पाक-चीन के सैटेलाइट सिग्नल होंगे जाम, इस कंपनी को मिला कॉन्ट्रैक्ट

रक्षा मंत्रालय ने 449 करोड़ रुपये में भारतीय नौसेना के लिए 20 एडवांस GNSS जैमर खरीदने का डील साइन किया. बेंगलुरु की एकॉर्ड कंपनी द्वारा बनाए गए ये स्वदेशी जैमर दुश्मन के सैटेलाइट नेविगेशन को रोक देंगे.

Advertisement
बाएँ से- ये है वो जैमर जिसके लिए डील हुई है. (Photo:X) बाएँ से- ये है वो जैमर जिसके लिए डील हुई है. (Photo:X)

शिवानी शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 10 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:24 PM IST

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. 10 जून 2026 को रक्षा मंत्रालय ने बेंगलुरु स्थित एकॉर्ड सॉफ्टवेयर एंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (ASSPL) के साथ 449 करोड़ रुपये का महत्वपूर्ण डील साइन किया है. इस डील के तहत भारतीय नौसेना को 20 एनहैंस्ड कैपेबिलिटी ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (ECGNSS) जैमर्स दिए जाएंगे. यह पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित सौदा है जिसमें कम से कम 75% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल होगा.

Advertisement

यह डील Buy (Indian-IDDM) कैटेगरी के अंतर्गत साइन किया गया है, यानी Indian-Indigenously Designed, Developed and Manufactured. डील पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में दस्तखत हुए. यह सौदा आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान को नई गति देने वाला है. इससे न केवल विदेशी निर्भरता कम होगी बल्कि भारतीय कंपनियों को उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी विकसित करने का मौका भी मिलेगा.

यह भी पढ़ें: Weather Alert: बदलने जा रहा है मौसम... दिल्ली, हरियाणा और कई राज्यों में 11-12 जून को गिरेंगे ओले!

GNSS जैमर क्या है और क्यों जरूरी?

GNSS का पूरा नाम ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम है. इसमें GPS, GLONASS, Galileo और BeiDou जैसे सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम शामिल हैं. आधुनिक युद्ध में जहाज, मिसाइल, ड्रोन और विमान सभी इसी सिस्टम पर निर्भर रहते हैं. 

ECGNSS जैमर दुश्मन के इन सैटेलाइट सिग्नल को जैम करने, कमजोर करने या गलत जानकारी देने की क्षमता रखता है. यानी यह दुश्मन के नेविगेशन सिस्टम को धोखा दे सकता है या पूरी तरह बंद कर सकता है. इससे दुश्मन की मिसाइलें, जहाज या ड्रोन अपना रास्ता भटक सकते हैं.

Advertisement
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में दस्तखत हुए. (Photo: PIB)

जैमर की क्षमताएं

ये नए जैमर बहुत एडवांस हैं। इनकी मुख्य क्षमताएं इस प्रकार हैं...

  • दुश्मन के GNSS रिसीवर के सैटेलाइट सिग्नल को पकड़ने और ट्रैक करने की क्षमता को कम करना.
  • मल्टी थ्रेट एनवायरमेंट में भारतीय नौसेना के जहाजों को सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करना.
  • सिग्नल स्पूफिंग यानी दुश्मन को गलत लोकेशन की जानकारी देना. 

ये जैमर भारतीय नौसेना को समुद्र में दुश्मन की पनडुब्बियों, जहाजों और हवाई हमलों से बेहतर सुरक्षा देंगे.

समुद्री क्षेत्र में आजकल ड्रोन, एंटी-शिप मिसाइल और सैटेलाइट गाइडेड हथियार बहुत बड़े खतरे बन गए हैं. ऐसे में GNSS जैमर जैसे उपकरण नौसेना को दुश्मन के नेविगेशन और गाइडेंस सिस्टम को बेअसर करने की ताकत देंगे. भारतीय नौसेना अब इन 20 जैमरों को अपने विभिन्न युद्धपोतों पर लगाएगी, जिससे समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत हो जाएगी. खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चीन की गतिविधियों को देखते हुए यह सौदा बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

यह भी पढ़ें: भारतीय नौसेना ने पेश किया स्वदेशी ASW जहाज अग्रय का प्रतीक चिह्न

यह कॉन्ट्रैक्ट सरकार की आत्मनिर्भरता नीति का शानदार उदाहरण है. एकॉर्ड जैसी भारतीय कंपनी अब उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण बना रही है. इससे न केवल विदेशी मुद्रा बचती है बल्कि रोजगार भी बढ़ता है. तकनीकी ज्ञान देश के अंदर ही रहता है. रक्षा मंत्रालय का लक्ष्य है कि भविष्य में ज्यादातर रक्षा उपकरण स्वदेशी तकनीक से ही बनाए जाएं. यह सौदा उस दिशा में एक और मजबूत कदम है.

Advertisement

भविष्य की संभावनाएं

इन GNSS जैमरों की डिलीवरी के बाद भारतीय नौसेना की इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में और भी एडवांस वर्जन विकसित किए जा सकते हैं. यह प्रणाली न केवल नौसेना बल्कि थलसेना और वायुसेना के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है. इससे भारत की समग्र रक्षा तैयारियों को नई ताकत मिलेगी.

449 करोड़ रुपये के इस अनुबंध से भारतीय नौसेना को आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए एक शक्तिशाली हथियार मिल गया है. GNSS जैमर दुश्मन की आंखों को धोखा देने और उसके नेविगेशन को बाधित करने में सक्षम होंगे. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »