दिल्ली हिंसा मामलों का एक आरोपी यूपी के बुलन्दशहर से गिरफ्तार, ये है आरोप

आरोप के मुताबिक 24 फरवरी 2020 को मुस्लिम समुदाय के लोग नॉर्थ ईस्ट के घोंडा में इकट्ठा हुए और कानूनों के खिलाफ प्रोटेस्ट शुरू किया. इसके बाद प्रोटेस्ट हिंसक हो गया और हिंदुओं की प्रॉपर्टी पर हमला करना शुरू कर दिया.

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दिल्ली हिंसा मामले में एक गिरफ्तार (फाइल फोटो) दिल्ली हिंसा मामले में एक गिरफ्तार (फाइल फोटो)

तनसीम हैदर

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 11:14 PM IST
  • दिल्ली हिंसा मामलों में एक गिरफ्तार
  • यूपी के बुलन्दशहर से पुलिस ने पकड़ा

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीम ने दिल्ली दंगों में शामिल मोहम्मद सलमान उर्फ चांद बाबू को यूपी के बुलन्दशहर से गिरफ्तार किया है. इसे कोर्ट से भगोड़ा साबित किया जा चुका था. नॉर्थ ईस्ट दंगों में कई मामलों में ये वॉन्टेड था. डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश देव के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में खुलासा किया कि सीएए, एनआरसी कानूनों से इसे ये लगता था कि ये मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है और मुस्लिमों को देश से बाहर भगा दिया जाएगा.

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आरोप के मुताबिक 24 फरवरी 2020 को मुस्लिम समुदाय के लोग नॉर्थ ईस्ट के घोंडा में इकट्ठा हुए और कानूनों के खिलाफ प्रोटेस्ट शुरू किया. इसके बाद प्रोटेस्ट हिंसक हो गया और हिंदुओं की प्रॉपर्टी पर हमला करना शुरू कर दिया. इस आरोपी ने बाकी आरोपियों के साथ मिलकर कई घरों और दुकानों में आग लगाई, जो बहुसंख्यक समुदाय से जुड़े लोगों की थी. विटनेस के स्टेटमेंट, वीडियो फुटेज, दूसरे दंगाइयों के बयानों के आधार पर इसे ढूंढ कर गिरफ्तार किया गया है.

सेशंस कोर्ट ने आरोपी से हटाए गंभीर आरोप

राजधानी दिल्ली के उत्तर-पूर्व इलाके में पिछले साल हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में दिल्ली के सेशंस कोर्ट ने एक आरोपी को गंभीर आरोपों से मुक्त किया है. अदालत ने कहा कि हिंसा से जुड़े मामलों में कॉमन सेंस का इस्तेमाल करनी भी ज़रूरी है. सेशंस कोर्ट के जज विनोद यादव ने अपने एक आदेश में कहा कि हिंसा से जुड़े मामलों में गंभीरता से काम करना जरूरी होता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि कॉमन सेंस का इस्तेमाल ना किया जाए. कोर्ट ने कहा कि IPC की धारा 436 को सिर्फ एक बयान के आधार पर नहीं लगाया जा सकता है, जबकि अन्य लिखित बयान पुलिसकर्मी के बयान से उलट हैं तो ऐसे में ये मान्य नहीं होगा.

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बता दें कि साल 2020 में नई दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच हिंसा भड़क गई थी. करीब तीन दिनों तक दिल्ली में बवाल हुआ था और 50 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, सैकड़ों लोग इस दौरान घायल हुए थे.

 

 

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