खुदगर्जी, चालबाजी और No guilt... Dark triad को समझिए, सिया को समझ जाएंगे!

वो लाइफ में थ्रिल पसंद करती है, पछतावा उसे किसी बात का नहीं होता, लेकिन गुमान हर का चीज होता है. ये सिया की पर्सनैलिटी के ट्रेट्स नहीं बल्कि वो तीन खतरनाक विशेषताएं हैं जो डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी में पाए जाते हैं. गजब के आत्मविश्वासी दिखने वाले ये लोग चेहरे पर कई नकाब पहनकर चलते हैं. क्या पुणे की 20 साल की सिया गोयल मनोविज्ञान की इसी अवस्था का शिकार थी?

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सिया गोयल पर मंगेतर की हत्या का आरोप है. (Photo: ITG) सिया गोयल पर मंगेतर की हत्या का आरोप है. (Photo: ITG)

पन्ना लाल

  • नई दिल्ली,
  • 27 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:18 AM IST

'मेरे कुछ सपने थे, कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब मुझे कभी नहीं मिलेंगे. जब मैं तुमसे इतना प्यार करती थी, तो मुझे छोड़कर क्यों चले गए? मेरे दिल को पता है कि तू यहीं है, वापस आजा.' किसी को खोकर कोई और कितना टूट सकता है. ये शब्द सिया गोयल के हैं. 20 साल की बाली उमर की सिया गोयल की. ये मैसेज उसने अपने इंस्टा पर तब लिखा जब उसके मंगेतर केतन अग्रवाल की मौत हो चुकी थी. 

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पुणे की मुस्कुराती हुई सिया गोयल! वो भोली-भाली लड़की, जिसकी सोशल मीडिया पर केतन के साथ रोमांटिक पोस्ट और बर्थडे काउंटडाउन दुनिया को शादीशुदा जिंदगी में प्रवेश करने जा रहे एक नरम जोड़े की प्यार की मिसाल लग रही थीं. 

सिया के वीडियोज आपने देखे होंगे. कोमल मुस्कान वाली वो लड़की? कौन कह सकता है कि ये लड़की अपने ही मंगेतर को मारना चाहेगी. कौन कहेगा कि खिलखिलाते चेहरे के पीछे साजिश का नकाब पहने एक 'कोल्ड ब्लडेड मर्डरर' थी. जो अपने प्रेमी के साथ मिलकर उस शख्स की हत्या करने जा रही थी जो कुछ ही महीनों में उसका पति बनने वाला था. 

बता दें कि अभी सिया और उसके कथित दोस्त चेतन पर केतन की हत्या का आरोप ही है. इस मामले में अभी पुलिस की जांच जारी है.

सवाल है कि अगर केतन के परिवार और पुलिस की जांच सही है तो सिया ने ऐसा क्यों किया? इसका कोई जवाब नहीं है. लेकिन मनोविज्ञान की कुछ व्याख्याएं इस ओर जरूर इशारा करती हैं. 

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मनोविज्ञान में एक टर्म है. डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी (Dark triad personality). 

डार्क ट्रायड मनोविज्ञान की तीन सबसे खतरनाक विशेषताओं का घातक कॉकटेल है. ये तीन विशेषताएं हैं- नार्सिसिज्म (Narcissism), मैकियावेलियनिज्म (Machiavellianism) और साइकोपैथी (Psychopathy).

यह वह अंधकार है जहां व्यक्ति खुद को सबसे ऊंचे पायदान पर रखता है. दूसरों को हेरफेर का खेल बनाता है और अपनी असल भावनाओं को इतने आवरण में छिपाकर रखता है कि दुनिया कभी उसके असली पहचान को नहीं समझ पाती है. सहानुभूति मर जाती है, पछतावा पैदा नहीं होता और नैतिकता सिर्फ शब्द रह जाती है. 

पुणे की सिया गोयल के पर्सनैलिटी ट्रैट्स को आप डार्क ट्रायड से कितना करीब पाते हैं?

पहले सिया की तस्वीरें देखिए. केतन को प्यार का इजहार करते उसके वीडियो देखिए. 

बाहर से वो भोली-भाली, प्यारी मुस्कान वाली लड़की थी जो केतन के साथ रोमांटिक पोस्ट्स करती, जन्मदिन मनाती और शादी की खुशियां बांटती नजर आती थी. दिलों को छू लेने वाली वो मासूमियत. लेकिन अंदर? एक ठंडी, चालाक और क्रूर. 

