भारत में सेकंड हैंड गाड़ियों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. कुछ वक्त पहले तक ये मार्केट अलग तरीके से काम करता था, लेकिन कार्स 24 (Cars24) और स्पिनी (Spinny) जैसे प्लेयर्स की एंट्री के बाद मार्केट काफी बदल गया है. पहले ये पता करना मुश्किल था कि सेकंड हैंड मार्केट में लोग क्या खरीद रहे है, लेकिन अब ऐसा नहीं है.
देश में सेकंड हैंड कारों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है. इसमें सबसे ज्यादा मांग हैचबैक और एसयूवीज की हैं. एसयूवीज का मार्केट शेयर लगभग 32 फीसदी है और ये सेगमेंट तेजी से पॉपुलर हो रहा है. ऑर्गनाइज्ड सेकंड हैंड मार्केट में एंट्री-लेवल और कॉम्पैक्ट एसयूवीज की मांग सबसे ज्यादा है. आइए इस पूरे मार्केट को समझते हैं.
कार्स24 के डेटा के मुताबिक, मारुति सुजुकी बलेनो (15.5 फीसदी मार्केट शेयर) सबसे ज्यादा बिकने वाली कारों में से एक है. वहीं हुंडई ग्रैंड आई10 (13.2 फीसदी) और रेनो क्विड (11.3 फीसदी) को भी लोग सेकंड हैंड मार्केट में खरीद रहे हैं. वहीं टाटा नेक्सन (11 फीसदी) और हुंडई क्रेटा (7.1 फीसदी) जैसे एसयूवीज की भी यूज्ड मार्केट में अच्छी डिमांड है.
वित्तवर्ष 2026 के लिए CRISIL, कार्स24 और स्पिनी जैसे प्लेटफॉर्म्स के मुताबिक, यूज्ड कार मार्केट में हैचबैक अब भी सबसे पॉपुलर हैं. सबसे ज्यादा यूज्ड कार इस सेगमेंट में ही बिक रही है. इस सेगमेंट में की हिस्सेदारी लगभग 46 फीसदी है. खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में हैचबैक की मांग काफी है. जबकि एसयूवीज दूसरा सबसे पॉपुलर सेगमेंट है, जिसकी हिस्सेदारी 32 फीसदी तक पहुंच गई है.
हैचबैक की ज्यादा सेल की वजह कम बजट में इस तरह की कारों का दबदबा है. अगर आपका बजट 5 लाख रुपये से कम है, तो आपको यूज्ड कारों के मार्केट में ज्यादातर विकल्प हैचबैक के मिलेंगे. साथ ही ये ज्यादा प्रैक्टिकल और कम मेंटेनेस वाले मॉडल होते हैं. जैसे-जैसे लोगों का बजट बढ़ता है, वो दूसरे विकल्पों की ओर बढ़ने लगते हैं.
प्री-ओन्ड एसयूवी मार्केट में सबसे ज्यादा डिमांड 5 से 12 लाख की कीमत वाली गाड़ियों की है. कंज्यूमर्स 3 से 5 साल पुरानी एसयूवीज को खरीदना पसंद कर रहे हैं. इसका एक बड़ा कारण इन कारों में लेटेस्ट फीचर्स और भरोसेमंद परफॉर्मेंस का मिलना है. साथ ही नई कार के मुकाबले अच्छी-खासी बचत हो जाती है.
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इंडस्ट्री एस्टीमेट की मानें, तो 3 से 5 साल पुरानी गाड़ियां यूज्ड कार मार्केट के कुल बाजार का करीब 46 फीसदी हिस्सा हैं. इसकी वजह ऐसी कारों की शुरुआती वैल्यू में गिरावट है. यानी लोगों को कम पुरानी कारों में बेहतर वैल्यू मिलती है. कई बार ऐसी कारों के साथ लोगों को वारंटी भी मिल जाती है.
प्रीमियम एसयूवीज की बिक्री एंट्री-लेवल मॉडल्स जितनी नहीं है, लेकिन कारोबार के लिहाज से इनका महत्व लगातार बढ़ रहा है. 12 लाख रुपये से ऊपर वाला SUV सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है. लोग अब ज्यादा फीचर्स और बड़े साइज वाली एसयूवीज की ओर जा रहे हैं.
ऑटोबेस्ट एम्पेरियो के फाउंडर और डायरेक्टर अवनीत सिंह कोहली ने बताया, 'एंट्री-लेवल और कॉम्पैक्ट SUV सेगमेंट की मांग सबसे ज्यादा (एसयूवी सेगमेंट में) है. क्योंकि ये अफोर्डेबल, प्रैक्टिकल और वैल्यू का बेहतरीन बैलेंस ऑफर करती हैं. ऑर्गनाइज्ड प्री-ओन्ड बाजार में ये सबसे तेजी से बिकती हैं.'
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उन्होंने बताया ' वहीं दूसरी तरफ, कंज्यूमर्स अब प्रीमियम एसयूवीज के लिए अपना बजट भी बढ़ा रहे हैं. इस सेगमेंट में बिक्री भले कम हो, लेकिन फायदा काफी ज्यादा होता है. आज कंज्यूमर्स प्री-ओन्ड प्रीमियम एसयूवीज को एक स्मार्ट फाइनेंशियल अपग्रेड मान रहे हैं.'
भारतीय सेकंड हैंड कार मार्केट तेजी से बढ़ रहा है और इसकी वजह ऑर्गनाइज्ड प्री-ओन्ड प्लेटफॉर्म्स हैं. ऐसे प्लेटफॉर्म्स के आने से लोगों में भरोसा बढ़ा है. इसकी वजह सर्टिफाइड इंस्पेक्शन, ट्रांसपैरेंट प्राइस, वारंटी और डिजिटल फाइनेंसिंग जैसी सर्विसेस हैं. इनकी वजह से लोग यूज्ड कारों को आसानी से खरीद पा रहे हैं.
कार्स24 के वित्तवर्ष 2026 के डेटा के मुताबिक, 7 लाख से ज्यादा कीमत वाली यूज्ड कारों में 60 फीसदी से अधिक गाड़ियां फाइनेंसिंग के जरिए खरीदी जा रही हैं. आसानी से लोन मिलने की वजह से कंज्यूमर्स आगे बढ़कर प्रीमियम एसयूवीज खरीद पा रहे हैं, जबकि नई कार की तुलना में उन्हें यूज्ड मार्केट में ज्यादा वैल्यू भी मिल रही है.
अभिषेक मिश्रा