छत्तीसगढ़ ट्रिपल मर्डर: दशकों पुरानी दुश्मनी का खूनी अंजाम, जिंदा जलाए गए 3 BJP नेता

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में बीजेपी नेता भारत सिंह उर्फ लल्ला सिंह, उनके भाई नागेंद्र सिंह और भतीजे वीरेंद्र सिंह को जलाकर मार दिया. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि ये हमला अचानक नहीं किया गया, बल्कि ये एक साजिश थी, जिसमें कई लोग शामिल थे. मामले में पांच आरोपी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश में जुटी है.

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पुरानी रंजिश के चलते तीन लोगों की हत्या की गई! (Photo- ITGD) पुरानी रंजिश के चलते तीन लोगों की हत्या की गई! (Photo- ITGD)

सुमी राजाप्पन

  • रायपुर,
  • 20 जून 2026,
  • अपडेटेड 7:23 AM IST

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से सामने आई तिहरे हत्याकांड की सनसनीखेज वारदात महज रेत खनन के विवाद का नतीजा नहीं है. जलती हुई फॉर्च्यूनर कार के भीतर बीजेपी नेता भारत सिंह उर्फ लल्ला सिंह, उनके भाई नागेंद्र सिंह और भतीजे वीरेंद्र सिंह को जिंदा जलाकर मार डालने की इस घटना ने दशकों पुरानी रंजिश, एक सोची-समझी साजिश और वर्चस्व की खूनी जंग को उजागर कर दिया है.

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सोनहत के नौगई गांव में हुई इस वारदात ने पूरे जिले को हिलाकर रख दिया है. ये हाल के सालों में देखा गया सबसे हैरान करने वाला अपराध है. पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, अब ध्यान इस बात पर नहीं है कि हमला अचानक हुआ या योजनाबद्ध था, बल्कि ध्यान इस बात पर है कि इस पूरी साजिश में कौन-कौन शामिल था.

स्थानीय निवासियों और दोनों परिवारों के इतिहास से वाकिफ लोगों के मुताबिक, सिंह और त्रिपाठी परिवारों के बीच का ये टकराव रेत खनन से शुरू नहीं हुआ था. ग्रामीणों का दावा है कि इस दुश्मनी की जड़ें भारत सिंह और मनोज त्रिपाठी के परदादाओं के जमाने से जुड़ी हैं.

कहा जाता है कि दशकों पहले भारत सिंह के परदादा ने मनोज त्रिपाठी के परदादा की कथित तौर पर हत्या कर दी थी. इसी घटना ने एक ऐसी पारिवारिक रंजिश की नींव रखी, जो कभी पूरी तरह शांत नहीं हुई. 

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दशकों पुरानी रंजिश का बदला!

दशकों के दौरान ये दुश्मनी स्थानीय विवादों, सामाजिक तनाव और इलाके में दबदबा बनाने की होड़ के रूप में बार-बार सामने आती रही. हालांकि, इनमें से कई टकराव कभी शिकायत के रूप में पुलिस थाने तक नहीं पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ियों से दोनों पक्षों के दिलों में जमी कड़वाहट कभी कम नहीं हुई और पूरा इलाका इस बात से वाकिफ था.

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जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस खूनी अंजाम की वजह 16 जून को हुई एक घटना बनी. उस दिन भारत सिंह के रिश्तेदार मयंक सिंह बैकुंठपुर से लौट रहे थे, तभी रास्ते में त्रिपाठी परिवार के सदस्यों के साथ उनका विवाद हो गया. ये झगड़ा इतना बढ़ा कि मामला सोनहत थाने तक पहुंच गया, जहां एक FIR दर्ज की गई.

इस मामले में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115(2), 126(2), 296, 3(5) और 351(3) के तहत प्रावधान शामिल किए गए हैं. सूत्रों का कहना है कि जब पुलिस इस झगड़े की जांच शुरू ही कर रही थी, तभी जमीन पर हालात बहुत तेजी से बदलने लगे और दोनों गुटों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया.

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अचानक हुआ झगड़ा नहीं, ये एक 'प्री-प्लान्ड' हमला था

पुलिस इस तिहरे हत्याकांड को अचानक हुई कोई हिंसक झड़प नहीं, बल्कि एक बेहद सोची-समझी और योजनाबद्ध साजिश मानकर चल रही है. जांचकर्ताओं का मानना है कि हमले की तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी थीं और इस खूनी खेल को अंजाम देने में कई लोग शामिल थे.

इस हत्या के मामले में हत्या, हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और आगजनी जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, साजिश का पहलू इस जांच का मुख्य केंद्र है. फरार मुख्य आरोपी मनोज त्रिपाठी इस हमले की प्लानिंग के सिलसिले में पुलिस के रडार पर है. पुलिस का मानना है कि उस रात जो कुछ भी हुआ, वो कोई हादसा नहीं बल्कि कई लोगों की मिलीभगत और साजिश का नतीजा था.

समझौते के बहाने फोन कर जाल में फंसाया

जांचकर्ताओं के हाथ एक और अहम कड़ी लगी है, जो 16 जून के विवाद के बाद हुई एक फोन कॉल से जुड़ी है. सूत्रों के मुताबिक, मयंक सिंह के साथ हुए विवाद के बाद मनोज त्रिपाठी ने भारत सिंह से फोन पर संपर्क किया था और मामले को आपस में सुलझाने की बात कही थी.

