मिस्त्री का रतन टाटा पर पलटवार, कहा- डोकोमो से जुड़े हर फैसले में थी सहमति

सायरस मिस्त्री ने ऐसी चर्चाओं को निराधार बताया कि डोकोमो मुद्दे को जिस ढंग से लिया गया वह टाटा समूह की संस्कृति और मूल्यों से मेल नहीं खाता था.

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मिस्त्री-टाटा मिस्त्री-टाटा

लव रघुवंशी

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2016,
  • अपडेटेड 12:35 PM IST

साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. साइरस मिस्त्री रतन टाटा और टाटा संस पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. मिस्त्री ने अब कहा है कि यह कहना गलत और शरारत भरा है कि उन्होंने टाटा-डोकोमो मामलें में जो कार्रवाई की वह अपनी मर्जी से की और रतन टाटा को उसकी जानकारी नहीं थी.

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सायरस मिस्त्री ने ऐसी चर्चाओं को निराधार बताया कि डोकोमो मुद्दे को जिस ढंग से लिया गया वह की संस्कृति और मूल्यों से मेल नहीं खाता था. डोकोमो सौदे के बारे में सभी सभी निर्णय टाटा संस के निदेशक मंडल की स्वीकृति से लिए गए और सभी कदम सामूहिक रूप से लिए जाने वाले निर्णयों के अनुरूप हैं.

मिस्त्री ने इस तरह की बातों को भी खारिज किया है कि डोकोमो के खिलाफ जिस ढंग से मुकदमा लड़ा उसे शायद मंजूर नहीं करते. बयान में कहा गया कि मिस्त्री ने हमेशा कहा कि टाटा-समूह को कानून के अनुसार अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना चाहिए.

डोकोमो के साथ टाटा का मुकदमा
गौरतलब है कि जापान की एनटीटी डोकोमो कंपनी का टाटा समूह के साथ शेयरों के भुगतान को लेकर मुकदमा चल रहा है. डोकोमो ने नवंबर 2009 में टाटा टेलीसर्विसेज में 26.5 प्रतिशत हिस्सेदारी ली थी. उस समय प्रति शेयर 117 रुपये के भाव पर सौदा 12,740 करोड़ रुपये का था. उस समय यह सहमति हुई थी कि पांच साल के अंदर कंपनी छोड़ने पर उसे अधिग्रहण की कीमत का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान वापस किया जाएगा. डोकोमो ने अप्रैल 2014 में कंपनी से अलग होने का निर्णय किया और 58 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से 7,200 करोड़ रुपये की मांग रखी. लेकिन टाटा समूह ने उसे रिजर्व बैंक के एक नियम का हवाला देते हुए 23.34 रुपये प्रति शेयर की दर से भुगतान की पेशकश की.

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आरबीआई के नियम के अनुसार कोई विदेशी कंपनी यदि निवेश से बाहर निकलती है तो उसे शेयर पूंजी पर लाभ के आधार पर तय कीमत से अधिक का भुगतान नहीं किया जा सकता. जापानी कंपनी अंतरराष्ट्रीय पंच निर्णय प्रक्रिया में चली गई और उसके पक्ष में 1.17 अरब डॉलर की डील हुई है. टाटा संस ने कहा है कि वह पंचनिर्णय के अनुपालन का विरोध करेगी क्यों कि वह भारत के स्थानीय कायदे कानूनों से बंधी है.

मिस्त्री की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने डोकोमो से अनुरोध किया कि वह इस माममे में उसके साथ मिल कर रिजर्व बैंक से अनुमति मांगे पर डोकोमो इस पर तैयार नहीं हुई. बहरहाल टाटा समूह ने रिजर्व बैंक से मंजूरी के लिए आवेदन किया पर मंजूरी नहीं मिली तथा डोकोमो अंतरराष्ट्रीय पंचनिर्णय मंच में चली गई. टाटा समूह ने ब्रिटेन के पंचनिर्णय अदालत के फैसले को चुनौती देने के बजाय रिजर्व बैंक से फैसले की राशि का भुगतान करने की अनुमति मांगी. आरबीआई ने उसे फिर इनकार कर दिया.

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