दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर चलेगा FASTag एनुअल पास? जानें कितना लगेगा Toll

Delhi Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेव 213 किलोमीटर लंबा है और इस पर 6 लेन बनाए गए हैं. तकरीबन 12,000 करोड़ रुपये के बजट में तैयार किए गए इस एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली से देहरादून की यात्रा महज ढ़ाई घंटे में ही पूरी की जा सकेगी.

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की शुरुआत आज से हो जाएगी. Photo: ITG दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की शुरुआत आज से हो जाएगी. Photo: ITG

अश्विन सत्यदेव

  • नई दिल्ली,
  • 14 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:18 PM IST

Delhi Dehradun Expressway FASTag Toll: दिल्ली से देहरादून जाने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है. लंबे समय से जिस एक्सप्रेसवे का इंतजार हो रहा था, अब वह आखिरकार शुरू होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज उत्‍तराखंड के देहरादून में दिल्‍ली- देहरादून कोरिडोर का उद्घाटन किया. जिसके बाद यह एक्सप्रेसवे आम लोगों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया. इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने वाली है, जो रास्ता अब तक ट्रैफिक, थकान और लंबा इंतजार लेकर आता था, वही अब तेज, स्मूद और आरामदायक होने जा रहा है. यानी पहाड़ों की ठंडी हवा अब पहले से कहीं ज्यादा जल्दी और करीब से महसूस होगी.

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (Delhi – Dehradun Expressway) के शुरू होने से पहले इस रूट पर नज़रे टिकाए लोगों के जेहन में तमाम तरह के सवाल हैं, मसलन इस रोड पर टोल टैक्स कितना लगेगा, क्या इस पर FASTag का सालाना पास काम करेगा, इस रूट पर यात्रा का खर्च कितना होगा? इत्यादि. आज हम आपके लिए ऐसे ही सवालों के जवाब लेकर आए हैं. 

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर FAStag एनुअल पास काम करेगा. Photo: ITG

इस एक्सप्रेसवे को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा डेवलप किया गया है और यही इसे मैनेज भी करेगी. करीब 213 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली से देहरादून का सफर अब 6-7 घंटे की जगह सिर्फ लगभग 2.5 घंटे में पूरा किया जा सकेगा. यानी जो सफर पहले पूरा दिन ले लेता था, अब वह कुछ ही घंटों में पूरा हो जाएगा. इससे वीकेंड ट्रिप प्लान करने वालों के लिए यह एक शानदार ऑप्शन बन जाएगा.

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एक्सप्रेसवे पर लगने वाले टोल चार्ज को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से देहरादून तक एक तरफ का सफर करने पर कार और SUV के लिए करीब 670 से 675 रुपये खर्च होंगे. अगर आप 24 घंटे के अंदर राउंड ट्रिप करते हैं तो इसकी कीमत लगभग 1,010 रुपये होगी. वहीं हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए यह शुल्क करीब 1,100 रुपये तक हो सकता है, जबकि बस और भारी ट्रकों के लिए यह 2,300 रुपये से ज्यादा हो सकता है. हालांकि अभी इसके बारे में NHAI के फाइनल अपडेट का इंतजार है.

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इस एक्सप्रेसवे पर एक खास राहत भी दी गई है. अक्षरधाम से लोनी बॉर्डर के बीच का हिस्सा पूरी तरह टोल फ्री रहेगा. यानी इस हिस्से में सफर करने पर यात्रियों को कोई शुल्क नहीं देना होगा.

क्या काम करेगा FASTag एनुअल पास

जी हां, चूंकि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का संचालन नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) द्वारा किया जा रहा है तो इस रूट पर FasTag सालाना पास पूरी तरह लागू होगा. नियमों के अनुसार फास्टैग एनुअल पास राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) टोल प्लाजाओं पर ही मान्य है. राज्य सरकारों, लोकल एजेंसियों की ओर से मैनेज किए जाने वाले एक्सप्रेसवे, स्टेट हाईवे (SH), इत्यादि के टोल प्लाओं पर सालाना पास एनुअल पास लागू नहीं होगा. इन सड़कों पर FAStag सामान्य ढंग से ही काम करता है. 

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अगर आप इस रूट (दिल्ली-देहरादून) पर अक्सर सफर करते हैं, तो FASTag आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. सालाना FASTag पास की कीमत 3,075 रुपये रखी गई है, जो एक साल या 200 ट्रिप तक के लिए वैलिड होगा. इसके अलावा मंथली या लोकल पास का भी इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनसे रेगुलर ट्रिप पर 30 से 40 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है. 

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर संचालन NHAI द्वारा किया जाएगा. Photo: ITG

क्यों महंगा है टोल

इस एक्सप्रेसवे का टोल थोड़ा ज्यादा जरूर है, लेकिन इसके पीछे बड़ी वजह है. 6 लेन, 210 किलोमीटर तक की दूरी और तकरीबन 12,000 करोड़ रुपये का बज़ट. यह एक्सप्रेसवे शिवालिक के जंगलों और पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरती है, जहां मॉडर्न टेक्नोलॉजी और टफ इंजीनियरिंग का इस्तेमाल किया गया है. यही कारण है कि इस एक्सप्रेसवे के निर्माण की लागत ज्यादा आई है. हालांकि समय की बचत को देखते हुए कई यात्रियों के लिए यह खर्च वाजिब माना जा रहा है.

