विक्रमशिला पुल हादसे को लेकर एक्शन में CM सम्राट चौधरी, बुलाई उच्चस्तरीय बैठक

बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला ब्रिज का एक हिस्सा अचानक टूटकर नदी में गिर गया. अधिकारियों की सतर्कता से पहले ही लोगों को हटा लिया गया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया. घटना के बाद सोमवार को सीएम सम्राट चौधरी ने हाई लेवल बैठक बुलाई. बैठक में दोनों डिप्टी सीएम, मुख्य सचिव, विकास आयुक्त, पथ निर्माण विभाग और NHAI अधिकारी मौजूद रहे.

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बैठक में दोनों डिप्टी सीएम भी मौजूद.(File Photo: ITG) बैठक में दोनों डिप्टी सीएम भी मौजूद.(File Photo: ITG)

शशि भूषण कुमार

  • भागलपुर,
  • 04 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:42 PM IST

बिहार के भागलपुर में गंगा नदी पर बने ऐतिहासिक विक्रमशिला ब्रिज पर रविवार रात बड़ा हादसा होते-होते टल गया. पुल का एक हिस्सा अचानक टूटकर नदी में गिर गया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया. राहत की बात यह रही कि मौके पर मौजूद अधिकारियों ने पहले ही लोगों को पुल से हटा दिया था, जिसके कारण कोई जनहानि या घायल होने की खबर नहीं है.

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वहीं, घटना के बाद प्रशासन और सरकार तुरंत सक्रिय हो गई. पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से को लेकर सुरक्षा और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय स्तर पर हालात का जायजा लिया जा रहा है और पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया है.

यह भी पढ़ें: बिहार में फिर गिरा पुल... भागलपुर में विक्रमशिला ब्रिज का हिस्सा गंगा में समाया

हादसे के बाद राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उच्चस्तरीय समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तत्काल उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है.

सीएम ने बुलाई हाई लेवल बैठक

मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई इस अहम बैठक में दोनों डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी भी मौजूद रहे. बैठक में राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को बुलाकर पूरे मामले की विस्तृत समीक्षा की गई.

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बैठक में मुख्य सचिव सहित कई वरीय अधिकारी शामिल हुए. इसके साथ ही विकास आयुक्त और पथ निर्माण विभाग के सचिव भी मौजूद रहे. पुल की स्थिति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई.

बैठक में एनएचएआई के अधिकारियों को भी शामिल किया गया, ताकि तकनीकी पहलुओं पर तुरंत निर्णय लिया जा सके. सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी.

25 साल पुराना पुल, अब इस्तेमाल के लायक नहीं

बता दें कि यह पुल साल 2001 में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था. करीब 4.5 किलोमीटर लंबा यह सेतु हजारों वाहनों और लाखों लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का प्रमुख साधन था. लेकिन महज 25 साल के भीतर ही इसका एक बड़ा हिस्सा गंगा में समा गया, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत इस पर आवाजाही रोक दी.

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