इजरायल ने ईरान के साथ चल रही जंग में अब तक 18,000 से ज्यादा बम गिराए हैं. इजरायली सेना (IDF) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उन्होंने ईरान में 4,000 से ज्यादा अलग-अलग ठिकानों को निशाना बनाया. यह आंकड़ा लगभग 40 दिनों (28 फरवरी 2026 से शुरू होकर अप्रैल 2026 तक) की लड़ाई का है. Photo: Reuters
इजरायल की एयर फोर्स ने 1000 से ज्यादा हमले की सीरीज चलाई. कुल 10,800 से अधिक अलग-अलग हमले किए. हर टारगेट पर औसतन साढ़े चार बम या उससे ज्यादा गोला-बारूद गिराने की रणनीति अपनाई गई ताकि कोई भी लक्ष्य बच न सके. यह इजरायल की अब तक की सबसे भारी हवाई कार्रवाई में से एक मानी जा रही है. Photo: AFP
28 फरवरी 2026 को शुरू हुए संघर्ष में इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए. इजरायली सेना ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर, हथियार बनाने वाली फैक्टरियां, न्यूक्लियर से जुड़े ठिकाने, आईआरजीसी के मुख्यालय और कई सैन्य कमांडरों को निशाना बनाया. Photo: AFP
ईरान की मिसाइल और हथियार उत्पादन क्षमता को बहुत बड़ा नुकसान पहुंचा है. कई पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील फैक्टरियां और मिसाइल बनाने के प्लांट तबाह हो गए. इजरायल का दावा है कि ईरान की डिफेंस इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा नष्ट हो गया है. ईरान ने भी इजरायल पर मिसाइलें दागीं, लेकिन इजरायली डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर को रोक लिया. Photo: AFP
ईरान में इन हमलों से हजारों लोग मारे गए और घायल हुए. सैन्य ठिकानों के अलावा कुछ नागरिक इलाकों में भी नुकसान हुआ. ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ताकत दोनों को भारी झटका लगा है. इजरायल का कहना है कि इन हमलों से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता, एयर डिफेंस और परमाणु कार्यक्रम को काफी नुकसान पहुंचा है. Photo: AP
इजरायल ने ईरान के साथ-साथ लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर भी लगातार हमले जारी रखे. 8 अप्रैल 2026 को एक ही दिन में इजरायल ने लेबनान पर 10 मिनट के अंदर 100 से ज्यादा हमले किए. इसमें बेरूत के घनी आबादी वाले इलाकों, दक्षिणी लेबनान और बेकां घाटी को निशाना बनाया गया. Photo: Reuters
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सिविल डिफेंस के अनुसार उस एक दिन में 250 से 350 से ज्यादा लोग मारे गए और 1100 से अधिक घायल हुए. यह लेबनान में हाल के सालों का सबसे खूनी दिन था. पूरे अभियान में लेबनान में 1000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं और हजारों लोग घायल हुए हैं. Photo: AFP
इजरायल ने हिजबुल्लाह के कमांड सेंटर, हथियार डिपो, ब्रिज और रसद मार्गों को नष्ट किया. कई पुल टूट गए जिससे दक्षिणी लेबनान में मदद पहुंचना मुश्किल हो गया है. इजरायल का दावा है कि इन हमलों में सैकड़ों हिजबुल्लाह लड़ाके मारे गए. लेबनान में लाखों लोग बेघर हो गए और देश में बड़ी तबाही मची है. Photo: AP
इजरायल हर एक महत्वपूर्ण टारगेट को पूरी तरह खत्म करने के लिए बहुत ज्यादा बम गिरा रहा है. औसतन हर टारगेट पर 4.5 बम या उससे ज्यादा गोला-बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका मकसद है कि कोई भी सैन्य सुविधा, मिसाइल या कमांड सेंटर बच न सके. Photo: Reuters
इजरायल ने 800 से ज्यादा हमले की लहरों में यह रणनीति अपनाई. इससे ईरान और हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को जड़ से कमजोर करने का प्रयास किया गया. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी भारी बमबारी दुर्लभ है और इससे इलाके में लंबे समय तक असर रहेगा. Photo: Reuters
यह 40 दिनों का संघर्ष फरवरी के अंत में शुरू हुआ जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान पर हमले शुरू किए. इसका मुख्य लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता, न्यूक्लियर कार्यक्रम और हिज्बुल्लाह जैसे प्रॉक्सी ग्रुप्स को कमजोर करना था. ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत की भी खबरें आईं जिससे स्थिति और गर्म हो गई. Photo: AP
अप्रैल 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हुआ, लेकिन इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखे. इजरायल कहता है कि ये हमले आत्मरक्षा के लिए जरूरी हैं क्योंकि हिजबुल्लाह अभी भी खतरा बना हुआ है. Photo: AP
दूसरी तरफ ईरान और लेबनान इन हमलों को आक्रामकता बता रहे हैं. दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. लेबनान सरकार ने राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद मांगी है. Photo: Reuters
यह युद्ध दिखाता है कि मध्य पूर्व में तनाव कितना गहरा है. इजरायल ने अपनी एयर पावर का पूरा जोर लगाया, लेकिन इससे आम लोगों की मौत और बड़ी तबाही भी हुई है. आने वाले दिनों में सीजफायर की कोशिशें जारी रहेंगी, लेकिन शांति अभी दूर नजर आ रही है. Photo: AP