Trump Hormuz Tax: ट्रंप का होर्मुज 'टोल टैक्स', भारत को भी देना पड़ेगा? जानिए क्या होगा असर

Donald Trump 20% Hormuz Tax: पहले से मिडिल ईस्ट युद्ध ने ग्लोबल टेंशन को चरम पर पहुंचा दिया है, तो तेल आयात पर निर्भर देशों के लिए सबसे अहम समुद्री रूट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड का Hormuz Toll Tax बड़ी मुसीबत बन सकता है.

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ट्रंप का नया ऐलान बढ़ा सकता है भारत की मुसीबत. (Photo: ITG) ट्रंप का नया ऐलान बढ़ा सकता है भारत की मुसीबत. (Photo: ITG)

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:20 PM IST

अमेरिका-ईरान में युद्ध (US-Iran War) जारी है. दुनिया की कुल तेल जरूरत के करीब 20 फीसदी की आपूर्ति के लिए जरूरी होर्मुज स्ट्रेट जंग का अखाड़ा बना हुआ है. यहां से गुजरने वाले जहाजों पर जहां एक ओर ईरान दनादन मिसाइल अटैक कर रहा है, तो वहीं अमेरिका इसकी सुरक्षा के लिए मैदान में है, लेकिन फ्री में नहीं, बल्कि यहां से गुजरने वाले हर जहाज को 20 फीसदी का होर्मुज टोल टैक्स (US Hormuz Toll Tax) देना होगा. 

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डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट पर फिर से अमेरिकी नाकाबंदी का ऐलान किया है और उन्होंने अमेरिका को इस जरूरी समुद्री रूट का रखवाला करार देते हुए जहाजों की निकासी के लिए चार्ज वसूलने का ऐलान किया है. सवाल ये कि क्या भारत को भी ये होर्मुज टैक्स देना होगा और अगर देगा तो क्या असर होगा? 

Trump ने होर्मुज टैक्स पर क्या कहा? 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जंग के बीच एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका दुनिया के एक बहुत समृद्ध हिस्से की रक्षा कर रहा है और ऐसा करके वो जिन देशों की मदद कर रहा है, उनसे उसे भुगतान मिलना चाहिए. Trump ने यह ऐलान भी किया कि अमेरिका ईरान पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी फिर से लागू कर रहा है और यहां से गुजरने वाले सभी कमर्शियल जहाजों पर 20% की दर से एक तरह का टोल टैक्स लगेगा. 

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हालांकि, ट्रंप ने जिस 20% चार्ज वसूलने का ऐलान किया है, वो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए लिया जाएगा और Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर पर लदे सभी प्रकार के कार्गो पर वसूला जाएगा. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका को अब से होर्मुज स्ट्रेट का रक्षक कहा जाएगा और जहाजों से वसूले गए टैक्स से होर्मुज सुरक्षा पर होने वाले खर्चों की भरपाई की जाएगी.' 

भारत के लिए बढ़ेगी मुसीबत!
कच्चे तेल के आयात पर निर्भर भारत समेत तमाम देशों के लिए ट्रंप का ये कदम बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है. देश में कुल जरूरत का 90 फीसदी कच्चा तेल आयात किया जाता है. इन आयातों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जिसमें इराक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और कतर से आने वाला कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंचता है. भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का लगभग 40%, LNG शिपमेंट का 60% और LPG आयात का 90% इसी होर्मुज से होकर आता है. 

होर्मुज की बिगड़ती स्थिति पहले ही तेल परिवहन की लागत को बढ़ा रही है, उसपर Trump Hormuz Toll चिंता बढ़ाने वाला है. भारत के लिहाज से ये 20% चार्ज  ऊर्जा आयात लागत में इजाफा करेगा, जिससे रिफाइनर, शिपिंग कंपनियों और बीमाकर्ताओं पर दबाव बढ़ेगा. आगे का असर ये होगा कि माल आयात और बीमा लागत में वृद्धि, देश के ईंधन आयात बिल पर दबाव डालेगी और महंगाई को कंट्रोल करने की कोशिशों को जटिल बना सकती है. 

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पेट्रोल-डीजल, LPG होगी महंगी!
इस ट्रंप टैक्स के साइड इफेक्ट इतने ही नहीं हैं, बल्कि भारत का आयात बिल बढ़ने से देश का व्यापार संतुलन दबाव में पड़ सकता है. इससे चालू खाता घाटा बढ़ेगा, रुपया कमजोर होगा और आयात महंगा होगा. अगर तेल-गैस का आयात महंगा होगा, तो ईंधन की ये बढ़ती लागत भी महंगाई को बढ़ावा देगी. परिवहन भी महंगा होने पर जरूरी सामान और सेवाएं महंगी होंगी. 

ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भर उद्योगों को ऑपरेशनल कॉस्ट में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ सकता है. साफ शब्दों में कहें तो होर्मुज टैक्स के कारण उत्पन्न ऊर्जा संकट लंबे समय तक सिर्फ तेल से जुड़ा मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि जल्द ये महंगाई, व्यापार और इकोनॉमिक ग्रोथ से संबंधित हो जाएगा. पेट्रोल-डीजल, एलपीजी पर महंगाई देखने को मिल सकती है. बता दें जून में पहले ही देश में खुदरा महंगाई 17 महीनों के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के शॉर्ट टर्म लक्ष्य को पार कर चुकी है. 

इस बार पहले से ज्यादा तैयार भारत 
बात साफ है कि Hormuz 20% Tax से भारत और अन्य तेल आयात पर निर्भरता वाले देशों पर बुरा असर होगा. लेकिन भारत मिडिल ईस्ट संकट को लेकर इस बार पहले से ज्यादा तैयार है. सिर्फ खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करते हुए भारत ने अपने आयात में विविधता लाई है और रूस समेत अन्य स्रोतों से खरीद बढ़ाई है. इनमें USA, पश्चिम अफ्रीका, ब्राजील, गुयाना और वेनेजुएला शामिल हैं. इसके अलावा घरेलू गैस-तेल उत्पादन बढ़ाया गया है. 

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