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों का दावा है कि भारत सिंह को भरोसा था कि इस विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है. पुलिस अब इस फोन कॉल और उसके बाद के घटनाक्रमों की कड़ियों को आपस में जोड़ रही है. माना जा रहा है कि समझौते के बहाने की गई ये बातचीत ही वह मुख्य कड़ियां हैं, जिसकी वजह से भारत सिंह बिना किसी आशंका के उस स्थिति में पहुंचे जहां उन पर जानलेवा हमला कर दिया गया.

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रेत खनन: सिर्फ एक नया बहाना

भले ही इस मामले को मीडिया और आम चर्चाओं में रेत खनन का विवाद बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. खनन का मुद्दा इस पुरानी दुश्मनी को भड़काने का सिर्फ एक नया जरिया बना.

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, भारत सिंह इलाके के एक बड़े ठेकेदार थे और क्षेत्र में उनका अच्छा-खासा प्रभाव था. वो लोक निर्माण विभाग (PWD) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के बड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़े थे. इसके बाद, रेत खनन के अधिकारों और उससे जुड़े व्यापारिक हितों ने दोनों गुटों के बीच मतभेद को और बढ़ा दिया.

ग्रामीणों का कहना है कि त्रिपाठी गुट भी उस खनन व्यवसाय और आर्थिक अवसरों में हिस्सेदारी चाहता था, जो पहले से ही भारत सिंह के नेटवर्क से जुड़े थे. इसी आर्थिक वर्चस्व की होड़ ने सालों पुराने बारूद में चिंगारी का काम किया.

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कारोबार और रसूख में कोई मुकाबला नहीं था

क्षेत्र के लोग भारत सिंह और मनोज त्रिपाठी को दो ऐसे प्रतिद्वंदियों के रूप में देखते हैं, जिनके रसूख में जमीन-आसमान का अंतर था. भारत सिंह की गिनती इलाके के सबसे बड़े और प्रभावशाली ठेकेदारों में होती थी, जिनका मजबूत स्थानीय आधार था.

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इसके विपरीत, मनोज त्रिपाठी एक छोटा ठेकेदार था, जिसका काम मुख्य रूप से पंचायत स्तर के प्रोजेक्ट्स और छोटे-मोटे ठेकों तक ही सीमित था। कई ग्रामीणों का मानना है कि प्रभाव, व्यापारिक पकड़ और सामाजिक प्रतिष्ठा में मौजूद इसी भारी अंतर ने त्रिपाठी गुट के भीतर ईर्ष्या और दुश्मनी की भावना को और गहरा कर दिया था.

राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भारत सिंह बीजेपी के नेता जरूर थे, लेकिन वो किसी खास आंतरिक राजनीतिक गुट से बंधे हुए नहीं थे. दूसरी ओर, क्षेत्र के राजनीतिक कार्यकर्ताओं और निवासियों का कहना है कि मनोज त्रिपाठी को पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता रेणुका सिंह के राजनीतिक खेमे के करीब देखा जाता था. 

इलाके में अक्सर त्रिपाठी की इस राजनीतिक नजदीकी और रसूख की चर्चा होती थी. हालांकि, पुलिस जांचकर्ताओं ने अभी तक इस अपराध के पीछे किसी भी तरह के राजनीतिक जुड़ाव या मकसद की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

नौ नामजद आरोपी, लेकिन क्या साजिश और बड़ी है?

पुलिस ने इस मामले में अब तक नौ लोगों को नामजद किया है, जिनमें से चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. लेकिन जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इस खूनी साजिश के पीछे का जाल कहीं ज्यादा बड़ा हो सकता है.

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जांचकर्ताओं को ऐसी जानकारियां मिल रही हैं कि इस हमले की प्लानिंग करने, इसे बढ़ावा देने और अलग-अलग हिस्सों को अंजाम देने में 10 से 15 लोग शामिल हो सकते हैं. पुलिस अब इस घटना से जुड़े हर एक व्यक्ति की भूमिका की जांच कर रही है. 

बाकी आरोपियों की सरगर्मी से तलाश

मामले के पांच नामजद आरोपी अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं और फरार चल रहे हैं. उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस की कई टीमें बनाई गई हैं, जो संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में अगला बड़ा खुलासा तब होगा, जब फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की जाएगी. पुलिस को उम्मीद है कि इन गिरफ्तारियों से ये साफ हो जाएगा कि इस खूनी साजिश का ताना-बाना कैसे बुना गया, इसमें कौन-कौन शामिल था और क्या पर्दे के पीछे से कुछ और लोग भी इस साजिश को हवा दे रहे थे.

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अब तक की जांच का निचोड़

इस मोड़ पर, पुलिस जांच इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि ये हमला सड़क पर हुए किसी पुराने झगड़े की वजह से पैदा हुआ अचानक गुस्सा नहीं था. इसके उलट, अब तक मिले तमाम सबूत एक बड़ी और गहरी साजिश की ओर इशारा करते हैं. ये पूरी वारदात पारिवारिक दुश्मनी, क्षेत्रीय वर्चस्व, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और सिंह बनाम त्रिपाठी गुट के बीच लंबे समय से चली आ रही खूनी जंग का नतीजा है.

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पांच आरोपियों के फरार होने और नए संदिग्धों की भूमिका की जांच के चलते ये केस अभी लंबा चलने वाला है. लेकिन एक बात साफ है कि भारत सिंह, नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह की मौत उस नफरत का अंत थी, जो नौगई गांव के लोगों के मुताबिक कई सालों और शायद कई पीढ़ियों से सुलग रही थी.

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