गुजरात ATS ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से प्रभावित एक बड़े मॉड्यूल का खुलासा किया है. जांच में सामने आया है कि आरोपी पिछले दो वर्षों से गन पाउडर और अन्य विस्फोटक सामग्री जुटाकर धमाके की रिहर्सल कर रहे थे. ATS ने अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच जारी है.
गुजरात ATS के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि एजेंसी को सूचना मिली थी कि कुछ लोग आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की विचारधारा से प्रभावित होकर दारूल उलूम गुजरात के नाम पर लोगों को जोड़ने का काम कर रहे थे. इस सूचना के आधार पर ATS ने कार्रवाई करते हुए पहले 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. सभी आरोपियों को अदालत से 14 दिन की रिमांड भी मिली थी. पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिनके आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया गया.
ATS की जांच में खुलासा हुआ कि मुख्य आरोपी अमीन शेरा और उसके साथी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तथा स्थानीय बाजार से गन पाउडर और अन्य सामान खरीद रहे थे. इसके बाद वे इन सामग्रियों का इस्तेमाल कर विस्फोट करने का ट्रायल करते थे और धमाका करने की तकनीक सीखने की कोशिश कर रहे थे. एजेंसी के मुताबिक यह गतिविधियां पिछले करीब दो वर्षों से जारी थीं. हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्होंने किस दिन और किस स्थान पर ये परीक्षण किए.
पूछताछ में सामने आया कि अमीन के साथ अहमद और झकीरिया भी विस्फोट के ट्रायल में शामिल थे. इनके इनपुट के आधार पर ATS ने सिद्धपुर से पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया. वहीं बिलाल नाम के आरोपी को अहमदाबाद से पकड़ा गया है. जांच के दौरान कुछ अन्य आरोपियों को अलग-अलग मदरसों से भी हिरासत में लिया गया. ATS सभी गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका और उनके आपसी संबंधों की गहन जांच कर रही है.
जांच में यह भी सामने आया कि करीब तीन साल पहले बिलाल ने अमीन को एक पेन ड्राइव दी थी. इस पेन ड्राइव में जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के भाषण, बयान और कट्टरपंथी सामग्री मौजूद थी. ATS का मानना है कि इसी सामग्री के जरिए आरोपियों का ब्रेनवॉश किया गया और उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित किया गया. एजेंसी अब इस डिजिटल सामग्री की भी फॉरेंसिक जांच करा रही है.
डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि आरोपियों ने विस्फोट का ट्रायल अपने स्तर पर किया था और उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति की ओर से कोई विशेष सूचना या निर्देश नहीं मिला था. फिलहाल, जांच में किसी संभावित टारगेट की जानकारी भी नहीं मिली है. ATS का कहना है कि सभी आरोपी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित हैं, इसलिए अभी किसी एक व्यक्ति को मॉड्यूल का मुख्य सरगना कहना उचित नहीं होगा.
ATS के अनुसार यह एक बड़ा आतंकी मॉड्यूल है, जिसका पर्दाफाश किया गया है. एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरफ्तार आरोपियों के संपर्क में और कितने लोग थे तथा उनका नेटवर्क कितना व्यापक था. जांच एजेंसियां सभी डिजिटल उपकरणों, दस्तावेजों और अन्य सबूतों की जांच कर रही हैं. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं.
ब्रिजेश दोशी