India Pak Tension: 25 साल और पाकिस्तान तबाह... एक समय भारत से 'आगे' था PAK, बर्बादी के ये बड़े कारण

India Pakistan Economy: पाकिस्तान की हमेशा ऐसी ही स्थिति थी, एक समय पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय भारत के मुकाबले ज्यादा थी. लेकिन अब पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत का मुकाबला नहीं कर सकता.

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अमित कुमार दुबे

  • नई दिल्ली,
  • 08 मई 2025,
  • अपडेटेड 3:14 PM IST

किसी भी देश को आगे बढ़ृने के लिए उसे अपनी इकोनॉमी (Economy) मजबूत करनी होती है. पिछले 25 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ी है, आज दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी भारतीय इकोनॉमी है, और अगले कुछ वर्षों में तीसरे पायदान तक पहुंचने की तैयारी पूरी है. 

लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं, जो इकोनॉमी के बदले आतंकवाद को दशकों से बढ़ावा देता रहा है, इस लिस्ट में पाकिस्तान का नाम भी शामिल है. भारत पिछले दो दशक से तरक्की की राह पर तेजी से आगे बढ़ता रहा और इस दौरान पाकिस्तान आतंक की साजिश में जुटा रहा, जिससे देश कंगाली के कगार पर पहुंच गया है, लोग पाई-पाई के लिए तरस रहे हैं. 

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ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान की हमेशा ऐसी ही स्थिति थी, एक समय पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय भारत के मुकाबले ज्यादा थी. लेकिन अब पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत का मुकाबला नहीं कर सकता. भारत की इकोनॉमी मजबूत है, जबकि पाकिस्तान कर्ज में डूबा हुआ है.  

दरअसल, पिछले 25 वर्षों में भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं में काफी अंतर आया है. पाकिस्तान लगातार पिछड़ता गया और भारत आगे बढ़ता रहा, साल 2000 में भारत और पाकिस्तान आर्थिक पैमाने पर बेहद करीब थे, दोनों की आर्थिक सेहत एक जैसी थी. लेकिन अब भारत ने पाकिस्तान को आर्थिक, सामाजिक और रक्षा क्षेत्रों में काफी पीछे छोड़ दिया है.

आर्थिक तुलना (2000-2025)
सकल घरेलू उत्पाद (GDP)- साल 2000 में:
- साल 2000 में भारत की जीडीपी करीब $468 बिलियन की थी, इस हिसाब से भारत उस समय विश्व की 13वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी. 
- साल 2000 में पाकिस्तान की जीडीपी करीब $74 बिलियन की थी, और विश्व की 45वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी. 

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प्रति व्यक्ति आय (साल 2000)
साल 2000 में भारत की प्रति व्यक्ति आय GDP के मुकाबले $442 थी. जबकि पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय $733 थी. यानी 25 साल पहले पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय भारत से अधिक थी. 

साल 2025 में क्या अंतर (भारत बनाम पाकिस्तान):
- आज भारत की इकोनॉमी करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की है, और विश्व की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. 
- पाकिस्तान की इकोनॉमी बदहाल है और फिलहाल महज $386 बिलियन की है. विश्व रैंकिंग में भारत से काफी दूर है. 

प्रति व्यक्ति आय (साल 2025)
भारत की GDP अब पाकिस्तान से लगभग 10 गुना अधिक है. अगर जीडीपी के मुकाबले प्रति व्यक्ति आय की बात करें तो भारत की प्रति व्यक्ति आय 11,110 डॉलर है, जबकि पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति आय 6,720 डॉलर है. 

विदेशी मुद्रा भंडार:
- साल 2000 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $38 बिलियन का था, और उस समय पाकिस्तान का महज $1.3 बिलियन का था. 
- साल 2025 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $686.14 बिलियन डॉलर है, जबकि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार महज 15 बिलियन डॉलर का है. ऐसे में फिलहाल भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पाकिस्तान से 45 गुना अधिक है. 