क्या है रूट

दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे राजधानी के अक्षरधाम मंदिर से शुरू होता है, जो इस पूरे प्रोजेक्ट का स्टार्टिंग प्वाइंट है. फास्ट और ईजी जर्नी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह कॉरिडोर रास्ते में कई अहम जिलों से होकर गुजरता है. इसमें बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर जैसे जिले शामिल हैं, जहां से होकर यह एक्सप्रेसवे आगे बढ़ता है. इसके बाद यह उत्तराखंड में प्रवेश करता है और सीधे देहरादून से जुड़ जाता है, जिससे दिल्ली से पहाड़ों का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाता है.

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इस एक्सप्रेसवे को सुविधाजनक बनाने के लिए इसमें कई खास इंतजाम किए गए हैं. इस एक्सप्रेसवे पर 113 व्हीक्युलर अंडरपास बनाए गए हैं, ताकि लोकल लोगों की आवाजाही बनी रहे और ट्रैफिक में कोई रुकावट न आए. इसके अलावा यात्रियों की सुविधा के लिए 62 बस शेल्टर भी तैयार किए गए हैं. इस कॉरिडोर में करीब 76 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड बनाई गई है, जिससे आसपास के इलाकों के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके. साथ ही कई एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स दिए गए हैं, ताकि लोग अपनी जरूरत के हिसाब से आसानी से एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर सकें. इसके अलावा रास्ते में कई वे-साइड फैसिलिटीज भी डेवलप की गई हैं, जहां यात्रियों को आराम, खाने-पीने और अन्य जरूरी सुविधाएं मिल सकें.

वन्य जीवों की सेफ्टी 

NHAI का कहना है कि, वन्य जीवों की सेफ्टी के लिए वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) के साथ मिलकर एक स्टडी की गई. जिसके बाद 'लैंडस्केप रीकनेक्टेड' नाम से एक रिपोर्ट जारी की गई. इस रिपोर्ट में पाया गया है कि, इकोलॉजिकली सेंसिटिव होने के नाते इस कोरिडोर पर बनाए गए अंडरपास का इस्तेमाल वन्य जीव कर रहे हैं. यानी जो व्यवस्था जानवरों की सुरक्षित आवाजाही के लिए बनाई गई थी, वह जमीन पर कारगर साबित हो रही है. 

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यह पूरा इलाका घने जंगलों से घिरा हुआ है और यहां बाघ, हाथी, ग्रेटर हॉर्नबिल और किंग कोबरा जैसे दुर्लभ जीव पाए जाते हैं. इस कोरिडोर को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि, वन्‍य जीवों को किसी तरह का कोई नुकसान न हो. इनमें 12 किलोमीटर लंबा वन्‍य जीव एलीवेटेड कोरिडोर शामिल है. इस कोरिडोर में 8 पशु मार्ग, 200 मीटर लंबा दो हाथी अंडर पास और दातकाली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी बनाई गई है. 

गणेशपुर से अशारोड़ी के बीच करीब 20 किलोमीटर के हिस्से में कुल 10.97 किलोमीटर लंबे अंडरपास बनाए गए हैं, ताकि जानवर बिना किसी रुकावट के आसानी से एक जगह से दूसरी जगह जा सकें. यही नहीं, यहां एशिया के सबसे बड़े वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर में से एक भी बनाया गया है, जिसकी ऊंचाई औसतन 6 से 7 मीटर रखी गई है, ताकि बड़े से बड़े जानवर भी आराम से गुजर सकें.

इस एक्सप्रेसवे पर 12 किलोमीटर लंबा वन्‍य जीव एलीवेटेड कोरिडोर भी बनाया गया है. Photo: ITG

इस स्टडी को बेहतर तरीके से समझने के लिए पूरे इलाके को तीन जोन में बांटा गया. जोन I में गणेशपुर से मोहंड तक 5.43 किलोमीटर का हिस्सा शामिल किया गया. जोन II में मोहंड से अशारोड़ी पुलिस चेक पोस्ट तक 9.80 किलोमीटर का क्षेत्र रखा गया. वहीं जोन III में अशारोड़ी पुलिस चेक पोस्ट से देहरादून के मोहबेवाला तक 3.14 किलोमीटर का हिस्सा शामिल किया गया. इस पूरे क्षेत्र में नदी के किनारे वाले सपाट इलाकों, पहाड़ी हिस्सों और शिवालिक रेंज के साल के जंगलों को कवर किया गया.

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कुल मिलाकर दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे यात्रियों के लिए गेम चेंजर साबित होने वाला है. कम समय, बेहतर सड़क और स्मूद ड्राइविंग का एक्सपीरिएंस इसे खास बनाता है. अब पहाड़ों की सैर करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और फास्ट हो जाएगा.

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