प्रेमी के साथ मिलकर मंगेतर को लोहागढ़ की खाई में धकेलने की साजिश, बार-बार हत्या के प्रयास, पासपोर्ट चोरी और हत्या के बाद भी दिल तोड़ देने वाले हुए भावुक पोस्ट. ये सब डार्क ट्रायड के तीनों लक्षणों को जीवंत कर देते हैं. बता दें कि ये सिया पर ये सारे आरोप पुलिस की जांच और केतन के परिवारवालों के आरोपों पर आधारित है. आरोप साबित होने तक सिया कानून की नजर में बेगुनाह ही है.

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आइए डार्क ट्रायड पर्सनैलिटी को विस्तार से समझते हैं.  

डार्क ट्रायड व्यक्तित्व तीन आपस में जुड़े हुए लेकिन अलग अलग लक्षणों वाला एक समूह है. जिनमें क्रूरता, चालाकी और स्वार्थ जैसे समान मूल तत्व होते हैं. 

मनोवैज्ञानिक डेलरोय पॉलहस और केविन विलियम्स ने 2002 में पहली बार "डार्क ट्रायड" शब्द का प्रयोग किया था, यह मानते हुए कि नार्सिसिज्म  यानी कि आत्ममुग्धता, मैकियावेलियनिज्म यानी कि मैकियावेलियनवाद और साइकोपैथी यानी कि मनोविकृति अक्सर एक साथ घटित होते हैं. 

दिल्ली स्थित Institute of Human Behaviour and Allied Sciences (IHBAS) में मनोरोग विभाग में प्रोफेसर डॉ. ओम प्रकाश बताते हैं, “डार्क ट्रायड मनोविज्ञान का एक शोध-आधारित शब्द है. यह कोई मानसिक बीमारी या मनोरोग का निदान नहीं है, बल्कि व्यक्तित्व के तीन ऐसे नकारात्मक गुणों का समूह है जो कुछ लोगों में अलग-अलग स्तर पर पाए जा सकते हैं.”

आगे उन्होंने कहा कि इन तीन गुणों में,

आत्ममुग्धता (Narcissism) यानी कि स्वयं को दूसरों से श्रेष्ठ मानना और लगातार प्रशंसा की अपेक्षा करना.

चालाकी और स्वार्थपूर्ण हेरफेर (Machiavellianism) यानी कि अपने लाभ के लिए दूसरों का प्लानिंग के साथ इस्तेमाल करना. 

संवेदनहीनता और पश्चाताप का अभाव (Psychopathy) मतलब किदूसरों की भावनाओं की परवाह न करना, सहानुभूति की कमी और गलत काम के बाद भी अपराधबोध न होना शामिल है. 

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अब इन तीनों लक्षणों को अलग अलग समझते हैं. 

नार्सिसिज्म

डार्क ट्रायड में नार्सिसिज़्म (आत्ममुग्धता) शायद सबसे आसानी से पहचाना जाने वाला गुण है. आम बोल चाल की भाषा में इसे आप खुदगर्जी कहते हैं. इसकी पहचान खुद को बहुत ज़्यादा अहम समझने, तारीफ़ पाने की कभी न खत्म होने वाली चाहत और दूसरों के प्रति सहानुभूति की भारी कमी से होती है. इसका नाम नार्सिसस की ग्रीक कथा से पड़ा है, जिसे अपनी ही परछाई से प्यार हो गया था. नार्सिसिज़्म का मतलब सिर्फ़ दिखावा या आत्मविश्वास से कहीं ज़्यादा है. ऐसे लोग अपनी कामयाबियों को बढ़ा चढ़ाकर पेश करते हैं.  

नार्सिसिज्म सिया की दोहरी जिंदगी में झलकता है. केतन की मौत के बाद केतन की मां ने कहा कि सिया ने कोई दुख नहीं दिखाया, एक आंसू तक नहीं बहाया. सिया केतन के अंतिम संस्कार के 4 दिन बाद उसके घर पहुंची.

इससे पहले सिया खुद को केंद्र में रखते हुए एक तरफ केतन परिवार के साथ पूजा, डिनर और जन्मदिन मनाती रहीं, जबकि दूसरी तरफ प्रेमी चेतन चौधरी के साथ भविष्य की योजना बना रही थीं. अपनी इच्छाओं को प्राथमिकता देते हुए सिया ने केतन को ‘रास्ते की रुकावट’ मान लिया.  केतन के पिता के अनुसार सिया के चेहरे पर हत्या के बाद कोई दुख या पछतावा नहीं दिखा. यह सहानुभूति की कमी नार्सिसिस्टिक ट्रेट को साफ दर्शाता है. 