मुद्रा मूल्य (Currency Value):
साल 2000: 1 USD =45 INR, 12 PKR (पाकिस्तानी मुद्रा की वैल्यू अधिक थी.) 
साल 2025: 1 USD =84.54 INR, 280.82 PKR (पाकिस्तानी रुपये की वैल्यू काफी घटी है.)

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बेरोजगारी और गरीबी:
- भारत में साल 2000 में बेरोजगारी दर 7.3% थी, जो अब घटकर 4.9% पर पहुंच गई है. अत्यधिक गरीबी दर 2025 में केवल 2.3% थी. इस दौरान 171 मिलियन लोग गरीबी से बाहर निकले हैं. 
- पाकिस्तान में साल 2018 में बेरोजगारी दर 4.5% थी, जो अब बढ़कर 6-8% हो गई है. अत्यधिक गरीबी दर 42.4% रही. 

शेयर बाजार (Stock Market):
- भारतीय शेयर बाजार का मार्केट कैप बढ़कर $4 ट्रिलियन हो गया है. पिछले 10 वर्षों में 180% से ज्यादा का रिटर्न मिला है. 
- फिलहाल पाकिस्तानी बाजार का पूंजीकरण $100 बिलियन से कम है और पिछले 10 वर्षों में महज 35-40% रिटर्न मिला है. 

रक्षा बजट:
- साल 2025 में भारत का रक्षा बजट $81 बिलियन का है. जबकि पाकिस्तान का रक्षा बजट केवल 10 बिलियन डॉलर का है, भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान से 8 गुना ज्यादा है. 

आर्थिक वृद्धि दर:
- भारत ने पिछले 20 वर्षों में औसतन 6-7% वार्षिक दर आर्थिक तरक्की की है. वहीं पाकिस्तान की औसतन 3-4% आर्थिक विकास दर रही है. 

पाकिस्तान कैसे पिछड़ गया?
पाकिस्तान की आर्थिक गिरावट के कई कारण हैं, जिनमें नीतिगत असफलताएं, राजनीतिक अस्थिरता और भू-राजनीतिक गलतियां शामिल हैं. पिछले दो दशक में पाकिस्तान में बार-बार सैन्य तख्तापलट और अस्थिर सरकारें रही हैं. पाकिस्तान की राजनीति पर सैन्य ताकत हावी रही है. पाकिस्तान की आतंकी संगठनों को समर्थन देने की नीति ने विदेशी निवेश को हतोत्साहित किया. दुनिया की कंपनियां वहां कारोबार करने से हिचकती हैं. जबकि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया और वैश्विक स्तर पर विश्वसनीयता हासिल की, जिससे निवेश बढ़ा. 

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कर्ज ने किया पाकिस्तान का बंटाधार:
- पाकिस्तान ने IMF, विश्व बैंक, चीन और अन्य देशों से भारी कर्ज लिया है. 2025 में उसका कर्ज GDP का करीब 91% है. जबकि भारत ने कर्ज को नियंत्रित किया, और फिलहाल GDP का 64% कर्ज है. 

उद्योगों का पलायन:
- पाकिस्तान में उद्योग बर्बादी के कगार पर हैं. बड़े कारोबारी देश छोड़ रहे हैं. वहीं भारत ने मैन्युफैक्चरिंग और टेक क्षेत्र में निवेश आकर्षित किया. भारत ने 1991 में आर्थिक उदारीकरण शुरू किया, जिसमें व्यापार रुकावटें कम की गईं, विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया गया, और निजी क्षेत्र को तेजी से आगे बढ़ा. जिससे निर्यात बढ़ा और विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी हुई. 

शिक्षा में भी पिछड़ा पाकिस्तान:
भारत ने पिछले दो दशक में शिक्षा और कौशल विकास पर निवेश किया, जिससे एक बड़ा कार्यबल तैयार हुआ. 2025 में भारत की साक्षरता दर 80% है. जबकि पाकिस्तान की साक्षरता दर 60% से भी कम है.

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