ऑटोनॉमी पायलेटेड प्लेन की मदद करेगी. सस्ते ड्रोन महंगे मिसाइल गिरा रहे हैं. हम एआई युग में आ चुके हैं.

भारत AI, ड्रोन और अनमैन्ड सिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है. स्टार्टअप्स, नौसेना और सेना मिलकर काम कर रही है. लेकिन स्केल, प्रोक्योरमेंट में सुधार और स्टार्टअप्स को ऑर्डर मिलना जरूरी है. लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला, निकुंज पराशर और स्मित शाह की बातें बताती हैं कि आधुनिक युद्ध में तकनीक सबसे बड़ा हथियार है. भारत अगर सही दिशा में बढ़ा तो दोनों सीमाओं पर मजबूत हो सकता है.

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