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मैकियावेलियनिज्म

मैकियावेलियनिज़्म उस प्रवृत्ति को दर्शाता है जिसमें व्यक्ति अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए लोगों और परिस्थितियों का रणनीतिक इस्तेमाल करता है. ऐसे लोग हद दर्जे के चालबाज होते हैं और दूसरों को अपने फायदे के लिए एक साधन के तौर पर देखते हैं और अक्सर अपने मकसद को पूरा करने के लिए चापलूसी और धोखे का सहारा लेते हैं. गौरतलब है कि मैकियाविली इटली के राजनीतिक चिंतक थे. शासन चलाने की उनकी कूटनीतियां चर्चा में रही हैं. 

यह भी पढ़ें: मैकियावेली: यूरोप का वो 'चाणक्य', जिसने कहा- शासकों का 'कुटिल' होना अच्छा है!

मैकियावेलियनिज्म निजी फायदे के लिए चालाकी भरी चालें चलते हैं. ऐसे लोग धोखेबाज, मौकापरस्त होते हैं. अपने लाभ के लिए रिश्तों का फायदा उठाने में नहीं चूकते. 

केतन के दादा की बात आपको हैरान करेगी. वो कहते हैं कि सिया कई बार उनके घर आती. यानी अपनी होने वाली ससुराल. इस दौरान जब वह परिवार के सदस्यों से मिलती तो राधे-राधे कहकर उनका अभिवादन करती. पूजा में शामिल होती, परिवार के साथ खाना खाती.

इन व्यवहारों से मैकियावेलियनिज्म सिया के कैरेक्टर में स्पष्ट दिखता है. सिया केतन के पासपोर्ट चुराकर बाली ट्रिप रद्द करवा दी. कई बार हत्या के प्रयास किए और लोहागढ़ किले पर ‘एक्सीडेंट’ का रूप देकर धक्का देने की योजना बनाई. सिया जानती थीं कि परिवार की मर्जी के खिलाफ सीधे रिश्ता तोड़ना सामाजिक बदनामी का कारण बन सकता है, इसलिए उसने लंबी चाल चली.सिया जानती थीं कि ट्रेकिंग के दौरान धक्का ‘एक्सीडेंट’ लगेगा. 

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हम एक बार फिर बताना चाहेंगे कि ये सारी जानकारी पुणे पुलिस की जांच पर और केतन के परिवार के आरोपों पर आधारित है. 

साइकोपैथी 

साइकोपैथी शायद 'डार्क ट्रायड' का सबसे चिंताजनक पहलू है; इसकी पहचान गहरी भावनात्मक कमियां, बिना सोचे-समझे काम करने की आदत और अपराध-बोध या पछतावे की पूरी तरह कमी से होती है. इन्हें कभी पश्चाताप नहीं होता. जिन लोगों में साइकोपैथिक आदतें होती हैं, वे निडर और बिना सोचे-समझे काम करने वाले हो सकते हैं. ऐसे लोग जोखिम उठाते हैं, और अपने मकसद के लिए आक्रामक होते हैं और बेरहमी से टारगेट पूरा करते हैं. ऐसे लोग बिना किसी अपराध-बोध के नियम तोड़ते हैं. इन्हें अपनी जिंदगी में हमेशा रोमांच की चाहत होती है. 

साइकोपैथी की झलक सिया की पर्सैनिलिटी में दिखती है. बार-बार असफल प्रयासों के बावजूद सिया शांतिपूर्वक प्लानिंग करती रही और हत्या के बाद भी सामान्य खुशमिजाज व्यवहार बनाए रखा. उसने बड़ा फैसला लिया. 

केतन की मौत की घटना कुछ अनकही, कुछ अनहोनी की गवाही दे रही थी. पुलिस की अबतक की जांच से जो सामने आया उस कहानी ने सिया के चेहरे से नकाब हटा दिया है.  

ऐसे व्यक्तित्व अक्सर बाहर से आकर्षक, आत्मविश्वासी और सामान्य दिखते हैं. वे लोगों का भरोसा जीतते हैं, भावनाओं का प्रदर्शन भी करते हैं, लेकिन भीतर ही भीतर अपने लक्ष्य के लिए रिश्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर पुलिस के आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक प्रेम त्रिकोण या हत्या की कहानी नहीं रहेगा, बल्कि इस बात का उदाहरण बन जाएगा कि कैसे महत्वाकांक्षा, छल और भावनात्मक दोहरेपन का मिश्रण किसी रिश्ते को खत्म कर सकता है. 

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सिया का केस इसलिए चर्चा में है क्योंकि यह हमें याद दिलाता है कि हर मुस्कुराती तस्वीर के पीछे सच्चाई भी मुस्कुराती हो, यह जरूरी नहीं. लेकिन आरोप साबित होने तक सिया कानून की नजर में बेगुनाह है. 

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