अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए बयान से फिर डर फैल गया है, जिस कारण कच्चे तेल के दाम में तेजी देखी जा रही है और यह 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है.
दरअसल, G-7 में बोलते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी और कहा कि अगर अमेरिका, ईरान की कार्रवाइयों से संतुष्ट नहीं होता है तो वह ईरान के खिलाफ नए हमले शुरू कर सकता है.
ट्रंप ने आगे कहा कि ईरान के साथ अभी समझौता फाइनल नहीं हुआ है. हम उनपर फिर से गोलीबारी कर सकते हैं और ईरान पर बम गिरा सकते हैं. अगर मुझे यह पसंद नहीं आया और वे ठीक से व्यवहार नहीं करते हैं, तो हम ईरान के बीचोबीच बम गिरा देंगे. ईरान ने 47 सालों से गलत व्यवहार किया है.
उन्होंने उन रिपोर्ट्स को भी खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को 300 अरब डॉलर देगा. उन्होंने कहा कि ईरान समझौते में 300 अरब डॉलर के फंड की रिपोर्ट झूठी है. इन सभी खबरों के बाद कमोडिटी मार्केट में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली.
कच्चे तेल के दाम में फिर आई तेजी
अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौता होने की खबर के बाद कच्चे तेल के दाम तेजी से नीचे आए और 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे कारोबार करने लगा. इसके बाद जब होर्मुज खुला तो कच्चे तेल के दाम गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया.
लेकिन अब ट्रंप की ईरान को नई धमकी के बाद फिर से होर्मुज ब्लॉक की आशंका में तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है. ट्रंप के बयान के बाद कच्चे तेल के दाम में बड़ी उछाल आई है और ब्रेंट क्रूड ऑयल 1.60 फीसदी से ज्यादा चढ़कर करीब 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है और अभी इसमें तेजी बढ़ती ही जा रही है.
अमेरिका-ईरान समझौता
गौरतलब है कि रविवार को ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होने की बात कंफर्म हो गई थी. यह डील अब 19 जून, शुक्रवार को होने की संभावना है. हालांकि इससे पहले ही ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर ईरान के प्रस्ताव पसंद नहीं आया तो अमेरिका फिर से हमला शुरू कर सकता है.
लंबे समय तक 110 के करीब रहा कच्चा तेल
ईरान अमेरिका के बीच जंग छिड़ने से कच्चे तेल के दाम 72 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 120 डॉलर के ऊपर पहुंच गया था. हलांकि, बाद में इसमें गिरावट आई, लेकिन फिर भी यह लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर या 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना रहा.
ट्रंप के बयान से क्या है डर?
अगर फिर से अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो फिर से कच्चे तेल के दाम तेजी से ऊपर जा सकते हैं और होर्मुज बंद होता है तो इसकी कीमत और भी हाई हो सकती है. साथ ही दुनियाभर में महंगाई तेजी से बढ़ सकती है. कई देशों में ब्याज दर भी हाई पर पहुंच सकता है. इसके अलावा, शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ सकती है. उधर, डॉलर में मजबूती आने से कीमती धातुओं के दाम में भी गिरावट आ सकती है.
आजतक बिजनेस डेस्क