डिजिटल अरेस्ट: 77 साल की महिला से एक हफ्ते में 1.6 करोड़ की ठगी, नकली पुलिस-NIA अफसर बनकर किया खेल

पुणे में डिजिटल अरेस्ट स्कैम का बड़ा मामला सामने आया है, जहां 77 साल की महिला से ठगों ने मुंबई पुलिस, NIA और ED के अधिकारी बनकर 1.6 करोड़ रुपये ठग लिए. जब महिला को इस ठगी का अहसास हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. पढ़ें पूरी कहानी.

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पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है (सांकेतिक फोटो) पुलिस अब आरोपियों की तलाश में जुटी है (सांकेतिक फोटो)

ओमकार

  • पुणे,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 10:10 PM IST

महाराष्ट्र के पुणे शहर से एक बेहद चौंकाने वाला साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है. यहां 77 साल की एक बुजुर्ग महिला को डिजिटल अरेस्ट स्कैम का शिकार बनाकर महज एक हफ्ते के भीतर 1.6 करोड़ रुपये ठग लिए गए. आरोपियों ने खुद को अलग-अलग जांच एजेंसियों के अधिकारी बताकर महिला को डराया और मानसिक दबाव में रखा. इस पूरे मामले ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के खतरनाक नेटवर्क को उजागर कर दिया है.

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यह पूरा मामला 3 मार्च से शुरू हुआ, जब महिला को एक अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले शख्स ने खुद को डेटा प्रोटेक्शन एजेंसी का अधिकारी बताया. उसने महिला को डराते हुए कहा कि उनकी पहचान का दुरुपयोग कर 200 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन किए गए हैं. यह सुनकर महिला घबरा गई और यहीं से ठगों ने अपने जाल में उसे फंसाना शुरू कर दिया.

कुछ ही देर बाद एक और कॉल आया, जिसमें आरोपी ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया. उसने महिला को कहा कि उनके खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और उन्हें आतंकी जांच से जोड़ा गया है. इस तरह के गंभीर आरोपों ने महिला को पूरी तरह डरा दिया और उसने बिना जांच-पड़ताल किए आरोपियों की बातों पर भरोसा कर लिया.

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ठग यहीं नहीं रुके, बल्कि उन्होंने खुद को NIA और ED का अधिकारी बताकर महिला से संपर्क किया. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और वित्त मंत्रालय के नाम से फर्जी दस्तावेज और लेटर भेजे, जिससे महिला को पूरा मामला असली लगने लगा. आरोपियों ने उसे सख्त निर्देश दिए कि वह इस जांच के बारे में किसी को न बताए और गोपनीयता बनाए रखे.

आरोपियों ने महिला को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और एक नकली अरेस्ट वारंट भी भेजा. उन्होंने कहा कि जांच के लिए उसके बैंक खातों की रकम को RBI के एक सुरक्षित खाते में ट्रांसफर करना होगा. लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक दबाव के चलते महिला ने उनकी बात मान ली और पैसे ट्रांसफर करने शुरू कर दिए.

अगले सात दिनों में महिला ने अपनी पूरी जमा पूंजी और बैंक डिपॉजिट ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए. इसके बावजूद जब आरोपियों की मांग खत्म नहीं हुई, तो उन्होंने महिला पर और दबाव बनाया. महिला को मजबूर किया गया कि वह अपने पारिवारिक गहनों पर गोल्ड लोन लेकर और पैसे दे. इस तरह उसने करीब 60 लाख रुपये और दे दिए.

जब ठग लगातार और पैसे मांगते रहे, तब महिला को शक हुआ कि कुछ गड़बड़ है. इसके बाद उसने अपने परिवार के लोगों को पूरी बात बताई. परिवार ने तुरंत उसे समझाया कि यह एक साइबर ठगी है. इसके बाद महिला ने पुणे के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई. महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है. 

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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह डिजिटल अरेस्ट स्कैम का गंभीर मामला है, जिसमें ठग सरकारी एजेंसियों का नाम लेकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि ऐसे कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें.

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