इंडिया के लिए सभी प्रोडक्ट्स बनाते हैं, हम भारत के लिए बनाएंगे. इसी सोच के साथ टाटा ग्रुप ने जूडियो (Zudio) की शुरुआत की. जो कि फैशन मार्केट में बड़े-बड़े ब्रांड्स को टक्कर दे रही है. कुछ साल में ही जूडियो ने रिलायंस ट्रेंड्स और मैक्स जैसे दिग्गजों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है. आखिर ऐसा क्या बिजनेस मॉडल है, जिससे जूडियो को इतनी जल्दी इतनी बड़ी कामयाबी मिली.
कहां से आया आइडिया
जूडियो टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी ट्रेंट लिमिटेड (Trent Ltd) का हिस्सा है. ट्रेंट पहले से ही 'वेस्टसाइड'(Westside) जैसे प्रीमियम ब्रांड्स चला रहा था. फिर टाटा ग्रुप को लगा कि वेस्टसाइड बड़े शहरों के हाई क्लास लोगों के लिए ठीक है, लेकिन भारत की असली आबादी एक ऐसे ब्रांड की तलाश में है, जो स्टाइलिश भी हो और जेब पर भारी भी न पड़े. (Photo: Reuters)
2016 में खुला था पहला स्टोर
इसी सोच के टाटा ग्रुप ने साल 2016 में जूडियो का पहला स्टोर बेंगलुरु में खोला. मकसद साफ था युवाओं को आकर्षित करना, जो कि कम बजट में 'फास्ट फैशन' चाहते हैं. यानी जूडियो की सफलता के पीछे एक बेहतरीन रणनीति रही. जूडियो की सबसे बड़ी ताकत उसकी कीमत है. जूडियो स्टोर्स में आपको अधिकतर सामान 999 रुपये से ज्यादा के नहीं मिलेंगे. ज्यादातर कपड़े और एक्सेसरीज 299 से 999 रुपये के बीच मिल जाते हैं. (Photo: Getty)
सस्ते दाम पर फास्ट फैशन मॉडल
आप जूडियो से जो प्रोडक्ट आज खरीद कर लाएंगे, वो एक हफ्ते बाद नहीं मिलेगा. आमतौर पर जूडियो के प्रोडक्ट्स 15 दिन में बदल जाते हैं. एक तरह से जूडियो ने अंतरराष्ट्रीय ब्रांड 'Zara' के बिजनेस मॉडल को फॉलो किया है, यह हर हफ्ते अपने इन्वेंट्री में नए डिजाइन जोड़ता है. अगर कोई डिजाइन नहीं बिकता, तो उसे तुरंत हटाकर नया स्टॉक लाया जाता है. (Photo: zudio.com)
विज्ञापन पर कोई खर्च नहीं
आपने शायद ही कभी टीवी या अखबार में जूडियो का विज्ञापन देखा होगा. टाटा ने मार्केटिंग के बजाय उस पैसे को कपड़ों की क्वालिटी और कम कीमत बनाए रखने में लगाया है. ताकि आप जब एक बार सस्ते में स्टाइलिश कपड़े खरीद कर जाएंगे, तो खुद बार-बार आएंगे, और अपने जान-पहचान वालों को भी बताएंगे, यही टाटा की मार्केटिंग का फंडा है. (Photo: zudio.com)
FOCO मॉडल (Franchise Owned Company Operated) पर बिजनेस
जूडियो के ज्यादातर स्टोर फ्रेंचाइजी मॉडल पर हैं, लेकिन इसका ऑपरेशन खुद टाटा ग्रुप संभालता है. इससे कंपनी को तेजी से विस्तार करने में मदद मिलती है और क्वालिटी भी बरकरार रहती है. दिल्ली जैसे शहरों में बड़े मॉल को छोड़कर मेट्रो स्टेशन के नीचे जूडियो के अधिकतर स्टोर्स मिल जाएंगे.
युवा खरीदार टारगेट
टाटा ने जूडियो के जरिए Tier-2 और Tier-3 शहरों को टारगेट किया है, जहां नए बॉयर उभर कर आ रहे हैं. उनका बजट थोड़ा कम होता है लेकिन फैशन अपडेट चाहिए. यही कारण है कि आज जूडियो भारत में सबसे तेजी से बढ़ने वाली रिटेल चेन में से एक है. (Photo: AI Generated)
देशभर में 1000 करीब स्टोर्स
फिलहाल देश में जूडियो के स्टोर्स की संख्या 950 से अधिक हो चुकी है. 2025 के अंत तक यह आंकड़ा लगभग 854 था, 2026 तक 1000 स्टोर्स तक पहुंचने का लक्ष्य है. जूडियो ने भारत के बाहर भी कदम रखा है और दुबई (UAE) में भी अपना स्टोर खोला है. 2016 में जूडियो का पहला स्टोर खुला था, 2020 में 100 स्टोर का आंकड़ा पार कर गया. (Photo: Reuters)
वहीं टाटा ग्रुप का प्रीमियम ब्रांड वेस्टसाइड (Westside) बहुत पहले से ही बाजार में मौजूद है. जहां कपड़े, जूते और होम डेकोर मिलते हैं. जूडियो (Zudio) के फाउंडर ट्रेंट लिमिटेड (Trent Limited) है, जो टाटा ग्रुप (Tata Group) की एक रिटेल कंपनी है. ट्रेंट लिमिटेड के चेयरमैन नोएल टाटा (Noel Tata) हैं. (Photo: Reuters)
Trent के शेयर ने भी किया मालामाल
जिस तरह से जूडियो का कारोबार बढ़ा है, ठीक उसी तरह से Trent Limited के शेयर ने भी निवेशकों को मोटा पैसा बनाकर दिया है. अब कंपनी शेयरधारकों को बोनस शेयर देने पर विचार कर रही है. इसे लेकर Trent कंपनी की बोर्ड बैठक 22 अप्रैल 2026 को होने वाली है. इसी दिन चौथी तिमाही के नतीजे भी जारी किए जाएंगे. 2016 से लेकर अब तक Trent के शेयर में करीब 2400 फीसदी की तेजी देखी गई है, यानी जब से जूडियो की शुरुआत हुई है, तब से कंपनी ने निवेशकों के पैसों को 25 गुना कर दिया है. जबकि पिछले 5 साल में 470 फीसदी का रिटर्न दिया है. (Photo: AFP)
(नोट: शेयर बाजार में निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें)