सिरसा महिला थाना ग्रेनेड हमला: NIA की चार्जशीट में 2 पाकिस्तानी साजिशकर्ता समेत 9 आरोपी बेनकाब

सिरसा महिला पुलिस स्टेशन ग्रेनेड हमले मामले में NIA ने 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. जांच में पाकिस्तानी साजिशकर्ता, लोकल मॉड्यूल, सोशल मीडिया भर्ती और विदेशी फंडिंग को लेकर बड़े खुलासे हुए हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

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NIA ने चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए हैं (फोटो-ITG) NIA ने चार्जशीट में कई अहम खुलासे किए हैं (फोटो-ITG)

जितेंद्र बहादुर सिंह

  • पंचकूला/सिरसा,
  • 26 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:28 PM IST

हरियाणा के सिरसा में महिला पुलिस स्टेशन पर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ा खुलासा करते हुए 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. इस केस में दो पाकिस्तानी नागरिकों को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है. जांच एजेंसी के मुताबिक यह हमला सिर्फ एक स्थानीय वारदात नहीं, बल्कि भारत में दहशत फैलाने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा था. 

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NIA ने पंचकूला की विशेष अदालत में यूएपीए, बीएनएस और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया है. इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट पर हैं. चार्जशीट में पाकिस्तान के शाहजाद भट्टी और सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच को इस हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है. 

NIA के अनुसार शाहजाद भट्टी पहले गैंगस्टर था, लेकिन बाद में आतंकी गतिविधियों से जुड़ गया. एजेंसी का दावा है कि उसने भारत में पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर डर और अस्थिरता फैलाने की साजिश रची थी. जांच में सामने आया कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़कर उन्हें कट्टरपंथी बनाया गया. इसके बाद स्थानीय मॉड्यूल तैयार कर हमले को अंजाम दिया गया.

इस मामले में गिरफ्तार भारतीय आरोपियों में धीरज उर्फ धीरू, विकास उर्फ विक्की, संदीप उर्फ डेमर, सुशील उर्फ सिल्लू, मोहम्मद सिजान उर्फ गाजी और गुरजंत सिंह समेत अन्य नाम शामिल हैं. NIA की जांच में खुलासा हुआ कि धीरज भारत में पूरे ऑपरेशन का मुख्य समन्वयक था. उसी ने स्थानीय नेटवर्क तैयार किया और हमले की योजना को जमीन पर उतारा. 

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एजेंसी के मुताबिक सभी आरोपी लगातार विदेशी हैंडलर्स के संपर्क में थे और उन्हें निर्देश भी बाहर से मिल रहे थे. जांच एजेंसियां अब इनके अन्य नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं. NIA के मुताबिक आरोपियों ने अमृतसर से ग्रेनेड की व्यवस्था की थी. इसी ग्रेनेड का इस्तेमाल 25 नवंबर 2025 को सिरसा महिला पुलिस स्टेशन पर हमले में किया गया. 

जांच में यह भी सामने आया कि हमले के बाद उसका वीडियो मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया गया था. बाद में इस वीडियो को प्रचार और दहशत फैलाने के मकसद से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किया गया. एजेंसी का मानना है कि इसका मकसद लोगों में डर पैदा करना और आतंकी संगठन की मौजूदगी दिखाना था. जांच एजेंसी अब इस पूरे मामले में विदेशी फंडिंग, पाकिस्तान से जुड़े अन्य लिंक और फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है. 

NIA यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मॉड्यूल को आर्थिक मदद कहां से मिली और भारत में इनके कितने और सहयोगी सक्रिय हैं. एजेंसी को शक है कि यह नेटवर्क केवल हरियाणा तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों में फैला हो सकता है. सुरक्षा एजेंसियां इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा बड़ा खतरा मानकर आगे की जांच कर रही हैं.

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