रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कंपनी के उत्तराधिकारी को लेकर बातचीत की है. उन्होंने कहा कि कंपनी में डेली मैनेजमेंट ट्रांसफर लगभग पूरा हो चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि ऊर्जा से लेकर शिक्षा तक के इस विशाल समूह में उत्तराधिकार प्रॉसेस अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है.
कंपनी की वार्षिक आम बैठक में स्टॉक होल्डर्स को संबोधित करते हुए अंबानी ने कहा कि उनके तीनों बच्चे - आकाश , ईशा और अनंत RIL के बोर्ड में तीन-तीन साल पूरे कर चुके हैं और अब प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों को संभाल रहे हैं.अंबानी ने कहा कि आकाश टेक बिजनेस को संभालते हैं. ईशा रिटेल बिजनेस का लीडरशिप करती हैं और अनंत एनर्जी पोर्टफोलियो को संभाल रहे हैं.
सुरक्षित हाथों में है रिलायंस
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ग्रुप नेक्स्ट जनरेशन के लीडरशिप में भी एकजुट रहेगा और कहा कि ये तीन शरीर, एक आत्मा हैं और इनकी जान रिलायंस है, जो आगे कभी भी नहीं बंटेगा. कंपनी के फ्यूचर लीडरशिप को सेफ बताते हुए अंबानी ने स्टॉकहोल्डर्स से कहा कि आपकी कंपनी का फयूचर न सिर्फ सुरक्षित हाथों में है, बल्कि ऐसे हाथों में है, जो रिलायंस को और भी ऊंचाइयों पर ले जाएंगे.
अंबानी ने आगे कहा कि ग्रुप अलग-अलग बिजनेस में 30 से 40 साल की आयु के करीब 500 युवा लीडर्स को ट्रेनिंग दिया गया है, ताकि डेवलपमेंट को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके. उनके अनुसार ये लीडर अपने साथ सेक्टर एक्सपर्ट और टेक्नोलॉजी फोकस के साथ-साथ पहली पीढ़ी का जुनून भी लाते हैं.
अब भी एक्टिव हूं मैं: अंबानी
अंबानी ने कहा कि वे अब भी एक्टिव रहते हैं और कई बड़े फैसलों में अपनी भूमिका निभाते हैं. अंबानी ने स्पष्ट कर दिया कि हरदिन की जिम्मेदारियों में बदलाव अब अंतिम चरण में है. उनका वर्तमान कार्यकाल अप्रैल 2029 में समाप्त होगा. तीनों भाई-बहन RIL की सालाना आम बैठकों में भी ज्यादा एक्टिव तौर पर दिखाई देने लगे हैं, जहां उन्होंने अपने-अपने विभागों की योजनाओं और अपडेट पेश किए हैं. अंबानी के सालाना आम बैठक में दिए गए भाषणों में निवेशकों की रुचि बनी हुई है क्योंकि ये भाषण उन कुछ अवसरों में से हैं जब वे सीधे कैमरे के सामने शेयरधारकों को संबोधित करते हैं.
अंबानी ने सबसे पहले दिसंबर 2021 में एक आंतरिक कार्यक्रम में उत्तराधिकार योजना के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की थी. अपने नवीनतम बयान में, उन्होंने इस चिंता को दूर करने की भी कोशिश की कि अगली पीढ़ी के तहत समूह के व्यवसाय अलग-अलग दिशाओं में जा सकते हैं, यह कहते हुए कि भाई-बहन अलग-अलग क्षेत्रों का नेतृत्व करते हुए भी रिलायंस इकोसिस्टम के व्यापक विकास की दिशा में काम कर रहे हैं.
रिलायंस में आसान नहीं रहा अंबानी का सफर
गौरतलब है कि अंबानी का रिलायंस में सफर काफी मुश्किल भरा रहा है. उन्होंने 1977 में, जिस साल कंपनी सूचीबद्ध हुई थी, 20 वर्ष की आयु में कंपनी के बोर्ड में शामिल हुए और 2002 में अपने पिता और RIL के संस्थापक धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बने. बाद में, अपने पिता की वसीयत न करने के कारण कंपनी के नियंत्रण को लेकर उनके छोटे भाई अनिल के साथ विवाद ने उनके उत्तराधिकार को जटिल बना दिया. हालांकि, अब अंबानी ने उत्तराधिकार को लेकर संकेत दिया है.
आजतक बिजनेस डेस्क